मूलभूत सुविधाओं से वंचित है चिरूबेड़ा गांव

Updated at : 04 Mar 2025 7:45 PM (IST)
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मूलभूत सुविधाओं से वंचित है चिरूबेड़ा गांव

चुरचू प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव चिरूबेड़ा में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम

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चुरचू प्रखंड के सुदूरवर्ती गांव चिरूबेड़ा में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम आनंद सोरेन चरही. चुरचू प्रखंड की चुरचू पंचायत के सुदूरवर्ती गांव चिरूबेड़ा में प्रभात खबर आपके द्वार कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इसमें गांव के लोगों ने खुल कर अपनी बातें रखी. बताया कि आदिवासी बहुल गांव चिरूबेड़ा आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. गांव में सड़क, बिजली, शौचालय व अन्य सुविधाओं का अभाव है. आजादी के बाद से आज तक चिरूबेड़ा गांव में बिजली नहीं जली. गांव में लगभग 30 घरों में 150 लोग रहते हैं, जो संताल आदिवासी हैं. सोधन टुडू ने कहा कि गांव में आवागमन के लिए सड़क नहीं है. कच्ची सड़क से आना-जाना होता है. बरसात के दिनों में कच्ची सड़क से आवागमन में काफी परेशानी होती है. बरसात के दिनों में दो पहिया व चार पहिया तो दूर, पैदल चलना भी मुश्किल है. मानवेल हांसदा ने कहा कि 2012 में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना के तहत चिरूबेड़ा गांव में बिजली तार लगाया गया था, लेकिन एक दिन भी नहीं जली. चोरों ने बिजली के तार को काट कर उठा ले गये. आज भी गांव में लालटेन की रोशनी में रात बिताने को विवश हैं. हीरामुनी देवी ने कहा कि हमें आज तक वृद्धावस्था पेंशन नहीं मिली. कई बार कार्यालय गयी, पंचायत सेवक से गुहार लगायी, लेकिन आज तक वृद्धावस्था पेंशन की सुविधा नहीं मिली. जागो मांझी ने कहा कि एक ओर प्रशासन ने चुरचू पंचायत को खुले में शौच से मुक्त पंचायत बनाया है, जबकि चिरूबेड़ा गांव में एक भी शौचालय नहीं है. आज भी गांव के लोग खुले में शौच जाते हैं. शानू हंसदा ने कहा कि चिरूबेड़ा में पीने के पानी से जुड़ी समस्या है. गांव में एक चापानल व एक कुआं है, लेकिन गर्मी के दिनों में कुआं का पानी सूख जाता है. भीषण गर्मी में चापानल भी हांफने लगता है. मशक्कत के बाद थोड़ा बहुत पानी निकलता है. दशय हंसदा ने कहा कि चिरूबेड़ा गांव में सिंचाई की कोई व्यवस्था नहीं है. गांव के सभी परिवार खेती पर आश्रित हैं, पानी के अभाव के कारण मौसमी खेती ही कर पाते हैं. कांतिलाल हंसदा ने कहा कि चिरूबेड़ा गांव में रोजगार की कोई व्यवस्था नहीं है. रोजगार की तलाश में गांव के लोग बाहर पलायन कर रहे हैं. सिंचाई की सुविधा नहीं रहने के कारण गांव के लोग मजदूरी करते हैं. चिरूबेडा गांव के चांदमुनी, फुलमुनी सोरेन, प्रमिता मरांडी, सदमी देवी, महाबीर हांसदा, बिरालाल हंसदा, संतोष हंसदा, बाबूलाल हंसदा, बिरजा हांसदा, प्रदीप हेंब्रोम, सोनू मांझी, सुखलाल मांझी, सुरजन टुडु, रतिलाल मांझी सहित अन्य लोगों ने अपनी बाते रखीं.

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