बच्चों ने सीखे प्राकृतिक रंग बनाने के गुर व उरांव चित्रकला

उरांव चित्रकला पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन
बिशुनपुर. इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र रांची व विकास भारती बिशुनपुर गुमला के संयुक्त तत्वावधान में ज्ञान निकेतन विकास भारती बिशुनपुर में उरांव चित्रकला पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन गुरुवार को हुआ. समापन समारोह में राष्ट्रीय कला केंद्र रांची के क्षेत्रीय निदेशक डॉ कुमार संजय झा, विकास भारती संयुक्त सचिव महेंद्र भगत व राष्ट्रीय कला केंद्र की कुमकुम मैत्रा व बोलो कुमारी उरांव मुख्य रूप से मौजूद रहे. डॉक्टर कुमार संजय झा ने कहा कि कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य उरांव चित्रकला को पुनः स्थापित करना है. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में नयी पीढ़ी अपनी पारंपरिक कला व संस्कृति से दूर होती जा रही है, जिससे इन कलाओं के विलुप्त होने की आशंका बढ़ रही है. ऐसी कार्यशालाओं के माध्यम से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने और उसे संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है. विकास भारती के संयुक्त सचिव महेंद्र भगत ने कहा कि कार्यशाला से बच्चे अपनी पारंपरिक कला से परिचित होंगे व आने वाली पीढ़ियों के लिए इसे सुरक्षित रखने में भूमिका निभायेंगे. कार्यशाला में छत्तीसगढ़ की आई मास्टर ट्रेनर सुमंती उरांव ने ज्ञान निकेतन, विकास भारती बिशुनपुर, जतरा टाना भगत विद्या मंदिर, कोलेश्वरनाथ विद्या मंदिर, राज्यकृत मवि, स्वामी विवेकानंद पब्लिक स्कूल व कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय के छात्र-छात्राओं को मिट्टी एवं गोबर से प्राकृतिक रंग तैयार करने की विधि सिखायी गयी. साथ ही प्राकृतिक रंगों से भित्ति चित्र निर्माण का अभ्यास कराया गया. भित्ति चित्र उरांव समुदाय की प्रमुख चित्रकला है, जिसमें पीली मिट्टी, काली मिट्टी, गोबर निर्मित मिट्टी व लाल मिट्टी का प्रयोग किया जाता है. इसके अलावा प्रतिभागियों को विवाह अवसरों पर बनायी जाने वाली दंडाखंड चित्रकला, सरहुल चित्रकला व पूर्वजों के इतिहास, उरांव जाति के इतिहास व ग्राम्य जीवनशैली पर आधारित चित्रकला की जानकारी दी गयी. इसमें प्रीतिबाला गाड़ी द्वारा सहयोग किया गया.
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