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नक्सली कान्हू की भतीजी रानी ने पुरुलिया में किया सरेंडर

रानी मुंडा और हजारी हेंब्रम ने डाले हथियार दलमा क्षेत्र की आतंक थी रानी उर्फ पूजा, बंगाल व आेड़िशा में भी िकये वारदात एक थ्री नॉट थ्री राइफल तथा एक 12 बोर सिंगल बैरल बंदूक के साथ आत्मसमर्पण जमशेदपुर/चांडिल/आद्रा : सरायकेला-खरसावां जिले के दलमा वन क्षेत्र में आतंक का पर्याय रही हार्डकोर महिला नक्सली रानी […]

रानी मुंडा और हजारी हेंब्रम ने डाले हथियार

दलमा क्षेत्र की आतंक थी रानी उर्फ पूजा, बंगाल व आेड़िशा में भी िकये वारदात
एक थ्री नॉट थ्री राइफल तथा एक 12 बोर सिंगल बैरल बंदूक के साथ आत्मसमर्पण
जमशेदपुर/चांडिल/आद्रा : सरायकेला-खरसावां जिले के दलमा वन क्षेत्र में आतंक का पर्याय रही हार्डकोर महिला नक्सली रानी मुंडा ने अपने एक साथी हजारी हेंब्रम के साथ मंगलवार को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिला पुलिस मुख्यालय में हथियार के साथ समर्पण कर दिया. रानी मुंडा उर्फ पूजा (19) हाल ही में सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सली नेता कान्हु मुंडा की भतीजी है.
दलमा दस्ते की नक्सली रानी मुंडा उर्फ पूजा (22) तथा दलमा स्क्वायड के डिप्टी एरिया कमांडर व बंगाल, झारखंड, ओड़िशा बॉर्डर रीजनल कमेटी के मेंबर हजारी हेंब्रम उर्फ खेरवाल उर्फ विजय (27) ने सरेंडर किया है. दोनों ने पुरुलिया बेलगुमा पुलिस लाइन के प्रेक्षागृह में पुरुलिया पुलिस अधीक्षक जय विश्वास और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पारिजात विश्वास के समक्ष एक थ्री नॉट थ्री राइफल तथा एक 12 बोर सिंगल बैरल बंदूक के साथ आत्मसमर्पण किया.
रानी मुंडा पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा की निवासी है जबकि हजारी हेंब्रम पुरुलिया जिले (पश्चिम बंगाल) के बलरामपुर थाना क्षेत्र स्थित माहलीटांड़ का रहनेवाला है. दोनों बंगाल व झारखंड के साथ-साथ ओड़िशा में भी सक्रिय थे. बंगाल पुलिस के मुताबिक दोनों नक्सली सरायकेला जिला के चांडिल, दलमा जंगल, गुडाबांदा, घाटशिला
और मुसाबनी में कई नक्सली घटनाओं को अंजाम दे चुके हैं. दोनों पर लैंडमाइंस विस्फोट करने, पुलिस गाड़ी पर हमला करने एवं लेवी वसूलने जैसे आरोप हैं. रानी के खिलाफ झारखंड और बंगाल के विभिन्न थानों में पांच मामले दर्ज हैं.
दलमा दस्ते में थी कार्यरत: सरेंडर नक्सली रानी मुंडा उर्फ पूजा (19) हाल ही में सरेंडर करने वाले प्रमुख नक्सली नेता कान्हु मुंडा की भतीजी है. उसका घर गुड़ाबांदा थाना क्षेत्र के जियान टोला के हड़ियान में है. रानी 2015 में सीपीआइ माओवादी में शामिल हुई थी. वह पहले गुड़ाबांदा दस्ते में रही, फिर दामपाड़ा और वर्तमान में दलमा दस्ते में कार्यरत थी.
पहले गिरफ्तार हो चुका है हजारी: नक्सली हजारी हेंब्रम 2005 से 2010 तक अयोध्या दस्ते में रहा. पुलिस ने बताया कि जुलाई 2010 में उसे पुरुलिया के उरमा गांव के पास गिरफ्तार किया गया था. वह 11 माह जेल में था. जमानत पर छुटने के बाद वह 2012 में दलमा और गुड़ाबांदा स्क्वायड में चला गया. उसके खिलाफ झारखंड और बंगाल के विभिन्न थानों में 16 मामले दर्ज हैं.
पुरुलिया पुलिस अधिक्षक जय विश्वास ने बताया कि रानी मुंडा 2015 में पूर्वी सिंहभूम के गुड़ाबांदा से नक्सली दस्ता में शामिल हुई थी और दलमा क्षेत्र की हार्डकोर नक्सली बन गयी थी, जबकि हजारी हेंब्रम ने 2006 में अयोध्या एस्कॉर्ट सदस्य के रूप में गतिविधियां शुरू की थीं. विश्वास ने बताया कि दोनों ने राज्य सरकार की माओवादी पुनर्वास परियोजना से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया है और उन्हें सरकार की ओर से घोषित सभी प्रकार की सहायता प्रदान की जायेगी.
Prabhat Khabar Digital Desk
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