गुमला के मुरकुंडा लैंपस में सबसे बड़ा वित्तीय घोटाला, सचिव पर 30 लाख डकारने का आरोप

Updated at : 26 Mar 2026 9:45 AM (IST)
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Financial Scam

थाने में केस दर्ज करने पहुंचे नई कमेटी के लोग. फोटो: प्रभात खबर

Financial Scam: गुमला के मुरकुंडा लैंपस में 30 लाख रुपये के वित्तीय घोटाले का मामला सामने आया है. सचिव पर गबन और नियम उल्लंघन के गंभीर आरोप लगे हैं. ऑडिट में गड़बड़ी उजागर होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और दोषियों पर कार्रवाई की मांग तेज हो गई है. घोटाले से संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

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गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट

Financial Scam: झारखंड के गुमला प्रखंड के मुरकुंडा लैंपस में वित्तीय घोटाला सामने आया है. लैंपस के सचिव पर करीब 30 लाख रुपये गबन करने का आरोप है. इसके साथ ही, उन पर विभागीय आदेश की खुलेआम उल्लंघन करने और तीन साल से नई चयनित कमेटी को कार्यभार नहीं सौंपने का भी गंभीर आरोप लगा है. मामला सामने आते ही सहकारिता विभाग और स्थानीय प्रशासन में हड़कंप मच गया है. इस पूरे मामले पर वर्तमान चयनित अध्यक्ष झाड़ी भगत और कार्यकारिणी के 10 सदस्यों ने सदर थाना पहुंचकर सचिव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पुलिस लिखित आवेदन सौंपा है. आवेदन मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है.

कब हुई मुरकुंडा लैंपस की स्थापना

जानकारी के अनुसार, मुरकुंडा लैंपस की स्थापना वर्ष 1992 में 80 हजार रुपये की पूंजी से की गई थी. इस पैसे से किसानों को खाद-बीज उपलब्ध कराए जाते थे. मुनाफे की रकम अध्यक्ष और सचिव के संयुक्त खाते में जमा की जाती है. लैंपस को समय-समय पर सरकार से भी अनुदान मिलता रहा है. सरकार की ओर से आर्थिक सहायता मिलने के बाद इस सहकारी संस्था की आर्थिक स्थिति मजबूत बनी रही. लेकिन वर्ष 2001 से 2023 तक लैंपस में नई कमेटी का गठन नहीं हुआ है. इस दौरान कागजी प्रक्रिया के तहत रामजन्म साहू को सर्वसम्मति से सचिव बनाया गया और वे 2018 तक इस पद पर बने रहे. इसके बाद विभागीय निर्देश पर नई कमेटी गठन की प्रक्रिया शुरू हुई.

ऑडिट से घोटाले का खुलासा

27 सितंबर 2023 को मतदान के जरिये नई कमेटी का चुनाव हुआ. 14 दिसंबर 2023 को सहकारिता प्रसार पदाधिकारी की ओर से आधिकारिक पत्र जारी कर अध्यक्ष और कार्यकारिणी की घोषणा की गई. साथ ही, तत्कालीन सचिव रामजन्म साहू और बीरा खड़िया को कार्यभार हस्तांतरित करने का निर्देश भी दिया गया. लेकिन, चौंकाने वाली बात यह है कि सरकारी आदेश के बावजूद आज तक निर्वाचित नई कमेटी को कार्यभार नहीं सौंपा गया. इस बीच वर्ष 2024-25 के ऑडिट में बड़ा खुलासा हुआ. इस खुलासे ने पूरे मामले को तूल दे दिया. सहकारी संस्था लैंपस का ऑडिट ऑडिटर अजीत कुमार ने की. उनकी जांच में लगभग 30 लाख रुपये की वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है.

कंप्यूटर और यूपीएस खरीद में भी गड़बड़ी

सचिव पर यह भी आरोप है कि उन्होंने सरकारी योजनाओं के तहत लैंपस को मिलने वाले कंप्यूटर, यूपीएस, प्रिंटर, मोबाइल, पॉश मशीन और फर्नीचर जैसी सामग्रियों में भी करीब एक लाख 67 हजार 500 रुपये की गड़बड़ी की है. वर्ष 2023 में समिति भंग होने और नई कमेटी बनने के बावजूद उन्होंने एक साल का 48 हजार रुपये मानदेय भी निकाल लिया, जो नियमों का खुला उल्लंघन है. इस पूरे मामले ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिये हैं. सवाल यह है कि पहले के ऑडिट में गड़बड़ियां क्यों नहीं पकड़ी गईं. क्या इसमें विभागीय स्तर पर भी लापरवाही या मिलीभगत रही? अब ये मामला जांच का विषय बन गया है.

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गुमला पुलिस ने जांच शुरू की

मुरकुंडा लैंपस में वित्तीय घोटाला सामने आने के बाद नई समिति के पदाधिकारी और सदस्य गुमला के सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है. प्राथमिकी दर्ज कराने वालों में समिति के अध्यक्ष झाड़ी भगत के साथ कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार साहू, जितेंद्र साहू, संतोष कुमार पुरी, विष्णु तिर्की, गंदुर खड़िया, गंदोरी देवी, फांसिका देवी, मीना देवी, मुनगी देवी और सुनीता टाना भगत शामिल रहे. इप सभी ने अपनी शिकायत में सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है. फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच में जुटी है. यदि समिति के सचिव पर आरोप साबित होता है, तो यह गुमला जिले के सहकारिता क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला साबित हो सकता है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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