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गुमला के रुद्रपुर में बसते हैं भगवान भोलेनाथ, प्राचीन मंदिर में हैं अनिगनत शिवलिंग

Updated at : 26 Feb 2025 5:05 AM (IST)
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रुद्रपुर गांव में जहां-तहां हैं शिवलिंग. फोटो : प्रभात खबर

गुमला जिले में जारी प्रखंड के रुद्रपुर गांव को भगवान भोलेनाथ का वास स्थल कहा जाता है. जानें क्या-क्या हैं इस गांव में. कैसे गांव का नाम पड़ा रुद्रपुर.

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जारी (गुमला), जयकरण महतो : गुमला जिले के जारी प्रखंड के गोविंदपुर पंचायत में एक गांव है- रुद्रपुर. इस गांव को शिव भगवान के वास स्थल के रूप में देखा जाता है. यहां प्राचीन शिव मंदिर है. कहा जाता है कि मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है. यहां अनगिनत शिवलिंग हैं. गांव के अलग-अलग स्थानों पर शिवलिंग को देखा जा सकता है. इसलिए रुद्रपुर मंदिर से श्रद्धालुओं की आस्था जुड़ी है. रुद्रपुर के लोग कहते हैं कि करीब एक हजार वर्ष पूर्व रुद्र प्रताप सिंह नामक राजा इस रास्ते से गुजर रहे थे. उसी समय रुद्रपुर गांव के प्राकृतिक सौंदर्य को देखकर यहां रुक गये. उन्होंने देखा कि बूढ़ा महादेव में शिवलिंग है. उन्होंने यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराने के बारे में सोचा. उन्होंने अपने सेनापति को वहां मंदिर का निर्माण करने का आदेश दिया.

प्राचीन शिव मंदिर में में विराजे भगवान भोलेनाथ. फोटो : प्रभात खबर

औरंगजेब ने मंदिर को करवा दिया था ध्वस्त

मंदिर से कुछ ही दूरी पर राजा रुद्र प्रताप सिंह ने एक राजमहल भी बनवाया. राजा रुद्र प्रताप सिंह ने ही उस गांव का नाम रुद्रपुर रखा. उसी समय शिवगुटरा मंदिर, देउर महादेव, बूढ़ा महादेव को भी स्थापित किया. कुछ वर्षों बाद मुगल बादशाह औरंगजेब इस रास्ते से गुजरे, तो उसकी नजर इस भव्य मंदिर पर पड़ी. औरंगजेब ने मंदिर और राजमहल को तोड़ने का आदेश दे दिया. औरंगजेब के आदेश पर मंदिर और राजमहल को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया. शिवलिंग को इधर-उधर फेंक दिया गया. यही वजह है कि रुद्रपुर गांव के चारों ओर जहां-तहां शिवलिंग बिखरे हैं.

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रुद्रपुर के पूर्वजों ने फिर से शिवलिंग को स्थापित कराया

उस जमाने में लोगों ने जहां जिस शिवलिंग को देखा, उसे वहीं स्थापित कर दिया. कुछ वर्षों बाद रुद्रपुर के पूर्वजों में विक्रम सिंह, ठाकुर प्रसाद सिंह, रामप्रसाद सिंह, शिव प्रसाद सिंह ने ध्वस्त मंदिर को खोदकर वहां की मिट्टी हटाकर शिवलिंग को निकाला और फिर से उसकी स्थापना की. यहां पर अभी भी मंदिर के ध्वस्त होने के बाद कई शिवलिंग के दबे होने की संभावना है. अगर खुदाई की जाये, तो यहां से कई प्राचीन धरोहर निकल सकते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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