गुमला: 20 साल से बदहाल चेटर बस्ती की सड़क, बरसात में गड्ढों ने बढ़ाई लोगों की मुश्किलें

Author Durjay paswan|Edited by Priya Gupta
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सड़क का हाल | Prabhat Khabar Network

गुमला के चेटर बस्ती की मुख्य सड़क 20 वर्षों से बदहाल है। सैकड़ों गड्ढों के कारण स्थानीय लोग और स्कूली बच्चे भारी मुसीबत झेलने को मजबूर हैं।

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गुमला शहर का चेटर ऐसी बस्ती है. जहां की सड़क आप देख लेंगे. तो मुंह से एक ही बात निकलेगी. यह शहर की सड़क है या फिर गांव की है. हकीकत यही है. जरूर चेटर नगर परिषद में आता है. लेकिन चेटर बस्ती की मुख्य सड़क की जो स्थिति है. यह गांव से भी खराब है. सड़क का यह हाल 20 सालों से इसी प्रकार है. नेता से लेकर प्रशासन तक गुहार लगाया. परंतु, किसी ने सड़क बनाने की पहल नहीं की. नतीजा. आज लोगों के लिए यह सड़क मुसीबत का कारण बन गयी है. गुमला शहर के चेटर बस्ती की मुख्य सड़क आमजनों विशेषकर गर्भवती महिलाओं स्कूली बच्चों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. जैसा कि तस्वीर में देख रहे हैं कि सड़क का हाल काफी खस्ताहाल है जो दो दशक (20 वर्ष) पहले बनी थी.

वर्तमान में यह खस्ताहाल सड़क चेटर पुल से करंजमोड़ तो करीब डेढ़ किमी लंबी है. जिसमें एक-दो या 10-20 नहीं, बल्कि सैकड़ों छोटे-बड़े गड्ढे बने हुए हैं. अभी बरसात के दिनों में सभी छोटे-बड़े गड्ढों में पानी भरा हुआ है और आवागमन करने वाले लोगों के लिए परेशानी का सबब बना हुआ है. तस्वीर यह कहने के लिए काफी है कि कहने को तो शहर है. लेकिन सड़क गांव से भी बदत्तर है. हालांकि स्थानीय लोगों व जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन-प्रशासन को एक बार नहीं, बल्कि अनेकों बार आवेदन देकर सड़क की बदतर स्थिति से अवगत कराते हुए सड़क बनवाने की मांग की गयी है. लेकिन आवेदन देने के बाद भी सड़क का नहीं बनना. यह साबित करता है कि शासन-प्रशासन को आमजनों की समस्या से कोई लेना-देना नहीं है. जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को भुगतना पड़ रहा है. इसके साथ ही चेटर बस्ती का यह सड़क चाहा गांव के लोगों का भी मुख्य सड़क है. चाहा गांव के लोग गुमला शहर, प्रखंड या जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं. शासन-प्रशासन की उदासीनता का दंश झेल रहे लोग अब सड़क निर्माण की मांग को लेकर आंदोलन के मूड में हैं. यहां बता दें कि यह पूरा इलाका घनी आबादी वाला है.

बोर्ड की बैठक में सड़क का मुददा उठायेंगे

उपाध्यक्ष नगर परिषद गुमला के उपाध्यक्ष रमेश कुमार चीनी ने कहा है कि पूर्व के पार्षदों ने चेटर बस्ती की मुख्य सड़क को बनाने के लिए तीन बार नगर परिषद को प्रस्ताव बनाकर दिया. जिसे पास भी किया गया था. लेकिन फंड नहीं होने की बात कहकर सड़क नहीं बनायी गयी. यहां तक कि पूर्व पार्षदों ने सड़क बनाने की मांग सांसद, विधायक व डीसी से भी किये हैं. सड़क वाकई में खराब है. मैंने खुद सड़क का अवलोकन किया है. आने वाले बोर्ड की बैठक में चेटर बस्ती की सड़क का मुददा रखेंगे. मेरा प्रयास रहेगा कि सड़क बने.

20 साल में एक बार भी मरम्मत नहीं

राकेश चेटर बस्ती निवासी राकेश कुमार सिंह ने कहा है कि सड़क के कारण हमलोग नरक में जीने को विवश हैं. यह सड़क चेटर की मुख्य सड़क है जो 20 वर्ष पहले बनी थी. लेकिन आज तक न तो सड़क की मरम्मत की गयी है और न ही नया बनाने का प्रयास ही किया गया. करीब डेढ़ किमी लंबी सड़क पर अनगिनत छोटे-बड़े गड्ढे हैं. बरसात के दिनों में गड्ढों में पानी भर जाता है. आवागमन करने में भारी परेशानी होती है. सड़क बनाने की मांग को लेकर नेताओं व प्रशासन को आवेदन दिया है. फिर भी सुनवाई नहीं हुई.

मरीज व स्कूल छात्र सड़क से परेशान

अरविंद चेटर बस्ती निवासी अरविंद कुमार मिश्रा ने कहा है कि सड़क के कारण घनी आबादी परेशानी झेलने को विवश है. यह सड़क सिर्फ चेटर बस्ती ही नहीं, बल्कि चाहा गांव के लोगों की भी मुख्य सड़क है. चाहा गांव के लोग शहर आने-जाने के लिए इसी सड़क का उपयोग करते हैं. लेकिन सड़क की स्थिति काफी खराब है. प्रशासन को सड़क बनवाने की जरूरत है. ताकि आवागमन सुविधाजनक हो सके. खराब सड़क के कारण सबसे ज्यादा परेशान स्कूली बच्चों और मरीजों को होती है. खराब सड़क के कारण कई लोग सड़क पर गिरकर घायल भी हो चुके हैं. अब तो दिनोंदिन सड़क और भी खराब होता जा रहा है.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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