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कोरोना इफेक्ट : ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को गांव में प्रवेश करने से किया मना, तंबू में रहने को हुई मजबूर

गांव में कोरोना महामारी (Corona pandemic) न फैल जाये. इस डर से ग्रामीणों ने एक गर्भवती महिला को उसके पति के साथ बहिष्कार करते हुए गांव में नहीं घुसने का फरमान जारी किया है. 13 दिनों से गर्भवती महिला अपने पति के साथ गांव के बाहर पेड़ के नीचे प्लास्टिक का तंबू लगाकर रहने को विवश है.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
गांव के बाहर तंबू में रहने को मजबूर गर्भवती महिला दंपती.
गांव के बाहर तंबू में रहने को मजबूर गर्भवती महिला दंपती.
फोटो : प्रभात खबर.

गुमला : गांव में कोरोना महामारी (Corona pandemic) न फैल जाये. इस डर से ग्रामीणों ने एक गर्भवती महिला को उसके पति के साथ बहिष्कार करते हुए गांव में नहीं घुसने का फरमान जारी किया है. 13 दिनों से गर्भवती महिला अपने पति के साथ गांव के बाहर पेड़ के नीचे प्लास्टिक का तंबू लगाकर रहने को विवश है. मामला गुमला जिला अंतर्गत सिसई प्रखंड के कुचईटोली गांव की है.

जानकारी के अनुसार, गांव के नीरज कुमार अपनी पत्नी के साथ 13 दिन पहले हरियाणा से वापस गांव लौटा है. इनका सिसई अस्पताल में स्वास्थ्य जांच हुआ है. ये स्वस्थ हैं. प्रशासन ने इन्हें होम कोरेंटिन में रहने का आदेश दिया है. लेकिन, जब नीरज अपनी गर्भवती पत्नी को लेकर गांव पहुंचा, तो उसे गांव घुसने नहीं दिया गया.

ग्रामीणों ने कहा कि जब तक कोरोना खत्म नहीं हो जाता, तब तक किसी भी स्थिति में गांव में प्रवेश करने नहीं दिया जायेगा. ग्रामीणों के इस फरमान के बाद नीरज ने गांव के बाहर पेड़ के नीचे बांस और प्लास्टिक का तंबू बनाया और 13 दिनों से इसी तंबू में रह रहे हैं. इस संबंध में नीरज ने वीडियो जारी कर मदद की गुहार भी लगायी है.

इलाज की सुविधा नहीं

नीरज की पत्नी 8 माह की गर्भवती है. रुक-रुक कर उसे पेट में दर्द उठती है. लेकिन, ग्रामीण उसकी मदद के लिए आगे नहीं आ रहे हैं. तंबू में महिला अपने पति के साथ है. उसी तंबू में गांव का एक अन्य प्रवासी मजदूर भी रह रहा है. गर्भवती महिला की देखरेख के लिए कोई महिला नहीं है. नीरज ने कहा कि अभी मेरी पत्नी के देखरेख और इलाज की जरूरत है. लेकिन, इलाज की कोई व्यवस्था नहीं है. गांव के लोग भी डर से हाल-चाल जानने नहीं आते हैं. संकट में हमलोग रह रहे हैं.

10 दिन का अनाज दिया

मिशन बदलाव के राजकुमार गोप ने कहा कि हरियाणा से लौटे नीरज व उसकी गर्भवती पत्नी को प्रशासन ने होम कोरेंटिन किया. लेकिन, किसी प्रकार की मदद नहीं की. अनाज भी नहीं दिया. जब हमारी टीम को इसकी सूचना मिली, तो हमलोगों ने 10 दिन के लिए अनाज उपलब्ध कराया है. श्री गोप ने कहा कि यह परिवार ग्रीन जोन से आया है. इसलिए प्रशासन ने होम कोरेंटिन में रखा है, लेकिन गांव में कोरोना का डर अधिक होने के कारण दंपती का बहिष्कार करते हुए गांव में घुसने नहीं दिया गया.

घर भेजने की हो रही है व्यवस्था : बीडीओ

इस संबंध में सिसई के प्रखंड विकास पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने कहा कि दंपती को गांव में घुसने नहीं देने की सूचना मिली है. दंपती को होम कोरेंटिन किया गया है. उन्हें घर पर ही रहना है. प्रशासन तंबू हटाकर दंपती को घर भेजने की व्यवस्था कर रही है.

Posted By : Samir ranjan.

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