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पत्नी के इलाज के लिए पालकोट के अनिल ने जमीन तक रखी गिरवी, फिर भी नहीं बचा पाये जान, अब दाने- दाने को मोहताज

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
अपने जर्जर घर के बाहर खड़े अनिल साहू और आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बच्चों की छूटी पढ़ाई.
अपने जर्जर घर के बाहर खड़े अनिल साहू और आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण बच्चों की छूटी पढ़ाई.
प्रभात खबर.

Jharkhand News, Gumla News, गुमला (दुर्जय पासवान) : गरीबी का दंश, बच्चों की पढ़ाई बंद. यह कोई जुमला नहीं, बल्कि एक परिवार की सच्ची कहानी है. हम बात कर रहे हैं पालकोट प्रखंड के उमड़ा पंचायत स्थित गोजा वनटोली गांव के अनिल साहू (35 वर्ष) के परिवार की. यह परिवार गरीबी व संकटों में जी रहा है.

गरीबी के कारण वनटोली गांव के अनिल साहू के 4 बच्चे शिवानी कुमारी (12 वर्ष), सीता कुमारी (10 वर्ष), कुश साहू (6 वर्ष) और लव साहू (6 वर्ष) स्कूल नहीं जाते हैं. स्कूल में नामांकन कराने के लिए पैसा तक नहीं है. घर की माली स्थिति ऐसी है कि राशन कार्ड से हर महीने 20 किलो चावल मिलता है. उसी से परिवार की भूख मिट रही है. साग सब्जी, दाल, मसाला खरीदने के लिए पैसे नहीं है. इस कारण बच्चे माड़- भात खाकर रहते हैं.

इस संबंध में अनिल ने बताया कि पत्नी फूलो देवी का 3 साल पहले निधन हो गया. वह बीमार थी. बीमार होने पर इलाज कराने के लिए 2 एकड़ जमीन 80 हजार रुपये में बंधक रखा था. लेकिन, 80 हजार रुपये खर्च करने के बाद भी बीमार पत्नी की जान नहीं बचा पाया.

अनिल ने कहा कि मैं मजदूरी करता हूं. उसी से जो पैसा मिलता है. किसी प्रकार घर चलता है. कई दिनों तक तो काम भी नहीं मिलता. जिस कारण घर में बेकार रहना पड़ता है. उन्होंने कहा कि गरीबों को कोई नहीं पूछता. मेरी गरीबी की स्थिति यह है कि सरकारी बाबू से पीएम आवास और शौचालय बनवाने की मांग करने पर सीधे मुंह बात तक नहीं करते हैं. झोपड़ीनुमा घर पर रह रहे हैं. बच्चे समेत सभी लोग खुले खेत में शौच करने जाते हैं. राशन कार्ड में 5 लोगों का नाम है जिसमें 20 किलो चावल मिलता है. बड़ी मुश्किल से एक महीने तक 20 किलो चावल से भूख मिटाते हैं.

पत्नी की मौत ने पति को बनाया शराबी

अनिल साहू के दो बेटे लव व कुश जुड़वा हैं. जब ये दोनों बच्चे तीन साल के थे. तभी पत्नी फूलो देवी की बीमारी से मौत हो गयी. पत्नी की मौत के बाद से अनिल गम में जी रहा है. पत्नी की मौत के गम में वह हर दिन शराब पीना शुरू कर दिया. ग्रामीण बताते हैं कि अनिल मजदूरी कर जितना पैसा कमाता है. उस पैसे को वह शराब पीने में खत्म कर देता है. इस कारण बच्चों की परवरिश ठीक ढंग से नहीं हो पा रही है. अनिल ने कहा कि मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था. इसलिए उसे भुला नहीं पा रहा हूं.

हमें पढ़ना है, प्रशासन हमारी मदद करे

अनिल बच्चों ने कहा कि हम पढ़ना चाहते हैं, लेकिन गरीबी के कारण स्कूल में दाखिला नहीं ले पा रहे हैं. बच्चों ने प्रशासन से गुहार लगाये कि स्कूल में एडमिशन करा दिया जाये. साथ ही पढ़ने- लिखने के लिए कॉपी और पेन की व्यवस्था की जाये. बच्चों ने कहा कि हमें भी पढ़ना है और आगे बढ़ना है. यहां बता दें कि वर्तमान में सभी बच्चे गांव में इधर- उधर घूमते रहते हैं. बच्चों को देखकर ग्रामीणों को दया आती है, लेकिन वे चार बच्चों की मदद चाह कर भी नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि सभी को अपना परिवार भी देखना है. इसलिए प्रशासन से मदद की गुहार लगाया है.

बच्चों की मदद करे प्रशासन : बालेश्वर साहू

इस संबंध में समाजसेवी बालेश्वर साहू ने कहा हम चांद तारों में पहुंचने की बात करते हैं, लेकिन आज भी कई ऐसे परिवार हैं, जो गरीबी के कारण पढ़ नहीं पा रहे हैं. इसमें हमारे गोजा वनटोली गांव के अनिल साहू के भी बच्चे हैं. प्रशासन से अपील है. इन बच्चों की मदद करें. अनिल का पीएम आवास व शौचालय बनवा दिया जाये.

Posted By : Samir Ranjan.

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