टैक्स चाेरी के 150 मामलों की जांच कर रही डीजीजीआइ

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जमशेदपुर : शेल कंपनियाें के जरिये आइटीसी टैक्स चाेरी के 150 से अधिक मामलाें की जांच का जिम्मा डीजीजीआइ (डायरेक्टाेरेट जेनरल अॉफ गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस) काे मिला है. डीजीजीआइ-जीएसटी सेंट्रल एक्साइज की इंटेलिजेंस की टीम है, जाे झारखंड में कुछ खास मामलाें की जांच कर रही है. पिछले दिनाें रांची में आयकर, वाणिज्य […]

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जमशेदपुर : शेल कंपनियाें के जरिये आइटीसी टैक्स चाेरी के 150 से अधिक मामलाें की जांच का जिम्मा डीजीजीआइ (डायरेक्टाेरेट जेनरल अॉफ गुड्स एंड सर्विस टैक्स इंटेलिजेंस) काे मिला है. डीजीजीआइ-जीएसटी सेंट्रल एक्साइज की इंटेलिजेंस की टीम है, जाे झारखंड में कुछ खास मामलाें की जांच कर रही है. पिछले दिनाें रांची में आयकर, वाणिज्य कर, जीएसटी सीएक्स आैर डीजीजीआइ अधिकारियाें की बैठक में टैक्स चाेरी की जानकारियाें काे साझा किया गया. आइटीसी के क्लेम वाली सूची में कुछ बड़ी कंपनियां भी है, उनकी जांच का जिम्मा डीजीजीआइ को दिया गया है. डीजीजीआइ के अधिकारी की माने तो बड़े स्तर पर गड़बड़ियां पकड़ में आयी हैं. इनका भाैतिक सत्यापन किया जा रहा है, जल्द परिणाम सामने हाेंगे.
टैक्स चोरी में जुर्माना व जेल दोनों का प्रावधान : डीजीजीआइ अधिकारी के अनुसार जो मामले पकड़े गये है उनमें बिना इनवॉयस की सप्लाई, गलत इनवॉयस, टैक्स लेकर 3 माह में जमा नहीं करना, गलत तरीके से टैक्स क्रेडिट या रिफंड लेना, खातों में हेरा-फेरी, टर्नओवर कम बताना, रिटर्न से जुड़ी जानकारी समय पर नहीं देना शामिल है. इन पर कम से कम 10,000 रुपये आैर अपराध में मदद करने वालों पर 25,000 रुपये तक जुर्माना हाे सकता है. अधिकारी ने बताया कि टैक्स चोरी, गलत टैक्स क्रेडिट या गलत रिफंड की रकम 5 करोड़ से ज्यादा है तो 5 साल तक की जेल और जुर्माना दोनों हो सकता है.
यह रकम 2 से 5 करोड़ रुपये के बीच है तो 3 साल जेल और जुर्माना होगा. रकम एक-दाे करोड़ के बीच है तो 1 साल जेल और जुर्माना होगा. दूसरी या उससे अधिक बार गलती पकड़े जाने पर 5 साल तक जेल और जुर्माना का प्रावधान है. गलती कंपनी की है तो कंपनी के साथ उसके प्रमुख को भी दोषी माना जायेगा और सजा होगी. इनमें कंपनी के डायरेक्टर भी शामिल होंगे. ट्रस्ट के मामलों में मैनेजिंग ट्रस्टी और या एलएलपी के पार्टनर जिम्मेदार होंगे. इसके पहले वैट नियम में जेल की सजा का प्रावधान नहीं था.
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