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बसिया में 30 करोड़ से नहर की मरम्मत हुई, फिर भी खेतों तक नहीं पहुंचा पानी

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
Jharkhand news : नहरों की स्थिति खराब होने के कारण धनसिंह टोला जलाशय के पानी का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा.
Jharkhand news : नहरों की स्थिति खराब होने के कारण धनसिंह टोला जलाशय के पानी का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा.
प्रभात खबर.

Jharkhand news, Gumla news : गुमला : गुमला जिला अंतर्गत बसिया प्रखंड में धनसिंह टोला जलाशय है. यह करोड़ों रुपये की लागत से बनी है. अभी हाल में ही 30 करोड़ रुपये से नहर की मरम्मत भी हुई थी. लेकिन, जिस मकसद से इस डैम का निर्माण किया गया है उसका लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है. इससे बसिया प्रखंड में कृषि क्रांति का सपना अधूरा है. यह डैम किसानों को कृषि कार्य के लिए सालोंभर पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया है. इसके बावजूद जलाशय के नहर में जगह- जगह दरारें पड़ गयी हैं, जिससे नहर का पानी खेतों तक पहुंचने से पहले बर्बाद हो रहा है या फिर पानी रिस कर एक ही स्थान पर जमा हो जाता है. जिससे एक ओर जहां जरूरतमंद किसानों को नहर का पानी नसीब नहीं हो रहा है. वहीं, जिन खेतों में लबालब पानी है वहां नहर के रिसाव से इतना पानी भर जाता है कि किसानों के कई दिनों की मेहनत कर बनाये गये खेतों के मेढ़ बह जाते हैं.

स्थानीय किसानों के लिए जल संसाधन विभाग की ये करतूतों ने यहां कई सवाल खड़े कर दिये हैं. धनसिंह टोली जलाशय योजना किसानों को पानी के लिए ललचाने में लगा हुआ है. बताते चलें कि कलिगा पंचायत के लौंगा, कोनबीर पंचायत के गुड़ाम सहित कई गांवों के किसान इससे काफी परेशान हैं. इस संबंध में स्थानीय किसानों का कहना है कि पूंजी जुटाकर उन्होंने खेतों में फसल लगाया गया है, लेकिन नहर के कारण सारे मेहनत पर पानी फिर जाता है.

इंजीनियर एवं ठेकेदारों के लिए दुधारू गाय बना डैम

दो दशक पूर्व धनसिंह टोली जलाशय का निर्माण किया गया था. दुर्भाग्यवश अपने मूल दायित्व के विपरीत इस महत्वाकांक्षी परियोजना का वर्तमान किसानों के स्थान पर विभागीय अधिकारियों एवं ठेकेदारों के लिए दुधारू गाय बना बैठा है. मालूम हो कि गत वर्ष ही लगभग 30 करोड़ की लागत से यहां नहर के पक्कीकरण सह जीर्णोद्धार का काम कराया गया है.

इस कार्य से किसानों में जलाशय योजना को लेकर एक नयी उम्मीदें भी जगी थी, लेकिन इसकी उपयोगिता का अनुमान सिर्फ इस पर लगाया जा सकता है कि इसके पोषक क्षेत्र के कई इलाकों में किसानों के लिए पानी का मिलना एक सपना बनकर रह गया है. मुख्य जलाशय में पानी रहने के बाद भी किसानों के खेतों तक पानी नहीं पहुंच रहा है. इसलिए नहर की गुणवत्ता पर निरंतर अंगुली उठ रहे हैं. दुर्भाग्यवश इस मामले में स्थानीय किसानों की आवाज भी नहीं सुनी जाती.

किसानों का दर्द

आरया बेरिटोली निवासी किसान मधु टोप्पो ने बताया कि नहर में जगह- जगह दरार पड़ गया है, जिससें पानी का रिसाव होता है और नहर का पानी कम हो जाता है. प्रकाश तिग्गा ने बताया कि खेतों को जब पानी की जरूरत होती है तब नहर में पानी नहीं रहता है. लौंगा निवासी मिखाइल लकड़ा ने कहा कि नहर अब जगह- जगह टूट रहा है और सारा पानी बह जाता है. पुलिया के नीचे रिसाव होने के कारण सब पानी बहकर एक जगह जमा हो जाता है. मतियस लकड़ा ने बताया कि हमारा खेत नहर से थोड़ी ही दूर में है, लेकिन नहर में ठीक से पानी नहीं रहने के कारण खेतों को पानी नहीं मिलता है.

Posted By : Samir Ranjan.

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