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Yaas Cyclone Weather Forecast : गुमला जिले में नहीं मिलेगी बारिश से राहत, 30 मई तक छाये रहेंगे बादल, मौसम वैज्ञानिकों ने जारी की ये चेतावनी

Updated at : 27 May 2021 1:57 PM (IST)
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Yaas Cyclone Weather Forecast : गुमला जिले में नहीं मिलेगी बारिश से राहत, 30 मई तक छाये रहेंगे बादल, मौसम वैज्ञानिकों ने जारी की ये चेतावनी

गुमला जिले में दिन का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेंटीग्रेड से 33 डिग्री सेंटीग्रेड रहेगा. जबकि रात का न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेंटीग्रेड से 23 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा. हवा औसतन 19 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है. उन्होंने कहा कि अगले 30 मई तक आकाश में घने बादल छाये रहेंगे. बारिश मूसलाधार होगी. मौसम के इस मिजाज पर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. खास कर किसानों को इसमें अलर्ट रहना है.

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Yaas Cyclone Weather Update In Gumla गुमला : गुमला में जिले में 27 मई से लेकर 30 मई तक आसमान में घने बादल छाये रहेंगे. भारी बारिश की भी संभावना है. हालांकि गुमला में बुधवार से ही बारिश शुरू हो गयी है. जिससे जनजीवन प्रभावित है. 30 मई तक मौसम खराब रहने पर लोग सावधानी बरतें. खास कर ग्रामीण क्षेत्र के लोग व किसानों को इसमें सतर्क रहने की जरूरत है. कृषि विज्ञान केंद्र गुमला के वैज्ञानिक अटल तिवारी ने बताया कि अगले कुछ दिनों तक आकाश में घने बादल छाये रहेंगे. भारी बारिश के साथ वज्रपात एवं तेज हवा चलने की संभावना है.

गुमला जिले में दिन का अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेंटीग्रेड से 33 डिग्री सेंटीग्रेड रहेगा. जबकि रात का न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेंटीग्रेड से 23 डिग्री सेंटीग्रेड के बीच रहेगा. हवा औसतन 19 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने की संभावना है. उन्होंने कहा कि अगले 30 मई तक आकाश में घने बादल छाये रहेंगे. बारिश मूसलाधार होगी. मौसम के इस मिजाज पर लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है. खास कर किसानों को इसमें अलर्ट रहना है.

बारिश को देखते हुए किसान लगी फसल के खेतों में जल निकासी का उचित प्रबंधन जरूर करें. साथ ही बारिश के समय जानवरों को गोहाल घर से बाहर नहीं निकाले. पशुओं के लिए चारा सुरक्षित स्थानों पर रखना उचित होगा. किसान बारिश व हवा चलने के समय खेतों में काम न करें. बड़े पेड़ों व बिजली पोल से दूरी बना कर रहें.

किसानों के लिए कृषि आधारित परामर्श
राख में मिट्टी तेल मिलाकर खड़ी फसल में भुरकाव करें

गरमा धान : खेतों में जलजमाव बनाये रखने के लिए मेढ़ को दुरुस्त रखें. खरपतवार हटा लें. फसल में बाली निकलने की अवस्था में गंधी बग कीट के आक्रमण की संभावना रहती है. इन कीटों का आक्रमण होने पर फसल में कीटनाशी दवा क्लोरपीरिफॉस धूल या क्यूनालफास धूल या मिथाइल पराथियॉन धूल का भुरकाव 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से शाम के समय साफ मौसम को देखते हुए करें. कीटनाशी दवा का भुरकाव के बाद कीड़े बगल के खेतों में चले जाते हैं. इसलिए किसान एक साथ अलग-अलग खेतों में भुरकाव करें. कीटनाशी दवा के अभाव में किसान राख में मिट्टी तेल मिला कर खड़ी फसल में भुरकाव करें.

गरमा मूंग को थ्रिप्स किट के आक्रमण से बचाये : गरमा मूंग : फसल में निकाई गुड़ाई अवश्य करें. जिससे मिट्टी में नमी ज्यादा दिनों तक बनी रह सके. समय पर बोयी गयी फसल इस समय पुष्प अवस्था में है. अगर फूल मुरझा कर गिर रहा है तो इसका कारण फूलों पर थ्रिप्स किट का आक्रमण हो सकता है. इस कीट से फसल को बचाने के लिए कीटनाशी दवा ट्राईजोफोस या प्रोफेन्फोश का छिड़काव एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से शाम के समय करें.

सब्जियों को बचाने के लिए नीम से बने कीटनाशी का उपयोग करें :

गरमा सब्जियां : लतर वाली सब्जियों में कहीं-कहीं विभिन्न कीटों जैसे लाल भृंग कीट, फल मक्खी आदि का आक्रमण हो रहा है. अगर इनमें फल लगना शुरू हो गया हो तो इन कीड़ों से बचाव के लिए नीम से बना कीटनाशी जैसे अचूक, नीमेरीन, निमेटीन, नीमेसिडीन में से किसी एक दवा का छिड़काव पांच मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से करें. अगर फल लगना शुरू नहीं हुआ है तो कीटनाशी दवा क्लोरपीरिफॉस का छिड़काव या इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव पौधों पर करें.

अदरख की खेती ऐसे करें

अदरख : अदरख की उन्नत किस्म बर्धवान, सुरूचि, सुप्रभा, नदिया में से किसी एक किस्म की बोआई 40 सेंटीमीटर कतार व 10 सेंटीमीटर पौधा की दूरी पर करें. एक एकड़ में बुवाई के लिए आठ क्विंटल बीज, 80 क्विंटल कंपोस्ट, 53 किलोग्राम डीएपी, 70 किलोग्राम यूरिया व 40 किलोग्राम म्यूरीएट ऑफ पोटाश की आवश्यकता होती है.

ओल की खेती ऐसे करें

ओल : ओल की उन्नत किस्म गजेंद्र, विधान, कुसूम में से किसी एक किस्म की बोआई 60 सेंटीमीटर कतार व 60 सेंटीमीटर पौधा की दूरी पर करें. एक एकड़ में बोआई के लिए 56 क्विंटल बीज, 80 क्विंटल कंपोस्ट, 53 किलोग्राम डीएपी व 54 किलोग्राम म्यूरीएट ऑफ पोटाश की आवश्यकता होती है.

हरी खाद :

मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने के लिए हरी खाद वाली फसल जैसे धाईचा या सनई की बुवाई संभावित वर्षा के बाद करें. एक एकड़ में बुवाई के लिए 20 से 25 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है.

Posted By : Sameer Oraon

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