घाघरा. घाघरा प्रखंड में मंगलवार को सरहुल पर्व मनाया गया. सर्वप्रथम पहान पुजार ने झखरा कुंबा में पूजा-अर्चना की गयी. इसके बाद विभिन्न गांवों से आये खोड़हा दल एकत्रित हुए और जुलूस निकाल चांदनी चौक, थाना चौक व ब्लॉक चौक होते करमडीपा पहुंचे, जहां पहुंच जुलूस सभा में तब्दील हो गयी. खोड़हा दल द्वारा पारंपरिक वेशभूषा के साथ ढोल-नगाड़े के साथ नृत्य करते दिखे. संचालन समिति द्वारा सभी दलों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया. शिवकुमार भगत ने कहा कि सरहुल सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति हमारी आस्था है. हम साल वृक्ष, जल, जंगल व जमीन की पूजा करते हैं, जो हमारी संस्कृति की आत्मा हैं. पूर्वजों द्वारा जो धरोहर हमें मिला है, उसे जन्मों जन्मांतर तक दिन-ब-दिन बेहतर करते हुए मनाने की दिशा में प्रयासरत रहने की जरूरत है. सचिव योगेंद्र भगत ने कहा कि हम आदिवासी प्रकृति के पूजक है. हमारा जीवन प्रकृति पर निर्भर रहता है. उन्होंने युवाओं को आगे आकर बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेने की बात कही, ताकि आने वाली पीढ़ी को हमारी संस्कृति, सभ्यता व परंपरा को बेहतर करने की दिशा में बताया जा सके. इस दौरान पूरे प्रखंड से लगभग 150 से अधिक खोड़हा दल पहुंचे. मौके पर सीआरपीएफ के डीआइजी रवींद्र भगत, बीडीओ दिनेश कुमार, सीओ आशीष कुमार मंडल, राजकुमार भगत, योगेंद्र भगत, अनिरुद्ध चौबे, कौशल किशोर सिंह, शीला कुजूर, शीला रानी, शिवा देवी, कृष्णा लोहरा, लाल उरांव, अनिल उरांव, रवि पाहन, झरी उरांव, चंद्रदेव उरांव, अमित नाग, सहदेव भगत, कामाख्या भगत, लालदेव भगत, विजय साहू, अवनीत पांडे, आशीष सोनी, अमित ठाकुर, रवि उरांव, सुनील उरांव मौजूद थे.
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