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पंकरी बरवाडीह में भगवान बुद्ध की सैकड़ों मूर्तियां खुले आसमान के नीचे पड़ी, सुध लेने वाला कोई नहीं

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : पंकरी बरवाडीह के भोक्ता स्थान पर भगवान बुद्ध की सैकड़ों मूर्तियां बिखरी मिली.
Jharkhand news : पंकरी बरवाडीह के भोक्ता स्थान पर भगवान बुद्ध की सैकड़ों मूर्तियां बिखरी मिली.
प्रभात खबर.

Jharkhand news, Hazaribagh news : बड़कागांव (संजय सागर) : हजारीबाग जिले के बड़कागांव प्रखंड स्थित पंकरी बरवाडीह के भोक्ता स्थान में भगवान बुद्ध की सैकड़ों मूर्तियां बिखरी पड़ी है, जो खुले आसमान के नीचे असुरक्षित है. अगर इन मूर्तियों को सुरक्षित नहीं किया गया, तो कभी भी चोरी हो सकती है. यह मूर्तियां पंकरी बरवाडीह की पांच पांडवा पहाड़ में है. ग्रामीणों ने बिखरे पड़े भगवान बुद्ध की मूर्तियों को संग्रह कर इसे पांच पांडवा भगवान के नाम से पूजा अर्चना करते हैं.

110 संग्रह किये गये पत्थरों में से 70 पत्थरों में भगवान बुद्ध की 500 मूर्तियां है. भगवान बुद्ध की मूर्तियां तपस्या करते हुए और बैठे हुए मुद्रा में है. मूर्तियों के साथ कई स्तंभ भी है. पहाड़ी के अगल- बगल के खेतों में आज भी बिखरे पड़े हैं कई मूर्तियां, जिन्हें चुन कर लोग पूजा स्थल के आसपास रख दिया करते हैं. पांच पांडवा पहाड़ को देखने से ऐसा लगता है कि यह बौद्ध काल में बुद्ध स्तूप रहा होगा. जो वर्षा एवं वायु अपरदन (Erosion) के कारण स्तूप धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है. अगर पुरातत्व विभाग की ओर से इस स्थल को तरीके से खोज एवं खुदाई की जायेगी, तो बौद्ध धर्म से संबंधित कई जानकारियां मिल सकती है.

वहीं, बड़कागांव से 27 किलोमीटर दूर हजारीबाग के बहोरनपुर में पुरातात्विक विभाग की ओर से खुदाई की गयी, तो वहां सैकड़ों भगवान बुद्ध की मूर्तियां निकले. इससे जाहिर होता है कि बौद्ध काल में इस क्षेत्र में बौद्ध धर्म के अनुयाई रहते होंगे. बड़कागांव हजारीबाग बौद्धिष्टों का उपासना स्थल रहा होगा.

Jharkhand news : पांच पांडवा पहाड़ में भगवान बुद्ध के खुले में मिले अवशेष.
Jharkhand news : पांच पांडवा पहाड़ में भगवान बुद्ध के खुले में मिले अवशेष.
प्रभात खबर.

वैसे भी सत्य, अहिंसा, करुणा एवं शांति के प्रवर्तक और बौद्ध धर्म के संस्थापक महात्मा बुद्ध का झारखंड से विशिष्ट लगाव रहा है. शायद यही कारण है कि बौद्ध काल में झारखंड क्षेत्र में भारी संख्या में बौद्ध धर्म के अनुयायी रहे हैं. इसीलिए आज भी गौतम बुद्ध की मूर्तियां एवं उनसे संबंधित अवशेष झारखंड के कोने-कोने में मौजूद है.

हजारीबाग जिले के कन्हेरी पहाड़ के आसपास गौतम बुद्ध की मूर्तियां मिली है. बड़कागांव के पांच पांडवा पहाड़ राजगीर के बौद्ध स्तूप की तरह है, लेकिन यह स्तूप छोटा है. इतना ही नहीं, बड़कागांव मध्य पंचायत के पंडित मोहल्ला स्थित शिव मंदिर में एक प्रतिमा है, जो भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा जैसी दिखती है. हालांकि, लोग इसे भगवान भोलेनाथ की प्रतिमा मानकर पूजा-अर्चना करते हैं.

जुलाई, 2003 में बारिश नहीं होने के कारण बरवाडीह के ग्रामीण पांच पंडवा पहाड़ पर गौतम बुद्ध की मूर्तियों को पांडवों की मूर्ति समझ कर पूजा-अर्चना कर रहे थे. इस दौरान किसान बारिश होने की कामना कर रहे थे. पत्रकारों को कवरेज के लिए बुलाया गया. प्रभात खबर के प्रतिनिधि संजय सागर ने ग्रामीणों को बताया कि ये पांच पांडव नहीं, बल्कि भगवान गौतम बुद्ध की प्रतिमा है. तब से लोग भगवान बुद्ध की पूजा कर रहे हैं.

बड़कागांव पूर्वी पंचायत के मुखिया कैलाश राणा समेत ग्रामीण बालेश्वर साव एवं कैलाश साव का कहना है कि यहां भगवान बुद्ध की मूर्तियां एवं बौद्ध स्तूप है. इन्हें संरक्षित करने की जरूरत है. वहीं, ग्रामीण सरोज कुमार का कहना है कि यहां एनटीपीसी के द्वारा कोयला खदान खोलने की तैयारी चल रही है. इसलिए इस स्थल को बचाया जाये.

इटखोरी में भगवान बुद्ध ने की थी तपस्या

पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध ने देह त्याग किया था. इसी दिन उनका जन्म भी हुआ था. इसी तिथि को उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई थी. देश-दुनिया में उनके 50 करोड़ से ज्यादा अनुयायी हैं, जिनके लिए इस तिथि का विशेष महत्व है. सिद्धार्थ तब बुद्ध नहीं बने थे. पुत्र-पत्‍नी का त्याग कर सत्य की खोज में निकले, तो चतरा के इटखोरी में ऐसा ध्यान लगाया कि वे खो गये. उनकी मौसी गौतमी उन्हें लेने आयी, लेकिन सिद्धार्थ पर कोई असर नहीं पड़ा. गौतमी के मुख से अनायास ही निकल पड़ा : इत्तखोई. यानी यहीं खो गया. तब से चतरा के इस अंचल का नाम ही इटखोरी पड़ गया. यहां बुद्ध से जुड़े कई अवशेष मिले हैं. कई स्तूप भी हाल के दिनों में मिले हैं. 4 साल पहले पलामू में भी 2 स्तूप मिले.

गोड्डा में भी बिखरी है बुद्ध की प्रतिमा

गोड्डा जिले के बेलनीगढ़ में भी बुद्ध से जुड़ी स्मृतियां हैं. वहां के अवशेष इस बात की गवाही देते हैं. गोड्डा के पूरे महगामा प्रखंड में प्रतिमाओं के अवशेष बिखरे पड़े हैं. यहां के लोग बेलनीगढ़ को भिक्षुणीगृह भी कहते हैं.

देवघर में अशोक का स्तूप

देवघर का करौं ग्राम अशोक के काल का माना जाता है. इसे अशोक के पुत्र राजा महेंद्र ने बसाया था. यहां अशोक का स्तूप भी मौजूद है. खुदाई नहीं हुई है, लेकिन बौद्ध अनुयायियों का कहना है कि यहां खुदाई हो, तो कई बौद्धकालीन विहार मिल सकते हैं. इसी तरह, रांची के पास गौतमधारा है. कहीं न कहीं यह स्थल भी उनकी स्मृति से जुड़ा हुआ है. इस ओर अब तक न तो पुरातत्व विभाग ने ध्यान दिया है और न ही सरकार ने. हां, इटखोरी में सरकार ने प्रयास शुरू किये हैं, जहां काफी अवशेष मिले हैं.

पलामू में मिले दो स्तूप

पलामू में भी भारत सरकार के पुरातत्व विभाग को दो स्तूप मिले हैं. इसके बाद कोई काम नहीं हुआ. जानकार बताते हैं कि इन स्थलों को सजाया-संवारा जाये और बुद्ध सर्किट से जोड़ दिया जाये, तो पर्यटन की संभावनाएं काफभ् प्रबल हो जायेंगी. राज्य सरकार ने इटखोरी में पहल की है, लेकिन अन्य जगहों को भी इससे जोड़ने की जरूरत है.

Posted By : Samir Ranjan.

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