पांच साल से लिफ्ट है बेकार, अब बन चुकी है पिकदान और कूड़ेदान

Published at :20 Jul 2017 12:10 PM (IST)
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पांच साल से लिफ्ट है बेकार, अब बन चुकी है पिकदान और कूड़ेदान

हजारीबाग: सदर अस्पताल ओपीडी का लिफ्ट पिछले पांच साल से खराब है. ऐसी स्थिति में मरीज आये दिन परेशान रहते हैं. इसी भवन के प्रथम तल्ला में प्रसव केंद्र है. लिफ्ट खराब रहने से प्रसव पीड़ा के बाद भी महिलाओं को चल कर 22 सीढ़ी चढ़नी पड़ती है. महिलाओं के लिए वार्ड तक पहुंचना काफी […]

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हजारीबाग: सदर अस्पताल ओपीडी का लिफ्ट पिछले पांच साल से खराब है. ऐसी स्थिति में मरीज आये दिन परेशान रहते हैं. इसी भवन के प्रथम तल्ला में प्रसव केंद्र है. लिफ्ट खराब रहने से प्रसव पीड़ा के बाद भी महिलाओं को चल कर 22 सीढ़ी चढ़नी पड़ती है. महिलाओं के लिए वार्ड तक पहुंचना काफी मुश्किल से भरा काम होता है. कभी तो स्थिति यह हो जाती है कि चलने-फिरने में असमर्थ मरीजों को परिजन कंधे पर लाद कर सिढ़ी से चढ़ कर मुश्किल से पहुंचते हैं. पैदल आनेवाले मरीज रेलिंग पकड़ कर किसी तरह तीन तल्ले तक चढ़ते हैं. पिछले पांच साल से खराब लिफ्ट को बनवाने की दिशा में कभी पहल नहीं की गयी. लिफ्ट का उपयोग अस्पताल का कचरा फेंकने व पिकदान के रूप में ही सिर्फ हो रहा है.
आधुनिक संसाधनों से युक्त है नया भवन: हजारीबाग का सदर अस्पताल का तीन मंजिला भवन आधुनिक संसाधनों से युक्त है. मरीजों को वार्ड तक पहुंचने में परेशानी न हो, इसके लिए सीढ़ी के साथ लिफ्ट की भी व्यवस्था की गयी है. अस्पताल भवन 2011-12 में सदर अस्पताल को हेंडओवर किया गया. भवन के प्रथम तल्ला में प्रसव केंद्र, दूसरे तल्ले में स्त्री मेडिकल वार्ड और तीसरे तल्ले में बच्चों के इलाज की व्यवस्था की गयी है. इसके अलावा शल्य चिकित्सा के लिए भी वार्ड की व्यवस्था है.
तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री से की गयी थी शिकायत: सदर अस्पताल में खराब लिफ्ट होने की शिकायत 2013-14 में तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह से भी की गयी थी. उस समय श्री सिंह मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास के लिए हजारीबाग पहुंचे हुए थे. उस समय अस्पताल प्रबंधन ने बताया था कि बिजली के अभाव में चालू नहीं हो पाया है. मंत्री ने बिजली विभाग को लिफ्ट के लिए अलग ट्रांसफारमर की व्यवस्था करने को कहा था, इसके बावजूद स्थिति यथावत है.
15 दिनों में ठीक हो लिफ्ट: डीसी
डीसी रविशंकर शुक्ला ने सिविल सर्जन विजय शंकर दास को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के अंदर लिफ्ट को अगर संवेदक ठीक नहीं करता है, तो कानूनी तौर पर उस पर कार्रवाई शुरू हो.
क्या कहते हैं मरीज
टंडवा की उषा देवी सदर अस्पताल प्रसव कराने के लिए अस्पताल पहुंची थी. उसने कहा कि अस्पताल में लिफ्ट लगा होता तो मरीजों को काफी सुविधा होती. इसी तरह जगदीशपुर की गुड़िया देवी ने कहा कि अस्पताल में लिफ्ट रहने से उन्हें परेशानी नहीं होती. मरीज मोहन कुमार ने कहा कि गंभीर रूप से बीमार होने पर लोगों को कंधे पर तीन तल्ले तक ले जाना पड़ता है.
अस्पताल में शुरू से ही लिफ्ट काम नहीं कर रहा है. कई बार इसकी शिकायत विभाग से की गयी. लेकिन इसमें कोई सुधार नहीं हुआ.
विजय शंकर दास, सिविल सर्जन
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