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लक्ष्मी नारायण महायज्ञ 10 से 18 मार्च तक

Updated at : 01 Feb 2026 9:54 PM (IST)
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लक्ष्मी नारायण महायज्ञ 10 से 18 मार्च तक

गुमला प्रखंड के गिंडरारा गांव में पूर्व घोषित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के सफल संचालन के लिए रविवार को ग्रामीणों की बैठक यज्ञ के आचार्य कल्याण बाबा के नेतृत्व में हुई.

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गुमला. गुमला प्रखंड के गिंडरारा गांव में पूर्व घोषित लक्ष्मी नारायण महायज्ञ के सफल संचालन के लिए रविवार को ग्रामीणों की बैठक यज्ञ के आचार्य कल्याण बाबा के नेतृत्व में हुई. यज्ञ 10 मार्च से शुरू होकर 18 मार्च को संपन्न होगा. बैठक में यज्ञ के सफल संचालन को लेकर कमेटी का गठन किया गया. जिसमें नीतीश पाल सिंह मुख्य संयोजक, जितेश्वर सिंह को अध्यक्ष, संजय गोप, बिरसु राम, रामकुमार देवघरिया को उपाध्यक्ष, मिट्ठू को सचिव, अमरजीत महतो, सीता देवी, सुनीता देवी सावित्री देवी को सह सचिव, संतोष देवघरिया को कोषाध्यक्ष, रामचंद्र महतो, उदय प्रसाद साहू और संगीता देवी को सह कोषाध्यक्ष बनाया गया. वहीं मुख्य संरक्षक के रूप में राधेश्याम पाल सिंह, गोविंद पाल सिंह, अक्षय कुमार सिंह, पवन पाल सिंह, अरविंद लोहारा, अजीत साहू का चयन किया गया. इसके साथ ही यज्ञ के सफल संचालन के लिए विभिन्न अलग-अलग कमेटियों का भी गठन किया गया. कल्याण बाबा ने बताया कि क्षेत्र में सुख शांति बनी रहे. ईश्वरीय कृपा बनी रहने के लिए यह यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है. इसमें सभी सनातनी बंधु माताएं बहने अपना सहयोग देकर यज्ञ को सफल बनाएं. मौके पर काफी संख्या में ग्रामीण महिला पुरुष मौजूद थे. चार गांवों के ग्रामीणों को 201 एकड़ भूमि का मिला सामुदायिक वन पट्टा बिशुनपुर. प्रखंड कार्यालय सभागार में आयोजित कार्यक्रम में वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत प्रखंड क्षेत्र के चार गांवों के ग्रामीणों के बीच लगभग 201 एकड़ भूमि का सामुदायिक वन पट्टा का वितरण किया गया. कार्यक्रम में बीडीओ सुलेमान मुंडरी, सीओ शेखर वर्मा, जिप सदस्य पवन उरांव व जिला समन्वयक रोज खाखा मुख्य रूप से उपस्थित थे. सभी ने संयुक्त रूप से लाभुकों को वन अधिकार पट्टा प्रदान किया. अधिकारियों ने बताया कि यह प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी. जिसे प्रशासनिक पहल व विभागीय प्रयास से पूरा किया जा सका है. उन्होंने बताया कि यह पट्टा लघु वनोपज के संग्रहण व संरक्षण हेतु प्रदान किया गया है. इससे ग्रामीणों को वन संसाधनों पर वैधानिक अधिकार मिलेगा और उनकी पारंपरिक आजीविका को मजबूती मिलेगी. इस पूरी प्रक्रिया में आईएसबी का महत्वपूर्ण सहयोग रहा है. संस्थागत सहयोग से दस्तावेजीकरण, सत्यापन सहित अन्य प्रक्रिया को गति मिली. वहीं ग्रामीणों ने सामुदायिक वन पट्टा मिलने पर खुशी जतायी और प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया.

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VIKASH NATH

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