पुलिस अधिकारी बनकर पूर्व नेवी अफसर से ठगी, 25 ग्राम सोने के जेवर लेकर फरार

Author Durjay paswan|Edited by Priya Gupta
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गुमला में पुलिस अधिकारी बनकर दो ठगों ने पूर्व नेवी अफसर को झांसे में लिया और 25 ग्राम सोने के जेवर लेकर फरार हो गए। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।

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गुमला गुमला में पुलिस अधिकारी बनकर ठगी करने का मामला सामने आया है. रविवार को शहर के जशपुर रोड स्थित कोऑपरेटिव बैंक परिसर में बिजली बिल जमा करने पहुंचे एक पूर्व नेवी अधिकारी को दो शातिर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर अपने झांसे में लिया और महज पांच मिनट के भीतर करीब 25 ग्राम सोने के जेवर लेकर फरार हो गये. पीड़ित बसंत कुमार साहू निवासी भलदम चट्टी असनी पंचायत ने गुमला थाना में लिखित आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है. आवेदन के अनुसार बसंत साहू ने बताया कि वह भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त अधिकारी हैं. रविवार को वह जशपुर रोड स्थित विद्युत विभाग के कार्यालय में बिजली बिल जमा करने पहुंचे थे.

इसी दौरान एक युवक ने उन्हें स्कूटी किनारे खड़ी करने को कहा और खुद को पुलिस अधिकारी बताते हुए कहा कि वह हाल में हुई सोना लूट की घटना की जांच कर रहा है. इसी बीच एक दूसरा युवक वहां पहुंचा और पहले युवक को अग्रवाल नाम बताते हुए कोई सामान सौंपा. कथित पुलिस अधिकारी ने उसे बैग में रख लिया और कहा कि अग्रवाल ने भी अपने सोने के जेवर जांच के लिए दिये हैं. इसके बाद उसने बसंत साहू से भी गले में पहनी करीब 15 ग्राम की सोने की चेन और लगभग 10 ग्राम की सोने की अंगूठी जांच के नाम पर मांगी.

ठग ने जेवर को कागज में मोड़कर रखने का नाटक किया और कुछ ही क्षण बाद जेवर लौटाने का दावा करते हुए उनकी जेब में तीन-चार छोटे पत्थर डाल दिये. बसंत साहू को लगा कि उनके जेवर वापस कर दिये गये हैं. इसलिए उन्होंने तत्काल जेब की जांच नहीं की. इसके बाद दोनों ठग वहां से फरार हो गये. कुछ देर बाद जब बसंत साहू थाना चौक स्थित मां इंडेन शेरावाली गैस एजेंसी के कार्यालय पहुंचा और जेब में हाथ डाला तो सोने के जेवर की जगह पत्थर मिले. तब उन्हें ठगी का एहसास हुआ. उन्होंने तत्काल अपनी बेटी को घटना की जानकारी दी और गुमला थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज करायी.

दो दिन में दूसरी वारदात गौरतलब है कि यह महज दो दिनों के भीतर इस तरह की दूसरी घटना है. इससे पहले शनिवार को भी ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर एक महिला को इसी तरह अपने झांसे में लेकर उसके सोने के जेवर ठग लिये थे. उस मामले में गुमला थाना में प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस छानबीन में जुटी ही थी कि ठगों ने दूसरे ही दिन फिर उसी अंदाज में वारदात को अंजाम देकर यह संकेत दे दिया कि शहर में उनका गिरोह सक्रिय है.


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दुर्जय पासवान

लेखक के बारे में

By दुर्जय पासवान

दुर्जय पासवान ने वर्ष 2001 से पत्रकारिता की शुरुआत की. दैनिक जागरण में दो साल काम करने के बाद 2003 में वे प्रभात खबर से जुड़े. इसके साथ ही नयी दुनिया अखबार, प्रहार मैगजीन में भी अपनी सेवा दी. इसके बाद 2010 में वे दैनिक भास्कर गुमला का ब्यूरो इंचार्ज के रूप में काम शुरू किये. भास्कर में पांच साल सेवा देने के बाद दोबारा 2014 में प्रभात खबर में ब्यूरो इंचार्ज के रूप में वापसी की. तब से अबतक प्रभात खबर से जुड़े हुए हैं. उन्होंने नक्सलियों से जुड़ी खबरें, नक्सली घटनाएं, ग्राउंड रिपोर्ट, प्राचीन और ऐतिहासिक धरोहरों की खोज से संबंधित खबरों पर अच्छा काम किया. इन्हीं खबरों ने उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में पहचान दी. दुर्जय पासवान बहुत लगन से अपना सभी काम का पूरा करते हैं.

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