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उनेशा बीबी को है अब बच्चों की चिंता

10 Feb, 2016 1:56 am
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उनेशा बीबी को है अब बच्चों की चिंता

गुमला : उग्रवादियों ने सुहाग छिन लिया. वह जीने का सहारा था. अब बच्चों को कैसे पालेंगे. यह चिंता खाये जा रही है. सरकार भी मदद नहीं कर रही है. उक्त बातें गुमला थाना के कोटाम निवासी उनेशा बीबी ने कही. उसके पति सजाउद्दीन अंसारी उर्फ सजुद को चार जून 2014 को उग्रवादियों ने गोली […]

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गुमला : उग्रवादियों ने सुहाग छिन लिया. वह जीने का सहारा था. अब बच्चों को कैसे पालेंगे. यह चिंता खाये जा रही है. सरकार भी मदद नहीं कर रही है. उक्त बातें गुमला थाना के कोटाम निवासी उनेशा बीबी ने कही. उसके पति सजाउद्दीन अंसारी उर्फ सजुद को चार जून 2014 को उग्रवादियों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी. उग्रवादी हिंसा के तहत मुआवजा व नौकरी की सहायता मिलनी है, लेकिन किसी प्रकार का सहायता नहीं मिली है. जबकि घटना के डेढ़ साल हो गये. पांच बच्चे स्कूल जाते थे. इसमें चार बच्चों ने स्कूल जाना छोड़ दिया है. एक बेटा सिर्फ इंटर की पढ़ाई कर रहा है.
डीसी व एसपी को सौंपा ज्ञापन
मंगलवार को उनेशा बीबी डीसी श्रवण साय व एसपी भीमसेन टुटी से मिलने उनके कार्यालय पहुंची. लेकिन अधिकारी बैठक में भाग लेने रांची गये थे. इसकेस कारण उनसे मुलाकात नहीं हो सकी. अंत में उसने कार्यालय में आवेदन जमा किया. उनेशा ने कहा कि: मेरे पति सजाउद्दीन का क्या कसूर था कि उग्रवादियों ने उसे मार दिया. कोई सहारा नहीं है. मरने के बाद दफन क्रिया के लिए भी प्रशासन ने सहयोग नहीं किया.
डीसी ने पत्र लिखा
उनेशा बीबी के मामले में डीसी श्रवण साय ने 15 जनवरी 2016 को अपर मुख्य सचिव गृह विभाग झारखंड सरकार को पत्र प्रेषित किया है. इसमें उन्होंने उग्रवादियों द्वारा सजाउद्दीन को मारने की जानकारी देते हुए उनकी आश्रित उनेशा बीबी को एक लाख रुपये मुआवजा की स्वीकृत देने की मांग की है.
बेटे को नौकरी देने की मांग
उनेशा ने बताया कि उसके सात बच्चे हैं. बड़ी बेटी की शादी कर दी है. बड़ा बेटा है. वह भी शादी करके अलग रहता है. मंझला बेटा अजरूउद्दीन अंसारी इंटर में पढ़ रहा है. उसे नौकरी मिले तो घर की स्थिति में सुधार होगी. अन्य चार बच्चे अफसाना, अफसर, फिरोज व अफरोज हैं. घर की स्थिति खराब होने के कारण उन्हें रिश्तेदारों के यहां रहने के लिए भेजा है.
इस प्रकार घटी थी घटना
चार जून 2014 को सजाउद्दीन कोटाम से अपने पुराने घर घाघरा के तेंदार गांव जा रहे थे. सजाउद्दीन पेशे से बकरी व्यवसायी था. तेंदार जाने के क्रम में रूकी घाटी के समीप उग्रवादियों ने उसकी हत्या कर दी थी.
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