टेल्को यूनियन : 11 दिसंबर 2016 को तोते खेमा ने की थी आमसभा, 16 फरवरी से शुरू हुई थी जांच, 96 दिन बाद आया श्रमायुक्त का फैसला

Published at :14 Jun 2017 8:34 AM (IST)
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टेल्को यूनियन : 11 दिसंबर 2016 को तोते खेमा ने की थी आमसभा, 16  फरवरी से शुरू हुई थी जांच, 96 दिन बाद आया श्रमायुक्त का फैसला

जमशेदपुर : टेल्को वर्कर्स यूनियन विवाद में श्रमायुक्त का फैसला 96 दिन बाद आया. 11 दिसंबर 2016 को आमसभा करने के बाद नयी कार्यकारिणी को मान्यता देने के लिए श्रमायुक्त सह ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार के पास तोते खेमा ने जनवरी 2017 को आवेदन दिया था. आवेदन पर श्रमायुक्त के आदेश से डीएलसी ने 15 फरवरी […]

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जमशेदपुर : टेल्को वर्कर्स यूनियन विवाद में श्रमायुक्त का फैसला 96 दिन बाद आया. 11 दिसंबर 2016 को आमसभा करने के बाद नयी कार्यकारिणी को मान्यता देने के लिए श्रमायुक्त सह ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार के पास तोते खेमा ने जनवरी 2017 को आवेदन दिया था. आवेदन पर श्रमायुक्त के आदेश से डीएलसी ने 15 फरवरी से मामले की जांच शुरू की. जांच के उपरांत डीएलसी राकेश प्रसाद ने 8 मार्च को अपनी जांच रिपोर्ट श्रमायुक्त सह ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रार को सौंप दिया. लंबे इंतजार के बाद श्रमायुक्त ने मंगलवार को तोते खेमा के पास में फैसला सुनाया.
दावे के साथ दोनों खेमा ने सौंपा था अपना पक्ष : डीएलसी के समक्ष जांच के दौरान दोनों खेमा ने अपना-अपना पक्ष साक्ष्य के साथ एक दूसरे की कमेटी मीटिंग, आमसभा को अवैध करार देने के लिए कई दस्तावेज साक्ष्य के तौर पर सौंपे थे. तोते खेमा ने अध्यक्ष, महामंत्री को हटाने के लिए 3885 सदस्यों में से 2515 कर्मचारियों के हस्ताक्षर, कमेटी मीटिंग, आमसभा के कागजात, फोटोग्राफ, अखबारों में छपी खबरें और वीडियोग्राफी सौंपी. साथ ही महामंत्री की कथित आमसभा में मौजूद 101 कर्मचारियों की सूची सौंपा. जो आमसभा के दिन बी शिफ्ट ड्यूटी में मौजूद थे.

जबकि महामंत्री खेमा ने तोते खेमा के फरजी हस्ताक्षर का लिस्ट, एक्सल सीट में सौंपने के अलावा 169 पेज का दस्तावेज, आमसभा में मौजूद 467 कर्मियों का हस्ताक्षर सौंपा था.एकाउंट को लेकर शुरू हुआ था विवाद थमा नहीं. टेल्को यूनियन के इतिहास में पहली बार हाइकोर्ट के आदेश और डीसी-एसपी की देखरेख में 18 अगस्त 2015 को चुनी गयी यूनियन में एकाउंट को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं लिया. यूनियन की नयी टीम कर्मचारियों का भरोसा जीतने में सफल रही, लेकिन सत्ता में आते ही आपसी विवादों में उलझ गयी.


यूनियन का पहला साल ही उथल-पुथल में गुजरा. यूनियन में गुटबाजी, यूनियन कार्यालय परिसर में मारपीट, थाने में प्राथमिकी, एसपी-डीसी से शिकायत, यूनियन ऑफिस के तीन कर्मचारियों का वेतन नहीं मिलने, सेमिनार का बहिष्कार, बिना सेमिनार किये चार्टर ऑफ डिमांड सौंपना, पिंक पास की बाध्यता, यूनियन अध्यक्ष सहित कमेटी मेंबरों के वेतन में कटौती, जैसी घटनाएं देखने को मिली. तीन बार प्लांट के एसेंबली लाइन बंद कराये गये. मान्यता प्राप्त यूनियन के नेताओं ने कंपनी के मुख्य गेट और कंपनी के अंदर मृतक आश्रित कर्मचारी के परिजनों को मुआवजा देने की मांग को लेकर प्रदर्शन हुए. चंद्रभान खेमा के अकेले ऑफिस बियरर चुने गये थे तोते : चंद्रभान सिंह खेमे से पदाधिकारियों के चुनाव में गुरमीत सिंह अकेले नेता थे. जो कार्यकारी अध्यक्ष पद पर चुनाव जीते थे. तोते के खिलाफ शांतनु पुष्टी कार्यकारी अध्यक्ष पर खड़े थे. तोते को 49 और जबकि शांतनु को 48 मत मिला था. जबकि एक मत रद्द हो गया था. बाद में तोते ने चंद्रभान खेमा से नाता तोड़ लिया. आज उनके साथ 6 को छोड़ सभी ऑफिस बियरर साथ हैं.
आम सभा में पारित किये गये थे चार प्रस्ताव
तोते खेमा ने 11 दिसंबर 2016 को आमसभा कर अध्यक्ष अमलेश कुमार, महामंत्री प्रकाश कुमार को पदमुक्त करने एवं असंवैधानिक तरीके से हटाये गये कार्यकारी अध्यक्ष गुरमीत सिंह तोते का निलंबन वापस लेने. अध्यक्ष, महामंत्री के तौर पर किसी भी बैठक और वकालतनामा में यूनियन प्रतिनिधि के तौर पर हस्ताक्षर या शामिल नहीं होने. अध्यक्ष अमलेश कुमार, महामंत्री प्रकाश कुमार को यूनियन की प्राथमिक सदस्यता से तीन साल के लिए निष्कासित करने और रिक्त पद पर नेता चुनने, पदमुक्त करने एवं कार्यकारिणी सदस्यों का नाम फॉर्म बी रजिस्टर, श्रमायुक्त सह निबंधक श्रमिक संघ के पास आवदेन देने के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन करने का निर्णय लिया था.
पहले भी रद्द हो चुकी है यूनियन नेताओं की सदस्यता
टेल्को वर्कर्स यूनियन में पहले भी यूनियन नेताओं की सदस्यता रद्द हो चुकी है. अगस्त 2014 में पूर्व महामंत्री चंद्रभान प्रसाद ने आमसभा कर अरुण सिंह, हर्षवर्द्धन सिंह, पंकज सिंह, जेपीएन सिंह और रणधीर सिंह की सदस्यता रद्द कर दी गयी थी. आज तक पांचों नेता यूनियन की सदस्यता लेने के लिए संघर्ष कर रहे है,लेकिन उन्हें सदस्यता नहीं मिली है. यह पहली बार हुआ है कि किसी अध्यक्ष, महामंत्री की सदस्यता रद्द हुई.
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