40 सालों से नहीं बिकती हड़िया-दारू, फुटबॉल बना युवाओं की पहचान

Updated at : 22 May 2025 10:46 PM (IST)
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40 सालों से नहीं बिकती हड़िया-दारू, फुटबॉल बना युवाओं की पहचान

गम्हरिया गांव की कहानी. ग्राम विकास समिति की सक्रिय भूमिका, पंचायत में ही सुलझते हैं विवाद

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गुमला. गुमला से 10 किमी दूर गम्हरिया गांव में 40 सालों से एक कानून लागू है. इस गांव में कोई हड़िया व दारू नहीं बेचता है. क्योंकि ग्रामीणों ने इस पर रोक लगा रखी है. इतना ही नहीं गांव के विकास के लिए ग्राम विकास समिति का गठन किया गया है. वहीं गांव के बच्चे व युवा मुख्यधारा से न भटके, इसके लिए 30 सालों से गांव में फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है. प्रतियोगिता में दूसरे गांव के युवाओं को भी शामिल किया जाता है. गम्हरिया आदिवासी बहुल गांव है, जिसकी आबादी करीब डेढ़ हजार है. इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि गांव के विकास को लेकर हर माह बैठक की जाती है. बैठक में विकास पर चर्चा समेत छोटे-मोटे विवादों को भी सलटाया जाता है. अगर जब कोई बड़ा मामला होता है, तब उस मामले को थाना व कोर्ट ले जाया जाता है. ग्राम प्रधान बुद्धेश्वर उरांव ने कहा है कि 1984 ईस्वी में ग्राम विकास समिति गम्हरिया का गठन किया गया. उसी समय गांव में हड़िया दारू की बिक्री पर रोक लगायी गयी थी, जो आज तक लागू है. सिर्फ पर्व त्योहार में घरेलू उपयोग व पूजा पाठ के लिए लोग हड़िया बनाते हैं. संरक्षक बंधन उरांव ने कहा है कि गांव के युवक गलत रास्ता अपना न लें. इसलिए 1995 ईस्वी से गांव में फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है. प्रतियोगिता में पूरे गांव के लोग शामिल होते हैं. खेल के लिए दान में ग्राउंड भी मिला है. ग्राम विकास समिति के अध्यक्ष रूपू उरांव ने कहा है कि गम्हरिया गांव के विकास व यहां के विवाद को हमलोग अक्सर मिल बैठ कर दूर करते हैं. हर छोटे मामलों का गांव में ही निबटारा होता है.

उग्रवाद से मुक्त हो गया है गम्हरिया गांव

आज से 10 साल पहले तक यह गांव उग्रवाद प्रभावित था, परंतु पुलिस की दबिश व ग्रामीणों की एकजुटता के कारण यह गांव अब उग्रवाद से मुक्त हो गया है. बीते 10 सालों में एक भी उग्रवादी घटना गम्हरिया गांव में नहीं घटी है.

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