जमशेदपुर : बीएसएनएल का तीसरा पे रिवीजन एक जनवरी 2017 से लंबित है. हर दस साल में हाेनेवाले पे रिवीजन का अंतिम लाभ बीएसएनएल कर्मचारियाें काे 2007 में मिला था. दूसरे पे रिवीजन में कर्मचारियाें-पदाधिकारियाें काे 24-25 प्रतिशत का लाभ वेतन मद में बढ़ोतरी के रूप में मिला था. तीसरे पे रिवीजन काे लेकर 20 जुलाई काे दिल्ली में बीएसएनएल प्रशासन आैर यूनियन के बीच बैठक हाेनेवाली है, जिसका काेल्हान के 800 से अधिक कर्मचारियाें काे इंतजार है.
पे रिवीजन की संभावनाआें काे तलाशने के लिए बीएसएनएल प्रशासन ने दाे मान्यता प्राप्त यूनियन से आठ सदस्याें के नाम मांगें हैं, जाे पे रिवीजन पर अपने विचार प्रशासन के समक्ष रखेंगे. इसमें पांच सदस्य बीएसएनएल इयू आैर दाे सदस्य एनएफटीइ से शामिल हाेंगे. दूरसंचार मंत्रालय ने पहले ही साफ कर दिया है कि तीसरे पे रिवीजन काे तभी माना जायेगा, जब उसे डीआेटी का अप्रूवल हाेगा. एनएफटीइ के पूर्व राष्ट्रीय सचिव केके सिंह ने बताया कि पे रिवीजन नहीं हाेने के कारण कर्मचारियाें काे हर महीने काफी नुकसान हाे रहा है.
उन्होंने कहा कि बीएसएनएल काे जबरन नुकसान में दिखाकर कर्मचारियाें काे पे रिवीजन-बाेनस से वंचित रखने की साजिश रची जा रही है. दूरसंचार मंत्रालय ने पे रिवीजन की संभावनाआें काे तलाशने, कमेटी बनाने, वार्ता करने की प्रक्रिया काे जारी रखने काे कहा है. पे रिवीजन काे लेकर यूनियन ने संयुक्त रूप से धरना-प्रदर्शन आैर हड़ताल का भी सहारा लिया था, लेकिन अभी तक इस दिशा में सकरात्मक परिणाम सामने नहीं आये हैं. बीएसएनएल से अलग कर टावर कंपनी बनाने का भी यूनियन ने विराेध किया था, लेकिन सरकार अपने फैसले में किसी तरह का काेई बदलाव नहीं किया.
