सिसई. सिसई प्रखंड अंतर्गत भदौली महादेव मंडाटांड़ में आयोजित श्रीश्री 1008 श्री हरिहर महायज्ञ के तीसरे दिन रात्रि प्रवचन में अयोध्या से पधारी मानस मंजरी वीणा मिश्रा ने शिव विवाह का अद्भुत प्रसंग सुनाया. चौथे दिन में आचार्य सूर्य नारायण पाठक शैलेंद्र मिश्रा अवनीश पाठक द्वारा मंडपस्थ देवी-देवताओं की पूजा व हवन कराया. मानस मंजरी वीणा मिश्रा ने बताया की वर या कन्या इनको देखने या परखने के लिए बड़े-बूढ़े को ही भेजना चाहिए. क्योंकि उनका अनुभव परिपक्व होता है. जब बड़े जाते हैं, तो कुल संस्कार और घर सब उचित देखते हैं, तब वैवाहिक जीवन सफल हो जाता है. आजकल के बच्चे अपनी पसंद से विवाह करते हैं, पर विवाह टिक नहीं पाता है. शिव-पार्वती विवाह की सुंदर कथा सुनाते हुए उन्होंने संदेश दिया कि बाहर की खूबसूरती से अधिक मनुष्य को अंदर की यानी उसके विचार और संस्कार देखने चाहिए. एक सुयोग्य वर और सुयोग्य कन्या ही परिवार को साथ लेकर चलते हैं. शिव के बाहरी वेष को देख कर जब मैना माता ने विवाह करने से मना कर दिया, तब ऋषियों ने उनके असली प्रभाव के बारे में बताया तब जाकर मैना को ज्ञान हुआ की शिव कोई साधारण वर नहीं काल को भी जीतने वाले हैं और विवाह के लिए तैयार हो गयी. विवाह सही लगन और मुहूर्त को ध्यान रखते हुए करना चाहिए, अभी लोग नाचने-गाने और खाने-पीने में इतना समय बर्बाद करते है की सही समय पर विवाह ही नहीं हो पाता इसलिए वैवाहिक जीवन पर बुरा असर पड़ता है. मौके पर राधेश्याम सिंह, नंदकिशोर सिंह, रणविजय सिंह, सुनील सिंह, विक्रम ताम्रकर, अरुण किशोर सिंह, गौतम ताम्रकार, रामकिशोर सिंह, अरखिता नंद देवघरिया, बाबूलाल सिंह, उमेश गोप, मुकेश ताम्रकार, राजेश उरांव, दीपिका राज उरांव, राहुल सिंह, नेहा सिंह, प्रभात कुमार, संजू देवी, विक्रम ताम्रकार, गुड़िया देवी, प्रदीप चटर्जी, सुमन देवी, संतोष कुमार साहू, मनीषा देवी आदि मौजूद थे.
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