मुंडा व असुर जनजाति वाले गुमला के 11 गांवों का हाल, अब तक ना पीएम आवास बना, ना ही बिजली व सड़क की मिली सुविधा

Updated at : 30 Nov 2021 8:52 PM (IST)
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मुंडा व असुर जनजाति वाले गुमला के 11 गांवों का हाल, अब तक ना पीएम आवास बना, ना ही बिजली व सड़क की मिली सुविधा

jharkhand news: गुमला जिला अंतर्गत कुटवां मौजा के 11 गांवों की स्थिति काफी खराब है. ग्रामीणों को ना तो पीएम आवास योजना का लाभ मिला है और ना ही बिजली-सड़क का. आज भी ग्रामीण मूलभूत सुविधा के इंतजार में हैं.

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Jharkhand news: झारखंड के गुमला से 90 किमी की दूरी पर कुटवां मौजा है. इस मौजा में 11 गांव है. यह चैनपुर प्रखंड के पीपी बामदा में आता है. गांव की भौगोलिक बनावट जंगल व पहाड़ है. कुटवां मौजा में 200 से अधिक घर है, लेकिन सरकारी योजना का लाभ इस गांव के लोगों को आज तक नहीं मिल रही है. किसी भी परिवार को प्रधानमंत्री आवास से पक्का घर नहीं बना है. गांव में बिजली नहीं है. गांव में चलने लायक सड़क तक नहीं है. इस गांव में मुंडा और विलुप्त प्राय: असुर जनजाति की संख्या अधिक है. इसके बावजूद कुटवां गांव मूलभूत सुविधाओं से कोसों दूर है.

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बिजली इस गांव के लिए सपना है. लोग अंधेरे में रहते हैं. मोबाइल चार्ज कराने कुरूमगढ़, टोटो, आंजन या फिर गुमला आते हैं. बिजली नहीं रहने के कारण रात को बच्चें पढ़ाई नहीं कर पाते हैं. इसी तरह का हाल सड़क का है. गांव में चलने लायक सड़क भी नहीं है. गांव में 40 फीट मात्र पेबर ब्लॉक बनी है. बाकी सभी सड़कें कच्ची है और कई जगह नाला है. जहां पुलिया नहीं है.

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गांव में शौचालय भी आधा अधूरा बना है. कई घर में तो शौचालय भी नहीं है. लोग खुले में शौच करते हैं. महिलाएं व युवतियां भी लाज-शर्म छोड़ खुले में शौच करने जाती हैं. जंगल-पहाड़ के बीच गांव होने के कारण यह पूरा इलाका नक्सलियों का सेफ जोन माना जाता है. इसलिए पंचायत व प्रखंड के अधिकारी के अलावा पंचायत के प्रतिनिधि भी गांव नहीं जाते. ग्रामीणों ने कहा कि हम विकास को छटपटा रहे हैं. कोई तो विकास का रहनुमा आयेगा जो हमारे गांव की तकदीर व तस्वीर बदलेगी.

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कुटवां मौजा में कुटवां, अंबाटोली, महुआटोली, देवीटोंगरी, कुसुमटोली, बरईकोना, हेंठटोला, ऊपरटोला, बरटोंगरी, असुर टोला व बरटोली गांव है. इन 11 गांवों की तकदीर व तस्वीर कब बदलेगी? यह सवाल गांव के लोग कर रहे हैं. हालांकि, ग्रामीणों ने गांव में बिजली पहुंचाने की मांग की है. जिससे शाम को लोग बिजली की रोशन में रह सके. कुटवां मौजा में मुंडा जाति के लोग अधिक हैं. इसके बाद असुर जनजाति के लोग भी रहते हैं. 10 घर अहीर व दो परिवार लोहरा जाति का है. सरकार ने मुंडा व असुर जनजाति के विकास के लिए कई योजना चला रही है, लेकिन इसका लाभ इस गांव के लोगों को नहीं मिल रहा है.

20 दिनों से नक्सली गतिविधि से डर

कुटवां गांव के लोग 20 दिनों से नक्सली गतिविधि के कारण डरे हुए हैं. हालांकि, महीने-दो महीने में इस गांव से होकर नक्सली गुजरते रहते हैं. लेकिन, इधर कुछ दिनों से नक्सली गांव के लोगों को ही परेशान कर रहे हैं. जिस कारण लोगों डरे हुए हैं. ग्रामीण बताते हैं कि कई बार नक्सली गांव में ठहरते हैं, लेकिन वे लोग अपना खाना-पीना बनाते हैं और एक रात रूकने के बाद दूसरे दिन चले जाते हैं. रात में गांव के स्कूल में नक्सलियों को ठहराव होता है.

स्कूल अधूरा, पैसे की हो गयी निकासी

कुटवां गांव में दो स्कूल भवन अधूरा है. सिर्फ भवन खड़ा कर छोड़ दिया गया है. ना दरवाजा व खिड़की लगा है और ना ही प्लास्टर किया गया है. ये दोनों भवन बेकार पड़ा हुआ है. बताया जा रहा है कि स्कूल भवन का पूरा पैसा निकल गया है, लेकिन अभी तक स्कूल भवन बनकर तैयार नहीं हुआ है. इस कारण बच्चों को परेशानी होती है. हालांकि, एक अधूरे भवन में चदरा चढ़ाया गया है, ताकि बच्चे किसी प्रकार बैठ कर पढ़ सके.

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ग्रामीण सोमा मुंडा ने कहा कि आजादी के 75 साल हो गये, लेकिन अभी तक हमारे गांव का विकास नहीं हुआ है. सरकार हमारे गांव में बिजली पहुंचा दें. वहीं, फेकुवा मुंडा ने कहा कि गांव में चलने लायक सड़क नहीं है. कई छोटे नाला है. जहां पुलिया नहीं है. बरसात में आवागमन में परेशानी होती है.

गांव का ही एक युवक नारायण मुंडा का कहना है कि बिजली नहीं रहने के कारण मोबाइल चार्ज कराने दूसरे गांव जाना पड़ता है. बच्चों की पढ़ाई बाधित होती है. बिजली जरूरी है. वहीं, ग्रामीण महिला सालो देवी ने कहा कि कुछ घर में शौचालय बन रहा था, लेकिन ठेकेदार ने अधूरा बनाकर छोड़ दिया है. कई घर में तो शौचालय बना भी नहीं है. जबकि कुंवारी मुंडाइन ने कहा कि गांव में किसी को पीएम आवास का लाभ नहीं मिला है. सभी घर कच्ची मिट्टी के हैं. बरसात में परेशानी होती है.

रिपोर्ट: दुर्जय पासवान, गुमला.

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