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रेडियोलॉजिस्ट के नहीं रहने से जांच बंद, एक दिन में तीन मरीज रेफर

Updated at : 16 Jan 2019 5:32 AM (IST)
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रेडियोलॉजिस्ट के नहीं रहने से जांच बंद, एक दिन में तीन मरीज रेफर

जमशेदपुर : एमजीएम में रेडियोलॉजिस्ट के नहीं रहने के कारण इलाज कराने आने वाले मरीजों को बाहर रेफर किया जा रहा है. मंगलवार को एमजीएम से तीन मरीजों को टीएमएच रेफर किया गया. तीनों सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद इलाज कराने एमजीएम पहुंचे थे. मंगलवार को डिमना चौक के पास स्कूटी व बाइक […]

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जमशेदपुर : एमजीएम में रेडियोलॉजिस्ट के नहीं रहने के कारण इलाज कराने आने वाले मरीजों को बाहर रेफर किया जा रहा है. मंगलवार को एमजीएम से तीन मरीजों को टीएमएच रेफर किया गया. तीनों सड़क दुर्घटना में घायल होने के बाद इलाज कराने एमजीएम पहुंचे थे.
मंगलवार को डिमना चौक के पास स्कूटी व बाइक में टक्कर हो गयी, जिसमें मानगो के सोनू घायल हो गये. घटना के बाद मौके पर मौजूद लोग घायल को लेकर एमजीएम पहुंचे, तो डॉक्टरों ने बताया कि उसके पैर और सिर में काफी चोट है.
इसके कारण घायल की स्थिति काफी गंभीर है, दूसरे अस्पताल लेकर चले जायें. वहीं एमजीएम में रेडियोलॉजिस्ट के नहीं होने के कारण सिटी स्कैन की रिपोर्ट तैयार नहीं हो सकती है. यही हाल एमजीएम के अल्ट्रासाउंड और एक्सरे विभाग की भी है. अस्पताल में इस तरह के जितने भी मरीज आ रहे हैं उन सभी को दूसरे अस्पताल में रेफर किया जा रहा है.
क्या कहते हैं पदाधिकारी : अधीक्षक डॉ एसएन झा ने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट का अनुबंध खत्म हो गया है, लेकिन उनके जाने से अस्पताल में परेशानी होती, इस बात से विभाग को अवगत करा दिया गया था. इसके बाद भी विभाग द्वारा रिलीज करने के लिए कहा गया.
बाकी जगहों पर पहले ही अनुबंध पर नियुक्त सभी वैसे डॉक्टर जिनका समय सीमा समाप्त हो गया है, उनको रिलीज कर दिया गया. इसके बाद यहां से किया गया. अस्पताल में मरीजों को हो रही परेशानी से लगातार विभाग को अवगत कराया जा रहा है. वहीं विभाग से कहा गया है कि जल्द ही डॉक्टर उपलब्ध कराया दिया जायेगा.
वार्ड में घुस जाता है नाली का पानी
एमजीएम की बर्न यूनिट जाने वाले रास्ते पर नाली का पानी बह रहा है. इससे होकर चलना मुश्किल है. नाली का पानी वार्ड के अंदर भी आ जाता है. इससे मरीजों में इंफेक्शन होने का भय बना है. अस्पताल में भवन से सड़क तक का काम भवन निर्माण विभाग करता है. अनुमान के अनुसार सड़क बनाने में दो लाख तक खर्च आयेगी, लेकिन इस दिशा में अब तक पहल भी नहीं की गयी है.

विभाग के पास एनेस्थीसिया का सामान नहीं
एमजीएम की बर्न यूनिट में भर्ती मरीजों का ऑपरेशन आवश्यक होने के बावजूद नहीं हो पा रहा है. इसके कारण ऑपरेशन की जगह मरीजों को मरहम-पट्टी बांध कर काम चलाया जा रहा. बर्न यूनिट में ऑपरेशन के लिए एनेस्थीसिया का सामान तक नहीं है. बर्न केस में मरीज को इलाज में विलंब होने पर संक्रमण का खतरा बना रहता है, जो कभी-कभी जान ले लेता है.
इसके बावजूद डॉक्टर सामान्य प्रक्रिया अपनाने को विवश हैं. वहीं, बर्न यूनिट के एचओडी डॉ ललित मिंज के अनुसार ऑपरेशन के लिए कुछ मशीन आयी है, लेकिन संसाधन पूरे नहीं होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं. पहले मरीजों को सर्जरी की ओटी में ले जाकर ऑपरेशन किया जाता था.
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