झारखंड: आंगनबाड़ी केंद्र में गैस सिलेंडर ब्लास्ट, सेविका व सहायिका की सूझबूझ से बाल-बाल बचे 23 बच्चे

Updated at : 23 Jun 2023 5:20 PM (IST)
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झारखंड: आंगनबाड़ी केंद्र में गैस सिलेंडर ब्लास्ट, सेविका व सहायिका की सूझबूझ से बाल-बाल बचे 23 बच्चे

आंगनबाड़ी केंद्र में एक ही कमरा होने की वजह से उसी कमरे में बच्चों की पढ़ाई भी होती है और उसी कमरे में खाना भी बनाया जाता है. किचन के लिए अलग रूम नहीं है. घटना के बाद ग्रामीण काफी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे.

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गुमला, दुर्जय पासवान: गुमला थाना के सिलाफारी गांव स्थित आंगनबाड़ी केंद्र में खाना बनाने के दौरान गैस सिलेंडर ब्लास्ट हो गया. जिस समय गैस सिलेंडर ब्लास्ट हुआ. उस समय केंद्र में 23 बच्चे थे. वे पढ़ाई कर रहे थे, परंतु सभी बच्चे सुरक्षित हैं. घटना शुक्रवार की सुबह 10 बजे की है. आंनबाड़ी केंद्र की सेविका व सहायिका ने सूझबूझ का परिचय दिया और बच्चों की जान बचायी. एक ही कमरे में पढ़ाई और किचन रूम होने के कारण ये हादसा बड़ा हो सकता था, लेकिन इस हादसे में सभी सुरक्षित हैं.

सूझबूझ से बाल-बाल बचे आंगनबाड़ी केंद्र के बच्चे

आंगनबाड़ी केंद्र की सेविका यशोदा देवी ने बताया कि बच्चों के खाने के लिए सूजी भूंजने के लिए कड़ाही चढ़ाई और सूजी भूंजने लगी. तभी अचानक रेगुलेटर में आग लग गयी. आनन-फानन में पास पड़े दर्री से गैस सिलेंडर को ढंक दिया, लेकिन दर्री में भी आग लग गयी. जिसके बाद फौरन हॉल में पढ़ रहे छोटे-छोटे मासूम बच्चों को एक-एक करके आंगनबाड़ी केंद्र से बाहर निकाली. जैसे ही सभी बच्चों को कमरे से बाहर निकाली और दूर ले जाने लगी. तभी गैस सिलेंडर जोरदार धमाके के साथ ब्लास्ट कर गया. इससे कमरे में रखी सभी खाद्य सामग्री, कुर्सी-टेबल, बाल्टी, खाना बनाने के बर्तन सहित सभी सामान जलकर नष्ट हो गये.

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एक ही कमरे में पढ़ाई और किचन

आंगनबाड़ी केंद्र में एक ही कमरा होने की वजह से उसी कमरे में बच्चों की पढ़ाई भी होती है और उसी कमरे में खाना भी बनाया जाता है. किचन के लिए अलग रूम नहीं है. घटना के बाद ग्रामीण काफी संख्या में आंगनबाड़ी केंद्र पहुंचे. आंगनबाड़ी सेविका व सहायिका की खूब प्रशंसा की. जिन्होंने भाग दौड़ करते हुए तत्परता के साथ सभी मासूम बच्चों की जान बचायी. घटना के बाद आंगनबाड़ी सेविका, सहायिका व बच्चे काफी डरे हुए हैं. सेविका ने बताया आंगनबाड़ी में दो छोटे-छोटे कमरे हैं. जिन्हें स्टोर रूम बनाया गया है. किचन के लिए अलग कमरा नहीं होने के कारण जिस कमरे में बच्चों को पढ़ाया जाता है. उसी में दरवाजा के पास बच्चों के लिए खाना भी बनाया जाता है.

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