ग्रामीणों ने बंद कराया सड़क व पुलिया निर्माण कार्य

Updated at : 06 Oct 2025 10:46 PM (IST)
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ग्रामीणों ने बंद कराया सड़क व पुलिया निर्माण कार्य

बिशुनपुर के गम्हारपाठ में 1.35 करोड़ रुपये की लागत से बन रही है सड़क व पुलिया

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बिशुनपुर. प्रखंड में सरकारी योजनाओं का हाल-बेहाल है. विभागीय अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं और संवेदक अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं. प्रखंड के गम्हारपाठ गांव में आरइओ विभाग द्वारा लगभग 1.35 करोड़ रुपये की लागत से सड़क व पुलिया का निर्माण कार्य पंकज कुमार कंस्ट्रक्शन द्वारा कराया जा रहा है, जो विवादों में है. सड़क व पुलिया निर्माण में जंगल का पत्थर लगाया जा रहा है. सीमेंट भी काफी कम मात्रा में दिया जा रहा है. घटिया काम होता देख ग्रामीणों ने काम बंद करा दिया है. ग्रामीणों ने बताया कि पुलिया निर्माण में जंगल से लाया गया घटिया लाल पत्थर लगाया जा रहा है. पुलिया में सीमेंट की मात्रा भी कम दी जा रही है, जिससे काम बंद करा दिया गया है. ग्रामीणों ने इसकी सूचना स्थानीय जनप्रतिनिधि व विभागीय अधिकारियों को दी. ज्ञात हो कि हाल के दिनों में ही रेहलदाग गांव में सीमेंट के साथ मिट्टी मिला कर पीसीसी सड़क बनाते ग्रामीणों ने पकड़ा था. इस प्रकार रांगे गांव में भी लाखों रुपये की लागत से बनी गार्डवाल पहली ही बारिश में धराशायी हो गयी. इसकी सूचना संबंधित विभाग को भी दी गयी. लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा अब तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गयी है. इधर सूचना मिलने के बाद विभागीय कनीय अभियंता बालासुश लकड़ा, प्रमुख राज लक्ष्मी उरांव, सांसद प्रतिनिधि राजू भगत, पंचायत समिति सदस्य धर्मेंद्र उरांव व मुखिया विजय विलसन कच्छप निर्माण स्थल पहुंच संवेदक को खरी-खोटी सुनायी. जनप्रतिनिधियों ने कहा कि कार्य में गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं किया जायेगा. कनीय अभियंता द्वारा तत्काल पुलिया को तुड़वाकर फिर से बनाने की बात कही गयी है. इधर, फॉरेस्टर किशोर राम ने कहा कि वन क्षेत्र से अवैध पत्थर की चोरी के मामले में संवेदक पर प्राथमिक की दर्ज की जायेगी.

वर्षों पुरानी मांग हो रही पूरी, लेकिन घटिया कार्य से ग्रामीण नाखुश

गम्हारपाठ गांव में सड़क बनाने की मांग काफी पुरानी है. ग्रामीणों की मांग पर गांव में पहली बार सड़क निर्माण कार्य शुरू हुआ. लेकिन घटिया निर्माण के कारण ग्रामीणों में नाराजगी है. वहीं संवेदक द्वारा वन क्षेत्र से अवैध रूप से पत्थर तोड़ कर निर्माण सामग्री जुटायी जा रही है. यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी खतरा है. इस संबंध में संवेदक द्वारा बताया गया की बारिश कारण मेटेरियल ऊपर तक नहीं पहुंच पा रहा है. तीन महीने के अंदर काम को पूरा करना है. इसलिए आसपास से पत्थर इकट्ठा कर निर्माण कराया जा रहा है.

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