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निजी स्कूल ‘बीपीएल का स्वागत है’ का बोर्ड लगायें

जमशेदपुर : निजी स्कूलों में गरीब अौर अभिवंचित वर्ग के बच्चों का दाखिला नहीं होने के लिए निजी स्कूल जिम्मेवार हैं. निजी स्कूल बीपीएल उम्मीदवारों के सामने इतनी कानूनी दावं पेंच दिखाते हैं कि वह दो-तीन बार के बाद स्कूल में आना बंद कर देते हैं. निजी स्कूलों को बीपीएल की खाली सीटों की सूचना […]

जमशेदपुर : निजी स्कूलों में गरीब अौर अभिवंचित वर्ग के बच्चों का दाखिला नहीं होने के लिए निजी स्कूल जिम्मेवार हैं. निजी स्कूल बीपीएल उम्मीदवारों के सामने इतनी कानूनी दावं पेंच दिखाते हैं कि वह दो-तीन बार के बाद स्कूल में आना बंद कर देते हैं. निजी स्कूलों को बीपीएल की खाली सीटों की सूचना सार्वजनिक करनी होगी. इसके लिए स्कूल के बाहर बोर्ड लगाना होगा, जिस पर बीपीएल बच्चों का स्वागत है सहित उक्त जानकारी देनी होगी. उक्त बातें राज्य सरकार के प्राइमरी एजुकेशन डायरेक्टर डॉ कमल शंकर श्रीवास्तव ने कही. वे मंगलवार को शहर पहुंचे.

यहां उन्होंने सुंदरनगर कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, गोलमुरी स्थित अनाथालय अौर इस्कॉन के मिड डे मील केंद्र का दौरा किया. इसके बाद वे शाम को चमरिया गेस्ट हाउस पहुंचे. यहां पत्रकारों के साथ उन्होंने राज्य के शिक्षा व्यवस्था पर बातचीत की. उन्होंने कहा कि राज्य में सरकारी शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव दिख रहा है. इससे पूर्व उन्होंने स्टेट से आयी 10 सदस्यीय टीमों से अलग-अलग प्रखंडों के स्कूलों की जानकारी ली. उन्होंने कहा कि अगर जिले में बीपीएल कार्ड नहीं बन पाया है, तो आय प्रमाण पत्र के जरिये भी एडिमशन हो सकता है.

आठ महीने तक करें बीपीएल बच्चों का इंतजार : डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि निजी स्कूल बीपीएल बच्चे की सीट पर सामान्य बच्चे का दाखिला नहीं ले सकते हैं. निजी स्कूलों को बीपीएल बच्चों का इंतजार आठ महीने तक करना होगा. हालांकि निजी स्कूल 6 महीने की मांग कर रहे थे, जिसे खारिज कर दिया गया है.
कस्तूरबा की 8वीं की छात्राअों को इस सप्ताह मिलेगा टैबलेट
कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की 8वीं की छात्राअों को राज्य सरकार की अोर से टैबलेट दिया जा रहा है. डॉ श्रीवास्तव ने बताया कि इस सप्ताह सभी कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की छात्राअों को टैबलेट मिल जायेगा. इसका दुरुपयोग ना हो इसके लिए ह्वाट्स एप, फेसबुक समेत कई साइट ब्लॉक किये जायेंगे.
कस्तूरबा की वार्डन का काम अनुकरणीय
कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय की वार्डन की उन्होंने तारीफ की. उन्होंने कहा कि छात्राएं वार्डन को मम्मी कह रही थी. छात्राअों से पूछा गया, तो उन्होंने बताया कि वे उनकी मां की तरह देखभाल करती हैं.
425 रुपये लेने से किया इनकार, मामला कोर्ट में
निजी स्कूलों में इस बार कम बीपीएल बच्चों के एडिमशन पर उन्होंने कहा कि निजी स्कूल इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. वे बार-बार पैसे नहीं मिलने को कारण बता रहे हैं, जबकि सरकार ने 425 रुपये प्रति बच्चे प्रति महीने के हिसाब से देना तय किया. इसके खिलाफ हाइकोर्ट में पीआइएल की गयी. इस मामले में कोर्ट से कोई फैसला नहीं आया है. कोर्ट के आदेश का पालन किया जायेगा.
अल्पसंख्यक स्कूलों के सर्टिफिकेट की होगी जांच
डॉ श्रीवास्तव ने कहा कि राज्य के अल्पसंख्यक स्कूल आरटीइ कानून का पालन यह कहते हुए नहीं करते कि उन पर कानून लागू नहीं होता है. अब राज्य के सभी अल्पसंख्यक स्कूलों के सर्टिफिकेट की जांच होगी. इसके लिए सभी जिलों के डीएसइ को पत्र लिखा गया है.

Prabhat Khabar Digital Desk
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