मछली पालन हो सकता है बेहतर व्यवसाय : बनर्जी

Updated at :09 Dec 2015 7:02 PM
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मछली पालन हो सकता है बेहतर व्यवसाय : बनर्जी

मछली पालन हो सकता है बेहतर व्यवसाय : बनर्जीतीन दिवसीय मछली पालन प्रशिक्षण शुरू 9कोडपी3उद्घाटन के मौके पर डीवीसी के मुख्य अभियंता एके बनर्जी व अन्य.9कोडपी4कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य अभियंता एके बनर्जी.9कोडपी5उपस्थित प्रशिक्षु.प्रतिनिधि, जयनगर डीवीसी भूमि संरक्षण विभाग जलीय संसाधन मैथन व एसआईइपी बांझेडीह की ओर से प्लांट के निकट स्थित एडमिन बिल्डिंग में […]

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मछली पालन हो सकता है बेहतर व्यवसाय : बनर्जीतीन दिवसीय मछली पालन प्रशिक्षण शुरू 9कोडपी3उद्घाटन के मौके पर डीवीसी के मुख्य अभियंता एके बनर्जी व अन्य.9कोडपी4कार्यक्रम को संबोधित करते मुख्य अभियंता एके बनर्जी.9कोडपी5उपस्थित प्रशिक्षु.प्रतिनिधि, जयनगर डीवीसी भूमि संरक्षण विभाग जलीय संसाधन मैथन व एसआईइपी बांझेडीह की ओर से प्लांट के निकट स्थित एडमिन बिल्डिंग में तीन दिवसीय मछली पालन प्रशिक्षण शुरू किया गया़ बुधवार को डीवीसी के मुख्य अभियंता एके बनर्जी ने इसका उदघाटन किया़ श्री बनर्जी ने कहा कि मछली पालन बेहतर व्यवसाय बन सकता है. ग्रामीण मछली पालन कर खुद को समृद्ध बनायें. उन्होंने लोगों से प्रशिक्षण लेकर इसका लाभ उठाने को कहा़ उन्होंने कहा कि एसआइपी विस्थापित गांवों के विकास में अहम भूमिका निभा रही है. मैथन जलीय संसाधन के कार्यपालक अभियंता डाॅ एनसी साहा ने कहा कि वर्ष 2015-16 में डीवीसी द्वारा 481 लाख मछली का जीरा (बीज) तैयार किया गया. 200 लोगों को मछली पालन का प्रशिक्षण दिया गया है. वहीं 48 लाख मछली पालन किया है. डीवीसी द्वारा मछली पालन में 6.6 करोड़ खर्च किये गये हैं तथा वर्ष 2007 से 2015 तक 2829 लोगों को इसका प्रशिक्षण दिया गया है. मौके पर मत्स्य पदाधिकारी दीपांकर सीट, एसआइपी के सीनियर मैनेजर हरिश चंद्र सिंह, डिप्टी मैनेजर राजू प्रसाद, एसआइपी की परियोजना पदाधिकारी कांता सोरेन, डीवीसी के विश्व मोहन गोस्वामी, एसके धारा, पीके सहाय, अरुण घोष, राजेश पांडेय, विशेष सहायक बोधी पंडित, उपेंद्र कुमार, अर्जुन चौधरी, रामदेव यादव, दिनेश यादव, सुभाष यादव, अनवर अंसारी, जैनुल अंसारी, हदिश अंसारी, सदीक अंसारी, मही उद्वीन, साहिद अंसारी, सोहेल आदि थे़ कैसे करें मछली पालनप्रशिक्षकों ने विभिन्न प्रजाति की मछली का पालने करने व तालाबों को शुद्ध रखने की जानकारी दी़ कतला, रेहू, मृगल व तीन विदेश प्रजाति सिल्वर, कार्प व गरास कार्प मछली तेजी से बढ़ती है. स्वदेशी में कतला सबसे तेजी से बढ़ती है इसकी वार्षिक औसत वृद्धि 10-15 किलोग्राम है. रेहू मछली एक वर्ष में 800 से 1000 ग्राम तक हो जाती है. सिल्वर कार्प एक वर्ष में 500 से 800 ग्राम तक बढ़ती है, जबकि ग्रास कार्प एक वर्ष में 2 किलोग्राम से अधिक वजन की हो जाती है. कैसे करें तालाब की सफाईकार्बनिक तत्वों के विघटन से होने वाले विपरीत घटना क्रम जैसे आॅक्सीजन की कमी को निष्क्रिय बनाने के लिए चूना का प्रयोग करें. तालाबों में घुलनशील आॅक्सीजन के आवश्यक असर को बनाये रखने के लिए तल छट तथा जल क्षेत्र को समय-समय पर हिंडोले, जहां संभव हो वहां तालाब के जल के कुछ अंश को बदल कर तथा समय-समय पर बड़े बड़े फंदे के जालों के संचालन से आॅक्सीजन के स्तर को बनाये रखें. तालाब के जल से अस्वाभिवक गंध निकलने के लिए पोटाशियम, परमैगनेट का प्रयोग करे.

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