झारखंड के बड़कागांव में SC का हाल, दिन भर कमाते हैं तब इनके घर जलता है चूल्‍हा

Published at :13 Apr 2018 9:27 PM (IST)
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झारखंड के बड़कागांव में SC का हाल, दिन भर कमाते हैं तब इनके घर जलता है चूल्‍हा

अधिकांश अनुसूचित जाति वर्ग के लोग ईट बनाने का काम एवं मजदूरी करते हैं कई लोगों के पास शौचालय बनाने के लिए जमीन नहीं संजय सागर @ बड़कागांव बड़कागांव मध्य पंचायत अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र है. यहां लगभग 8000 से अधिक जनसंख्या निवास करती हैं. लेकिन 2 फीसदी ही सरकारी नौकरी पर कार्यरत है. बड़कागांव […]

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अधिकांश अनुसूचित जाति वर्ग के लोग ईट बनाने का काम एवं मजदूरी करते हैं

कई लोगों के पास शौचालय बनाने के लिए जमीन नहीं

संजय सागर @ बड़कागांव

बड़कागांव मध्य पंचायत अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र है. यहां लगभग 8000 से अधिक जनसंख्या निवास करती हैं. लेकिन 2 फीसदी ही सरकारी नौकरी पर कार्यरत है. बड़कागांव में अनुसूचित जाति के अंतर्गत रविदास, भुइयां, तुरी, रजक एवं पासवान जाती के लोग रहते है. यहां के अधिकार अनुसूचित जाति वर्ग के लोग राजमिस्त्री, कूली एवं इट बनाने एवं जंगल से सूखी लकड़ी लाकर बेचने का काम करते हैं. तब इनके घरों में चूल्हे जलते हैं. इन वर्गों के विकास के नाम पर कुछ मुहल्लों में पीसीसी सड़क बनाये गये हैं.

कुछ लोगों को इंदिरा आवास एवं पीएम आवास मिला है. लेकिन अधिकांश परिवारों को इंदिरा आवास एवं पीएम आवास नहीं मिला है. यहां के अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों का कहना है कि जो बची-खुची जमीन थी, वह भी एनटीपीसी द्वारा ले ली गयी. पंकरी बरवाडीह एवं चिरुडीह बरवाडीह में कोलयरी खुला लेकिन इन्हें रोजगार नही मिला. रविदास जाति के लोग राजमिस्त्री एवं कूली, भुइंया जाति के लोग ईंट बनाकर एवं जंगल से सूखी लकड़ी लाकर, तुरी जाति के लोग बांस की टोकरी बनाकर, रजक एवं पासवान जाति के लोग मजदूरी करके जीवन यापन करते हैं.

जमीनी हकीकत

बड़कागांव मध्य पंचायत के टिलहा पर स्थित भुइयां टोली के फूलन देवी, जितनी देवी, रूबी देवी ने बताया कि वृद्धा पेंशन एवं पेयजल की समस्या को लेकर कई वर्षों से ब्लॉक का चक्कर काट रही हूं. फिर भी आज तक नहीं मिला. नाही हमें इंदिरा आवास और पीएम आवास नसीब हुआ. यमुना भुइंया, संता भुइंया, सुमित्रा देवी, जीतन भुइंया ने बताया कि 2 महीना से शौचालय निर्माण के लिए गड्ढा खोदकर ठेकेदार चला गया. लेकिन अभी तक शौचालय नहीं बना है.

इन लोगों का कहना है कि शौचालय हम लोग खुद से बनाना चाह रहे थे. लेकिन जबरन ठेकेदार द्वारा शौचालय बना दिया जा रहा है. क्योंकि हम लोग के नाम से शौचालय आया है, तो हम लोग स्वयं शौचालय अच्छा से बनाते. कार्तिक भुइंया, अक्कल भुइंया, सहोदरी देवी, फागुनी देवी ने बताया कि हमारा टोला नदी के किनारे बसा है. जो भारी बरसात में आने के कारण हमारा गांव बह सकता है. इसलिए नदी के किनारे गड़वाल बनाकर हमारे गांव टोला को बचाया जाए.

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