सीडब्ल्यूसी को सौंपे जाने थे दोनों नवजात, नहीं पहुंचे खरीदने वाले दंपती

Updated at : 06 Oct 2025 10:45 PM (IST)
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सीडब्ल्यूसी को सौंपे जाने थे दोनों नवजात, नहीं पहुंचे खरीदने वाले दंपती

पुलिस व सीडब्ल्यूसी की टीम शहर के पटेल चौक पर देर रात तक दंपती का करती रही इंतजार

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गुमला. रायडीह के दो नवजात बच्चों को बेचने के मामले में प्रशासन सख्त हो गया है. समय निर्धारित था कि सोमवार को दोनों बच्चों को सीडब्ल्यूसी को सौंपा जायेगा. जिन लोगों ने बच्चों को खरीदा था, वे लोग अपने घर से बच्चों को लेकर निकले. लेकिन रात साढ़े आठ बजे तक दोनों दंपती बच्चों को लेकर गुमला नहीं पहुंचे थे. जबकि दूसरी तरफ सीडब्ल्यूसी की टीम, बाल संरक्षण पदाधिकारी व गुमला पुलिस पटेल चौक के समीप रात साढ़े आठ बजे तक बच्चों को प्राप्त करने के लिए खड़े रहे. जबकि दोनों दंपती सीडब्ल्यूसी से फोन पर संपर्क में थे. परंतु सात बजते उनका मोबाइल बंद हो गया, जिससे गुमला पुलिस की परेशानी बढ़ गयी. परेशानी में सादे लिबास में घूम रहे थाना प्रभारी दुकान बदल-बदल कर चाय पीते नजर आये, जबकि एक छोर पर सीडब्ल्यूसी व बाल संरक्षण विभाग के लोग खड़े थे. वहीं काले रंग की गाड़ी में बच्चों को बेचने वाली बीटीटी को बैठा कर रखा गया था. अधिकारियों ने बताया कि जिन दो दंपतियों ने नवजात बच्चों को खरीदा है. उनलोगों से संपर्क हुआ, तो उनलोगों ने सोमवार को बच्चों को लाकर सीडब्ल्यूसी को सौंपने की बात कही थी. परंतु जांच में पता चला कि एक बच्चे को गुमला शहर में ही किसी के यहां छिपा कर रखा हुआ है. पुलिस देर रात तक एक बच्चे को बरामद करने का प्रयास में लगी रही. वहीं दूसरे बच्चे को लेकर दंपती रांची से गुमला के लिए निकले. परंतु बेड़ो पहुंचते उनका मोबाइल बंद हो गया. जबकि प्रशासन ने फोन का लोकेशन निकाला, तो वे लोग नेशनल हाइवे सड़क पर ऑन-वे दिखे. सीडब्ल्यूसी की चेयरमैन ने कहा है कि बच्चों को बरामद करने के बाद कागजी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी.

एसडीओ पहुंचे रायडीह अस्पताल, कर्मियों से की पूछताछ

इधर, डीसी द्वारा गठित जांच टीम सोमवार को रायडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची. टीम में एसडीओ गुमला राजीव नीरज, सीएस गुमला डॉ शंभूनाथ चौधरी व बीडीओ रायडीह शामिल थे. टीम ने मामले की जांच करते हुए मामले में संलिप्त सभी लोगों से बारी-बारी से पूछताछ की और पूछताछ करते हुए मामले की जांच की गयी. शिशुओं की तस्करी मामले में जांच टीम में शामिल एसडीओ गुमला से पूछे जाने पर उन्होंने मामला के संबंध में बताते हुए कहा की अभी कुछ भी बताना जल्दबाजी होगी. जांच अभी पूरी नहीं हुई है. जैसे ही जांच पूरी हो जायेगी. जांच रिपोर्ट तैयार कर उपायुक्त को सौंप दी जायेगी.

एक सप्ताह पहले ही डॉक्टर को दी गयी थी सूचना

रायडीह अस्पताल की बीटीटी द्वारा दो बच्चों को बेचे जाने की सूचना एक सप्ताह पहले ही सीएससी के पदाधिकारी को फोन कर दी गयी थी. लेकिन अधिकारियों ने इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया. जब मामला मीडिया में सुर्खियों में आया और गुमला उपायुक्त ने मामले में गंभीरता दिखायी. इसके बाद रायडीह अस्पताल के अधिकारी व वहां के कर्मियों के हाथ पांव फूलने लगे. अगर एक सप्ताह पहले दी गयी सूचना पर अस्पताल कार्रवाई करती, तो आज बच्चों को बेचने का मामला व गुमला स्वास्थ्य विभाग की हो रही बदनामी को रोका जा सकता था.

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