गुमला. गुमला में टेंपो, ऑटो व इलेक्ट्रिक टोटो के परिचालन मामले में जिला प्रशासन सख्त हो गया है. गुमला में अब टेंपो चालकों का ड्रेस कोड होगा. बिना ड्रेस के कोई चालक दिखेगा, तो कार्रवाई की जायेगी. वहीं टेंपो में क्षमता से अधिक छात्रों को बैठाने पर भी कार्रवाई की जायेगी. अब अधिक से अधिक पांच छात्रों को ही टेंपो, ऑटो या इलेक्ट्रिक टोटो में बैठा सकते हैं. प्रशासन यह कदम स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए उठाने जा रहा है. एसडीओ राजीव नीरज ने कहा है कि टेंपो व ऑटो द्वारा यदि स्कूली बच्चों को सीट से काफी अधिक संख्या में बैठा कर स्कूल ले जाते हैं, तो कभी भी किसी तरह की अनहोनी घटना घट सकती है. उपायुक्त ने इस पर नाराजगी जतायी है. इस तरह के कार्यों को रोकने के लिए सख्त हिदायत दी गयी है. बच्चों के साथ अनहोनी दुर्घटना होती है, तो इसके लिए सीधे तौर पर टेंपो व ऑटो चालक एवं विद्यालय प्रबंधन पूर्ण रूप से जिम्मेदार होंगे. इस मामले में प्रशासन की तरफ से सख्ती से कार्रवाई की जायेगी.
डीटीओ ने कहा, पर्व के बाद से होगी कार्रवाई
जिला परिवहन पदाधिकारी गुमला ने बताया कि किसी विद्यालय में स्कूली बच्चों को बस के अलावा किसी भी विद्यालय प्रबंधन द्वारा टेंपो, ऑटो अथवा टोटो (इलेक्ट्रिक इंजन) द्वारा किसी बच्चों को विद्यालय भेजने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है. परंतु ऐसा देखा जा रहा है कि विद्यालय प्रबंधन के प्राधिकृत किये बिना टेंपो, ऑटो अथवा टोटो (इलेक्ट्रिक इंजन) द्वारा 14-14 बच्चों को बैठा कर विद्यालय पहुंचाया जा रहा है. यदि इस तरह के कार्य में स्कूली बच्चों के साथ किसी तरह की दुर्घटना हो जाती है, तो सीधे तौर पर संचालक व संबंधित विद्यालय प्रबंधन पर कार्रवाई की जायेगी. अधिकतम पांच स्कूली बच्चों संबंधित विद्यालय में लाने व वापस ले जाने का कार्य करेंगे. इस संबंध में सभी विद्यालय प्रबंधन को इसका अंडरटेकिंग समर्पित करेंगे. किसी परिस्थिति में पांच से अधिक स्कूली बच्चों को विद्यालय लाते व वापस ले जाते हुए पाये जाते हैं, तो टेंपो व ऑटो के चालक एवं विद्यालय प्रबंधन सख्त कार्रवाई के भागी बनेंगे. डीटीओ ने यह भी बताया कि कुछ-कुछ विद्यालयों के छात्रों द्वारा दो पहिया वाहन ट्रिपल लोडिंग कर काफी तेजी से चलाते हुए विद्यालय आना-जाना करते हैं. इससे कभी भी वे दुर्घटना का शिकार हो सकते हैं. इस पर नियंत्रण किया जाना निहायत आवश्यक है. इनमें से कुछ छात्र बालिग भी नहीं है और न ही उनके पास ड्राइविंग लाइसेंस होता है. ऐसे छात्रों के विद्यालय आने-जाने के लिए विद्यालय प्रबंधन द्वारा रोक लगाना आवश्यक है. जब भी विद्यालय प्रबंधन द्वारा विद्यालय में अभिभावक की बैठक की जाती है, तो ऐसे मामलों को उठाया जाये और इस पर नियंत्रण रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाये.
स्कूल बस व टेंपो चालक सुधर जायें : नप प्रशासक
नगर परिषद गुमला के प्रशासक मनीष कुमार ने बताया कि विद्यालय द्वारा छात्र-छात्राओं को लाने और ले जाने के लिए आवंटित वाहनों द्वार शहर में बच्चों को जहां-तहां से उठाते है एवं जहां-तहां पर ड्रॉप करते हैं. इससे शहर में आवागमन बाधित होता है. वाहनों के विद्यालय आने-जाने के क्रम में जाम की स्थिति बनी रहती है. अतः सभी विद्यालय प्रबंधन द्वारा एक निर्धारित स्थान पर छात्र व छात्राओं को उतारने व चढ़ाने की कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि उस वक्त लगने वाले जाम की स्थिति से निजात पाया जा सके. इसके अलावा टेंपो व ऑटो द्वारा भी अपने निर्धारित स्थान के साथ-साथ जहां तहां से यात्री उठाते हैं, जिससे गुमला शहरी क्षेत्र में जाम की समस्या उत्पन्न होती है. इस पर भी कार्रवाई होगी.
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