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बसिया के ओमप्रकाश साहू की मत्स्य क्रांति के मुरीद पीएम मोदी, ‘मन की बात’ में कही बड़ी बात

Updated at : 27 Jul 2025 8:30 PM (IST)
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Mann Ki Baat PM Modi admires Matsya Kranti of Omprakash Sahu Basia

गुमला के ओमप्रकाश की मत्स्य क्रांति के मुरीद हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी.

Mann Ki Baat: गुमला के बसिया जिले के रहने वाले एक शख्स ने ऐसा काम किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी उससे प्रभावित हैं. जी हां, पीएम मोदी ने खुद 27 जुलाई 2025 को अपने मन की बात में उस शख्स के नाम का जिक्र किया. इस शख्स का नाम है ओम प्रकाश. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के जरिये गांव से पलायन रोकने में अहम भूमिका निभायी है. जानें उनके कार्यों के बारे में.

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Mann Ki Baat| बसिया (गुमला), कमलेश साहू : गुमला जिले से 70 किलोमीटर दूर बसिया प्रखंड क्षेत्र के कुम्हारी निवासी ओमप्रकाश साहू की कहानी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात में सुनायी है. ओमप्रकाश साहू बसिया प्रखंड के ऐसे क्षेत्र से आते हैं, जहां कभी नक्सलियों एवं उग्रवादियों की वजह से लोग दिन के उजाले में भी जाने से डरते थे. आज उस क्षेत्र में मत्स्य पालन ने ग्रामीणों की तस्वीर बदल दी है.

ओमप्रकाश साहू की पहल पर 20 तालाबों का हुआ निर्माण

यह संभव हो पाया है, केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना से. ओमप्रकाश साहू ने ग्रामीणों के साथ मिलकर इस योजना के माध्यम से एक ही स्थान पर 20 तालाबों का निर्माण कराया. स्थानीय ग्रामीण संगठित रूप से इन तालाबों में मत्स्य पालन कर रहे हैं.

गुमला जिले के बसिया प्रखंड के कुम्हारी गांव के ओमप्रकाश साहू. फोटो : प्रभात खबर

भाकपा माओवादी और पीएलएफआई में थी वर्चस्व की जंग

आज से एक दशक पूर्व इस क्षेत्र में प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) एवं उग्रवादी संगठन पीएलएफआई वर्चस्व के लिए जमींदारों और आम नागरिकों को बेवजह जान से मार डालते थे. ग्रामीण बताते हैं कि स्थिति ऐसी थी कि लोग रात के अंधेरे की बात तो दूर, दिन के उजाले में भी अपने घरों से बाहर निकलने से डरते थे.

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नक्सलवाद खात्म होने के बाद सामने आयी रोजगार की समस्या

परिस्थितियां बदलीं. लोगों ने पुलिस प्रशासन के सहयोग से नक्सलियों और उग्रवादियों के खिलाफ बिगुल फूंका और फिर धीरे-धीरे सब कुछ सामान्य हो गया. स्थिति सामान्य होने के बाद यहां के लोगों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या थी, रोजगार पाने की.

प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना बना ग्रामीणों का सहारा

ग्रामीणों का सबसे बड़ा सहारा बनकर सामने आया, भारत सरकार की ओर से मछली पालन के क्षेत्र में विकास के लिए शुरू की गयी प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना. इस योजना से जुड़कर ओमप्रकाश साहू ने ग्रामीणों के सहयोग से मछली उत्पादन शुरू कर अपनी आय में वृद्धि की है.

धान की खेती से अधिक मछली से हो रही है कमाई

ओमप्रकाश साहू बताते हैं कि जितनी आय धान की खेती से नहीं होती, उससे कहीं अधिक मत्स्य पालन कर कमाई हो जाती है. उन्होंने बताया कि जिनके पास खुद का तालाब था, वे तो खेती कर ही रहे थे, जिनके पास तालाब नहीं था, वे सरकारी तालाबों को लीज पर लेकर प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के माध्यम से मत्स्य पालन कर रहे हैं.

रोजगार के लिए अब पलायन नहीं करते लोग – ओमप्रकाश

उन्होंने बताया कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बिना किसी भेदभाव के सामूहिक रूप से मिलकर मछली पालन के माध्यम से रोजगार का एक नया जरिया खोला है. ओमप्रकाश साहू ने बताया कि अब जब नक्सलवाद का दौर खत्म हो चका है, तो लोगों को रोजगार के लिए पलायन नहीं करना पड़ रहा है.

गांव में ही लोगों को मिलने लगा है रोजगार. फोटो : प्रभात खबर

मजदूरों को गांव में ही मिल गया है रोजगार

प्रदेश के किसी इलाके में मुश्किल से रोजगार मिल भी जाता था, तो जितनी आय नहीं होती थी, उससे अधिक खर्च हो जाता था. अब मजदूरों को पलायन करने कि जरूरत नहीं है, क्योंकि अब गांव में ही उन्हें रोजगार मिल गया है.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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