आजादी के 79 साल बाद भी सड़क का इंतजार! डहुटोली के 34 परिवार पगडंडी के सहारे, पानी के लिए कुआं ही सहारा

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डहुटोली गांव जाने वाली सड़क | Prabhat Khabar Network

कामडारा के डहुटोली गांव में आज भी सड़क और पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. आजादी के 79 साल बाद भी ग्रामीण विकास की राह देख रहे हैं.

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कामडारा (गुमला). बीत गये देवश की आजादी का 79वीं साल. राज्य भी बदले 25 साल बीते और बदले कई मुख्यमंत्री. लेकिन नहीं बदली तो कामडारा प्रखंड के टुरुंडू पंचायत के डहुटोली गांव की तस्वीर. आज भी प्रखंड के टुरुंडू डहुटोली गांव के ग्रामीण गांव की विकास के इंतजार की राह अभी देख ही रहे हैं. गांव तक जाने के लिये आज तक पहुंच पथ नहीं बन पाया है. ग्रामीणों की चिर प्रतीक्षित मांग रही है कि गांव तक पहुंचने के लिए सड़क बने. लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हुई. इधर गांव के ग्रामीण लंबे समय से गांव के विकास के इंतजार मे राह देख रहे हैं.

सड़क नहीं, पगडंडी के सहारे 150 ग्रामीण

जानकारी के मुताबिक कामडारा प्रखंड मुख्यालय से लगभग 6 किमी की दूरी पर अवस्थित टुरुंडू पंचायत मुख्यालय से लगभग एक किमी अंदर गांव डहुटोली तक जाने के लिये कोई कच्ची पथ तक नहीं है. रोजाना ग्रामीणों को ऊबड़खाबड़ पथरीली राह व पगडण्डी के सहारे मुख्य पथ तक आना-जाना करना पड़ता है. वहीं स्कूली बच्चो को खेतों पर पगडंडी के रास्ते प्रतिदिन विद्यालय आनेजाने मे काफी दिक्कत होती है. इस गांव में 34 घर अवस्थित है. जिसकी कुल आबादी लगभग डेढ़ सौ के आसपास है.

गर्मी में सूखता कुआं, बारिश में गंदा पानी

हालांकि विकास के नाम पर गांव मे मात्र बिजली पहुंची हुई है. ग्रामीणों ने बताया कि गांव में लगभग तीन वर्ष पूर्व एक सोलरयुक्त जलमीनार बनाया गया था. लेकिन वह भी मरम्मत. के अभाव अब बेकार पड़ा हुआ है. फिलहाल गांव के सभी ग्रामीण पेयजल के लिये कुएं पर आश्रित है. वह कुआं भी गर्मी के दिनों में सुख जाती है और बरसात के दिनों मे कुं मे बरसाती पानी घुस जाता है. इस गांव के अंदर के एक अधूरा चबूतरा भी देखने को मिला, जो सात इंच के फ्लाईएस ईट से सिर्फ खड़ा किया गया है.

बारिश में कीचड़ बन जाती हैं गांव की गलियां

उपर में आज तक फर्श भी तैयार नहीं किया गया है. गांव के अंदर एक आंगनबाड़ी केंद्र है. जिसमे स्थानीय छोटे-छोटे बच्चों को प्राथमिक शिक्षा व पोषाहार मिल जाती है. जबकि गांव के अंदर पीसीसी पथ नहीं रहने के कारण बारिश के दिनों में पूरा गली कीचड़ मे तब्दील हो जाता है. इधर गांव गांव की समस्या को लेकर कामडारा के जिला परिषद सदस्य दीपक कंडुलना से बातचीत की गयी तो उन्होंने कहा कि गांव की समस्या के बारे मे ग्रामीणों ने मुझे अवगत कराया है. इस विषय में गुमला के उपायुक्त से बातचीत कर गांव तक सड़क बनाने व उसकी विकास को लेकर पहल किया जायेगा.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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