अच्छे से पढ़ोगे, तभी बढ़ोगे

गुमला : एसपी चंदन कुमार झा सोमवार को आधा घंटा के लिए शिक्षक बने. उन्होंने गुमला से 20 किमी दूर स्थित आदिवासी विकास उवि फोरी के 10वीं के बच्चों को पढ़ाया. गणित विषय की क्लास ली. एसपी ने बच्चों से सवाल भी पूछे. कई सवालों का जवाब बच्चे नहीं दे सके. बच्चों द्वारा जवाब नहीं […]
गुमला : एसपी चंदन कुमार झा सोमवार को आधा घंटा के लिए शिक्षक बने. उन्होंने गुमला से 20 किमी दूर स्थित आदिवासी विकास उवि फोरी के 10वीं के बच्चों को पढ़ाया.
गणित विषय की क्लास ली. एसपी ने बच्चों से सवाल भी पूछे. कई सवालों का जवाब बच्चे नहीं दे सके. बच्चों द्वारा जवाब नहीं देने पर जब एसपी ने पूछा कि आपलोगों को गणित विषय कौन शिक्षक पढ़ाते हैं, तो विद्यार्थियों ने कहा कि फिजिकल एजुकेशन के शिक्षक गणित व साइंस पढ़ाते हैं. इससे एसपी अचंभित हुए. उन्होंने पूछा कि मैट्रिक परीक्षा की तैयारी कैसे कर रहे हैं, तो बच्चों ने बताया कि ट्यूशन ले रहे हैं. उन्होंने परीक्षा की तैयारी करने के टिप्स दिये. इससे पहले जब एसपी क्लास रूम में पहुंचे, तो एक बेंच पर चार-पांच विद्यार्थी बैठे मिले.
एसपी सबसे पहले लड़कों की ओर मुखातिब हुए. कई लड़कों के ड्रेस का बटन खुला था. शर्ट इन भी नहीं किया गया. इसपर एसपी ने लड़कों को नसीहत देते हुए कहा कि आप पढ़ोगे, तो आगे बढ़ोगे. नहीं पढ़ोगे, तो घाटा आपको ही होगा. पढ़ाई का सबसे पहला नियम अनुशासन है. आप स्कूल आये, तो पूरी तैयारी व पढ़ाई का माहौल के साथ.
साइंस, गणित व अंग्रेजी विषय के शिक्षक नहीं : आदिवासी विकास उच्च विद्यालय फोरी में 10 साल पहले रौनक थी. मैट्रिक का रिजल्ट 60 प्रतिशत से ऊपर होता था. यहां नामांकन के लिए कतार लगी रहती थी, लेकिन आज यह स्कूल अपनी पहचान खोता जा रहा है. अब छात्र इस स्कूल में पढ़ने से कतराते हैं. शिक्षकों की कमी है. इस वजह से वर्ग आठ की पढ़ाई बंद कर दी गयी. अभी नौ व 10 कक्षा की पढ़ाई होती है. 202 छात्र नामांकित हैं. साइंस, गणित व अंग्रेजी विषय के शिक्षक नहीं हैं. कुड़ूख, फिजिकल व भूगोल विषय के शिक्षक इन महत्वपूर्ण विषयों को जैसे-तैसे पढ़ाते हैं. कुड़ूख के शिक्षक प्रमोद कुजूर, भूगोल की रूपश्री तिर्की व फिजिकल के शिक्षक प्रभारी एचएम अमरेंद्र कुमार हैं. इन्हीं तीन शिक्षकों के भरोसे वर्ग नौ व 10 की पढ़ाई होती है. शिक्षकों ने बताया कि स्वीकृत पद 11 में मात्र तीन शिक्षक कार्यरत हैं.
1961 के भवन में पढ़ रहे छात्र : 1961 में स्कूल भवन बना था, जो जर्जर हो गया है. छत का प्लास्टर टूट रहा है. इसी भवन में छात्र जान हथेली में रख कर पढ़ते हैं, क्योंकि यहां कोई विकल्प नहीं है. नया स्कूल भवन बन रहा है. आधा अधूरा है. चौंकाने वाली बात कि पूरा पैसा निकल गया, लेकिन भवन पूरा नहीं हुआ. एक भवन 25 वर्षों से अधूरा है. उसका पैसा भी ठेकेदार व स्कूल प्रबंधन डकार गये. अभी अधूरे भवन में विद्यार्थियों ने साइकिल स्टैंड बना दिया है.
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