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यदि ऑस्ट्रेलिया, जापान व अमेरिका में विकिरण है, तो जादूगोड़ा में कैसे नहीं

जमशेदपुर : ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सीनेटर व संसद में विपक्ष के उपनेता रह चुके स्कॉट लुडलाम ने भारतीय राजनीतिज्ञों को पर्यावरण और प्रदूषण पर परिपक्व नजरिया अपनाने की सलाह दी है. लुडलाम ने कहा कि पर्यावरण और प्रदूषण भी मुद्दा है, नेताओं को यह समझना होगा और मुद्दे बनाकर लोगों को इससे निजात भी दिलानी […]

जमशेदपुर : ऑस्ट्रेलिया के पूर्व सीनेटर व संसद में विपक्ष के उपनेता रह चुके स्कॉट लुडलाम ने भारतीय राजनीतिज्ञों को पर्यावरण और प्रदूषण पर परिपक्व नजरिया अपनाने की सलाह दी है. लुडलाम ने कहा कि पर्यावरण और प्रदूषण भी मुद्दा है, नेताओं को यह समझना होगा और मुद्दे बनाकर लोगों को इससे निजात भी दिलानी होगी. ऑस्ट्रेलियाई सीनेटर दो दिन के जादूगोड़ा दौरे के बाद शनिवार को बिष्टुपुर में प्रभात खबर से बातचीत कर रहे थे.

इस क्रम में उन्होंने जादूगोड़ा माइंस से लेकर भारत के राजनीतिक हालात पर भी चर्चा की. उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता श्रीप्रकाश भी थे.
जादूगोड़ा के विकिरण पर स्कॉट लुडलाम ने सवाल उठाते हुए कहा, ‘जहां कई टन यूरेनियम का स्टॉक है, उसके टेलिंग पौंड के बगल में एक हजार ग्रामीण बैठे हुए हैं और पिकनिक मना रहे हैं. यह उनके लिए घातक होता है या नहीं, इसका अंदाजा लगायें.’ जादूगोड़ा में लोगों से बातचीत का जिक्र करते हुए लुडलाम ने कहा,
‘यह बताया जा रहा है कि जादूगोड़ा में विकिरण नहीं है और इससे प्रदूषण नहीं होता है. विदेशी ताकतें सिर्फ देश को कमजोर करने के लिए यह बातें फैला रही हैं.’ स्कॉट ने सवाल किया कि अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया में इस तरह के खनन से विकिरण हो रहा है, लेकिन यहां विकिरण नहीं हो रहा है, क्या कोई नयी तकनीक है? उन्होंने कहा कि विकिरण के कारण महिलाओं की प्रजनन क्षमता खत्म हो रही है, बच्चे विकलांग हो रहे हैं.
पर्यावरण व प्रदूषण पर परिपक्व नजरिया अपनाएं भारत के राजनीतिज्ञ
विकिरण वाले इलाके से लोगों को पैसे देकर हटाना चाहिए
स्कॉट ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारत में प्रदूषण और पर्यावरण राजनीतिक मुद्दा नहीं बनते. केंद्र और राज्य सरकार को ऐसे विकिरण वाले इलाके में रहने वाले लोगों को पूरा पैसा देकर हटाना चाहिए. उनकी रोजी-रोटी से लेकर उनके पारंपरिक चीजों का ख्याल रखते हुए उन्हें शिफ्ट किया जाना चाहिए. ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि आने वाली पीढ़ी इस बलिदान के लिए पूर्वजों को नहीं कोसे. राजनीतिज्ञों को यह बताया जाना चाहिए कि प्रदूषण और पर्यावरण भी राजनीतिक मुद्दा बन सकता है, जो जाति, धर्म और पूजा पाठ से भी ऊपर है. प्रकृति व पर्यावरण बचेंगे तभी जीवन बचेगा.
ग्लाेबल वार्मिंग है मुख्य चिंता
स्कॉट लुडलाम ऑस्ट्रेलिया की संसद में जुलाई 2008 से जुलाई 2017 तक सीनेट सदस्य रह चुके हैं. ग्रींस पार्टी से वह पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया से सीनेट सदस्य बने और विपक्ष के उपनेता रहे. ग्रींस पार्टी देश को पर्यावरण के अनुकूल बनाने को राजनीतिक मुद्दा बनाकर चुनाव जीतती रही है. लुडलाम ने 2017 में न्यूजीलैंड व ऑस्ट्रेलिया की दोहरी नागरिकता में फंसने पर सीनेट पद छोड़ दिया था. वह पर्यावरण व प्रदूषण से जुड़े ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरी दुनिया का दौरा कर रहे हैं. वह लेबनान, फिलिस्तीन, न्यूजीलैंड, जापान के बाद भारत पहुंचे. यहां से बांग्लादेश व चीन जायेंगे.
Prabhat Khabar Digital Desk
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