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आजादी के दशकों बाद भी सिलिंगा गांव में नहीं पहुंची विकास की किरणें

Updated at : 25 Feb 2026 10:04 PM (IST)
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आजादी के दशकों बाद भी सिलिंगा गांव में नहीं पहुंची विकास की किरणें

सड़क, बिजली, पानी और पुल के अभाव में 350 ग्रामीणों का जीवन बदहाल

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रायडीह. रायडीह प्रखंड मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर सुरसांग पंचायत के जंगलों के बीच बसा आदिवासी बहुल सिलिंगा गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. यह गांव प्रशासनिक उपेक्षा की मिसाल बन चुका है. करीब 350 की आबादी वाले इस गांव तक आजादी के दशकों बाद भी विकास की किरणें नहीं पहुंच सकी हैं. गांव में न सड़क है, न बिजली और न ही पीने के लिए स्वच्छ पानी. हालात इतने खराब हैं कि बरसात में ग्रामीणों को महीनों तक अपने ही गांव में कैद होकर रहना पड़ता है. गांव के पास बहने वाली नदी पर पुल नहीं होने के कारण पानी अधिक होने पर आवाजाही पूरी तरह ठप हो जाती है. गर्मी में किसी तरह नदी पार कर ली जाती है, लेकिन बरसात में यह जानलेवा साबित होती है.

डेढ़ किमी की दूरी तय कर एक चुआं से पानी लाते हैं लोग

गांव में एक भी चापाकल या कुआं नहीं है. ग्रामीणों को करीब डेढ़ किलोमीटर दूर स्थित एक चुआं से पानी लाना पड़ता है. चुआं का पानी भी साफ नहीं रहता, फिर भी मजबूरी में लोग उसी का उपयोग करते हैं. प्रतिदिन इतनी दूरी तय कर पानी लाना ग्रामीणों की दिनचर्या बन चुकी है.

नदी पार कर स्कूल जाते हैं बच्चे

सड़क व पुल के अभाव में गांव के बच्चे पथरीली पगडंडियों से होते हुए नदी पार कर स्कूल पहुंचते हैं. बरसात में उनकी पढ़ाई प्रभावित होती है. वहीं यदि कोई बीमार पड़ जाये, तो मरीज को गेडुवा भार में उठा कर करीब तीन किलोमीटर पैदल ले जाया जाता है, फिर वाहन की व्यवस्था कर अस्पताल पहुंचाया जाता है. हाल ही में गांव के अल्फोंस टोप्पो और दानियल डुंगडुंग गंभीर रूप से बीमार पड़े, लेकिन समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने के कारण उनकी मौत हो गयी.

बिजली के खंभे लगे, पर नहीं लगी तार नहीं

गांव में बिजली के पोल तो लगाये गये हैं, पर अब तक उन पर तार नहीं लगाये गये. बिजली के अभाव में ग्रामीण आज भी ढिबरी युग में जीने को मजबूर हैं. जंगलों से घिरे इस गांव में अंधेरे के कारण जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है.

मात्र सात लोगों के पास राशन कार्ड

सरकारी सुविधा के नाम पर गांव में केवल सात लोगों के पास राशन कार्ड है. राशन लेने के लिए उन्हें सात किलोमीटर दूर सुरसांग जाना पड़ता है. यदि वहां नेटवर्क की समस्या आ जाये, तो बायोमैट्रिक सत्यापन के लिए 25 किलोमीटर दूर रायडीह तक जाना पड़ता है.

ग्रामीणों ने कहा, बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन काटना कठिन

गांव के निर्मल टोप्पो, उर्सेला डुंगडुंग, मुक्ता कुल्लू और फुलजेम्स डुंगडुंग ने बताया कि सड़क, बिजली, पानी और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जीवन बेहद कठिन है. उनका कहना है कि आज तक कोई प्रशासनिक अधिकारी गांव की सुध लेने नहीं पहुंचा. आंगनबाड़ी केंद्र भी अधूरा और जर्जर स्थिति में है. ग्रामीणों ने उपायुक्त से गांव की समस्याओं के समाधान करने की मांग की है और उम्मीद जतायी है कि प्रशासन शीघ्र हस्तक्षेप कर सिलिंगा गांव को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करायेगा.

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