दलमा वन अभ्यारण्य में कर्मचारियों का आंदोलन तेज, श्रमिकों ने बंद किया काम 

Edited by Sweta Vaidya
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श्रमिकों ने बंद किया काम

Dalma Wildlife Sanctuary: दलमा वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों ने कामकाज ठप कर दिया है. श्रमिकों का आरोप है कि यूनियन बनाकर अपनी मांगें उठाने के बाद विभाग ने कार्रवाई की है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें. 

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जमशेदपुर से ब्रजेश की रिपोर्ट

Dalma Wildlife Sanctuary: दलमा वन्य प्राणी अभ्यारण्य में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों और वन विभाग के बीच विवाद गहरा गया है. कर्मचारियों का आरोप है कि अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर संगठन बनाना तथा डीएफओ को ज्ञापन सौंपना उन्हें महंगा पड़ गया. कर्मचारियों के अनुसार, पहले खिरोध सिंह को काम से बैठाया गया था, जिसके बाद सभी श्रमिकों ने एकजुट होकर दलमा वन श्रमिक यूनियन का गठन किया. यूनियन गठन के बाद कर्मचारियों ने अपनी अलग-अलग मांगों और समस्याओं को लेकर एक ज्ञापन तैयार किया और उसे वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) को सौंपने के लिए जमशेदपुर स्थित कार्यालय पहुंचे. कर्मचारियों का कहना है कि ज्ञापन सौंपकर लौटने के तुरंत बाद रेंजर द्वारा यूनियन से जुड़े कर्मचारी महेश माहली को काम से बैठा दिया गया. 

12 घंटे से अधिक ड्यूटी, लेकिन सुविधाओं का अभाव 

महेश माहली को बिना किसी कारण बताए काम से हटाए जाने की सूचना मिलते ही दलमा के अन्य दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों में आक्रोश फैल गया. कर्मचारियों ने एकता का परिचय देते हुए सामूहिक निर्णय लिया और सभी ने एक साथ काम पर जाना बंद कर दिया. बाद में कर्मचारी मंगल सिंह को भी काम से बैठा दिए जाने का आरोप लगाया गया. कर्मचारियों का कहना है कि उनसे दिन और रात दोनों समय काम लिया जाता है, लेकिन वेतन केवल 26 दिनों का दिया जाता है. कई बार उनकी ड्यूटी 12 घंटे से अधिक की होती है, इसके बावजूद उन्हें पीएफ, इएसआइ, स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा अथवा किसी भी तरह की सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ नहीं मिलता. यूनियन ने ड्यूटी के दौरान घायल हुए कर्मचारी विक्रम हांसदा का मामला भी उठाया है. कर्मचारियों के अनुसार, कुछ समय पहले चेक नाका में ड्यूटी के दौरान हुए एक विवाद में विक्रम हांसदा गंभीर रूप से घायल हो गए थे और उनके सिर में चोट लगी थी. मामले में प्राथमिकी दर्ज हुई तथा आरोपी जेल भी गया, लेकिन विभाग की ओर से उनके इलाज की कोई व्यवस्था नहीं की गई. वर्तमान में वे अपना उपचार स्वयं कराने को मजबूर हैं. कर्मचारियों का कहना है कि दलमा वन क्षेत्र की सुरक्षा, हाथियों की देखरेख, गश्ती और अन्य महत्वपूर्ण कार्यों का बड़ा हिस्सा दैनिक वेतनभोगी श्रमिकों के भरोसे संचालित होता है. इसके बावजूद वर्षों की सेवा के बाद भी उन्हें न तो सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिला है और न ही श्रम नियमों के अनुसार कुशल अथवा अति-कुशल श्रमिक का दर्जा दिया गया है. 

श्रमिक यूनियन की मांग

दलमा वन श्रमिक यूनियन ने मांग की है कि खिरोध सिंह, महेश माहली और मंगल सिंह को तत्काल फिर काम पर रखा जाए. साथ ही सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को पीएफ, इएसआइ, जीवन बीमा, चिकित्सा सुविधा और अन्य श्रमिक अधिकारों का लाभ दिया जाए. यूनियन ने यह भी मांग की है कि दलमा क्षेत्र में रात के समय भी अधिकारियों या सरकारी गार्ड की तैनाती सुनिश्चित की जाए, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहायता मिल सके. यूनियन का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होती और डीएफओ के साथ वार्ता कर समाधान नहीं निकाला जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा.

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Sweta Vaidya

लेखक के बारे में

By Sweta Vaidya

श्वेता वैद्य प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के तौर पर काम करती हैं. उन्हें कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में एक साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में श्वेता झारखंड बीट को कवर कर रही हैं, जहां वह राज्य की ताजा खबरें, लोगों की भलाई से जुड़े मुद्दे, सरकारी योजनाओं, स्थानीय प्रशासन, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विषयों पर आधारित स्टोरीज तैयार करती हैं. श्वेता की हर बार कोशिश यही रहती है कि बात आसान, साफ और सीधे तरीके से लोगों तक पहुंचे, जिससे कि हर कोई उसे बिना दिक्कत के समझ सके. कंटेंट राइटर के तौर पर उनका फोकस होता है कि कंटेंट सिंपल, रिलेटेबल और यूजर-फ्रेंडली हो. झारखंड बीट से पहले उन्होंने लाइफस्टाइल बीट के लिए भी कंटेंट लिखा. इस बीट में उन्होंने रेसिपी, फैशन, ब्यूटी टिप्स, होम डेकोर, किचन टिप्स, गार्डनिंग टिप्स और लेटेस्ट मेहंदी डिजाइन्स जैसे रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों पर आर्टिकल लिखे.

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