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पौराणिक ग्रंथों से शिक्षा के बिंदु को निकालकर पाठ्यक्रम में शामिल करने से लाभ

Updated at : 05 Sep 2024 6:30 PM (IST)
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पौराणिक ग्रंथों से शिक्षा के बिंदु को निकालकर पाठ्यक्रम में शामिल करने से लाभ

विभावि शिक्षा शास्त्र विभाग ने शिक्षक दिवस पर गुरुवार को संगोष्ठी का आयोजन बहुउद्देश्यीय भवन में किया.

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शिक्षा शास्त्र विभाग के संगोष्ठी में 40 शोध पत्र आए

हजारीबाग.

विभावि शिक्षा शास्त्र विभाग ने शिक्षक दिवस पर गुरुवार को संगोष्ठी का आयोजन बहुउद्देश्यीय भवन में किया. विषय भारतीय ज्ञान परंपरा और अध्यापक शिक्षा पाठ्यक्रम था. अध्यक्षता डॉ तनवीर यूनुस ने की. विद्यार्थियों ने 40 शोध पत्र जमा किए. इसमें 10 शोध पत्र संगोष्ठी में पढ़ा गया. मुख्य अतिथि डॉ केके गुप्ता ने कहा कि भारत में पुराने समय में विज्ञान व विभिन्न कला का विकास हुआ है जो अभी भी पौराणिक ग्रंथों में मिलता है. विषय विशेषज्ञ डॉ मृत्युंजय प्रसाद ने कहा कि पौराणिक काल में विज्ञान व कला में जो भी विकास हुआ है उसे वर्तमान समय में पढ़ाई के लायक कैसे बनाया जाय. इसपर देशभर में चिंतन चल रहा है. विषय विशेषज्ञ डॉ तनवीर यूनुस ने कहा कि पुराने समय में विज्ञान व कला के क्षेत्र में जो भी विकास हुआ है इसे आज के शिक्षा से जोड़ने के लिए पौराणिक ग्रंथों से शिक्षा के बिंदु को निकालकर पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सकता है. इसका लाभ वर्तमान शिक्षा प्रणाली को मिलेगा. विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉ अमिता, डॉ विनीता बंकिरा, डॉ रजनीश कुमार, डॉ चौधरी प्रेम प्रकाश, डॉ कुमारी भारती ने भी संगोष्ठी के विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किये. धन्यवाद ज्ञापन डॉ अमिता ने किया. मौके पर शिक्षा शास्त्र विभाग के शिक्षक व विद्यार्थी उपस्थित थे.

टेंट हाउस से आयी कुर्सी और साउंड सिस्टम :

विभावि प्रशासन ने विभावि का विवेकानंद सभागार शिक्षा शास्त्र विभाग को उपलब्ध नहीं कराया. नतीजन शिक्षा शास्त्र विभाग के विद्यार्थियों ने सहयोग राशि जमा कर टेंट हाउस से 400 कुर्सी और साउंड सिस्टम मंगवाकर बहुउद्देश्यीय भवन में संगोष्ठी करवायी. जबकि विवेकानंद सभागार में पांच सितंबर को कोई कार्यक्रम का आयोजन नहीं था.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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