ई-चालान गांवों के विकास में बना बाधक, ठेकेदारों के भुगतान पर भी लगा ग्रहण

Published by : Akarsh Aniket Updated At : 10 Jun 2026 9:50 PM

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ई-चालान गांवों के विकास में बना बाधक, ठेकेदारों के भुगतान पर भी लगा ग्रहण

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जगरनाथ, गुमला गुमला सदर प्रखंड में ई-चालान की अनिवार्यता ने पंचायतों और गांवों के विकास कार्यों को ठप कर दिया है. झारखंड लघु खनिज समनुदान नियमावली-2004 में संशोधन के बाद अब किसी भी योजना में प्रयुक्त लघु खनिज जैसे बालू, मोरम, बोल्डर, चिप्स, ईंट आदि के लिए वैध ई-परिवहन चालान आवश्यक कर दिया गया है. इस नियम के आलोक में बीडीओ गुमला ने 9 मई 2026 को पत्र जारी किया, जिसके बाद वित्तीय वर्ष 2025-26 में 15वें वित्त आयोग से प्राप्त फंड से कराये गये कार्यों का भुगतान रुक गया है.

ठेकेदार आर्थिक संकट और मानसिक दबाव में हैं

छोटे ठेकेदारों की सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे ट्रैक्टरों से सामग्री ढुलाई करते हैं, जबकि ई-चालान की व्यवस्था केवल हाइवा वाहनों के लिए है. इस कारण उन्हें ई-चालान नहीं मिल पा रहा और भुगतान अटक गया है. पहले बिना ई-चालान के ही भुगतान होता था, लेकिन अब नये नियम के कारण ठेकेदार आर्थिक संकट और मानसिक दबाव में हैं.

ई-चालान की सख्ती केवल गुमला प्रखंड में लागू है : प्रमुख

गुमला प्रखंड प्रमुख करमीला देवी ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है. उनका कहना है कि ई-चालान की सख्ती केवल गुमला प्रखंड में लागू है, जबकि अन्य प्रखंडों में बिना ई-चालान के भी भुगतान हो रहा है. हाल ही में हुई दिशा बैठक में अन्य प्रखंड प्रमुखों ने भी बताया कि उनके क्षेत्रों में भुगतान बिना ई-चालान के किया जा रहा है. इससे स्पष्ट है कि नियमों के अनुपालन में असमानता है, जो ठेकेदारों और पंचायतों के लिए भारी परेशानी का कारण बन रही है.

नये नियमों के कारण योजनाएं ठप हैं : मुखिया

मुखिया सत्यवती देवी ने कहा कि पंचायतों में करोड़ों रुपये फंड उपलब्ध है, लेकिन उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है. पंचायतों का कार्यकाल भी कुछ ही महीनों का बचा है, और ग्रामीणों को उम्मीद थी कि विकास कार्य होंगे. लेकिन नये नियमों के कारण योजनाएं ठप हैं और जनता में नाराज़गी बढ़ रही है.

इस स्थिति का व्यापक असर यह है कि ठेकेदारों को भुगतान न मिलने से वे आर्थिक संकट में हैं, पंचायतों में विकास कार्य रुक गए हैं और ग्रामीणों की अपेक्षाएं अधूरी रह गई हैं. प्रशासनिक स्पष्टता और नीति-निर्धारण की कमी से असमानता पैदा हो रही है. यदि ई-चालान अनिवार्य किया गया है तो ठेकेदारों को व्यवहारिक विकल्प उपलब्ध कराना आवश्यक है, जैसे ट्रैक्टरों के लिए भी ई-चालान व्यवस्था. अन्यथा, फंड होने के बावजूद विकास कार्य रुकना जनता के हितों के खिलाफ है.

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