जमाना फोरी-जी का, परंतु गुमला जेल में लगा है टू-जी जैमर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Jan 2020 11:34 PM (IST)
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गुमला : समय बदल रहा है, टेक्नोलॉजी भी बदल रही है. मोबाइल की बात करें, तो अब जमाना फोर-जी का है. कुछ दिनों के बाद हम फाइव-जी की जिंदगी जीने लगेंगे. इसके विपरीत अभी भी गुमला जेल टू-जी मोबाइल के जमाना में ही चल रहा है. गुमला जेल में वर्षों पूर्व टू-जी जैमर लगाया गया […]
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गुमला : समय बदल रहा है, टेक्नोलॉजी भी बदल रही है. मोबाइल की बात करें, तो अब जमाना फोर-जी का है. कुछ दिनों के बाद हम फाइव-जी की जिंदगी जीने लगेंगे. इसके विपरीत अभी भी गुमला जेल टू-जी मोबाइल के जमाना में ही चल रहा है. गुमला जेल में वर्षों पूर्व टू-जी जैमर लगाया गया था, ताकि यहां मोबाइल का उपयोग कोई बंदी गलत कार्यों के लिए नहीं कर सके.
जब तक टू-जी मोबाइल का उपयोग होता रहा, जेल के अंदर किसी भी प्रकार के मोबाइल की घंटी नहीं बजती थी. यहां तक कि जेल से सटे घरों में भी टू-जी मोबाइल काम नहीं करता था. जब तक टू-जी मोबाइल रहा, जेल के अंदर किसी भी प्रकार का मोबाइल का उपयोग नहीं होता था. परंतु जैसे ही जमाना थ्री-जी व फोर-जी में प्रवेश किया, गुमला जेल का टू-जी जैमर बेकार हो गया.
जेल में लगा टू-जी जैमर अब मशीनी डब्बा बन कर रह गया है. इधर, टू-जी जैमर के काम नहीं करने के बाद जेल प्रशासन गुमला कई बार जेल आइजी को पत्र लिख कर गुमला मंडल कारा में फोर-जी जैमर लगाने की मांग कर चुका है, परंतु अभी तक सरकार के स्तर से मंडल कारा गुमला में फोर-जी जैमर लगाने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गयी है.
जेल में छापामारी की संख्या बढ़ायी : फोर-जी जैमर नहीं लगने से जेल प्रशासन को आंतरिक सुरक्षा को लेकर हर समय सचेत रहना पड़ता है. ज्ञात हो कि पहले जेल के अंदर से लगातार लेवी व रंगदारी की मांग को लेकर ठेकेदार, व्यापारी व अन्य लोगों को फोन कॉल आता था. इस प्रकार के कई केस आये थे. थाने में कुछ मामलों में पूर्व में केस भी दर्ज है.
जेल प्रशासन ने फोर-जी जैमर नहीं मिलने के बाद जेल के अंदर छापामारी करने की संख्या बढ़ा दी. जेल प्रशासन के अनुसार, अब महीने में 15 से 16 दिन छापामारी होती है. जेल के अंदर आठ वार्ड हैं. सभी वार्ड में छापामारी की जाती है. छापामारी में गुमला जिला पुलिस प्रशासन से सहयोग लिया जाता है.
घनी आबादी के बीच है जेल : गुमला जेल घनी आबादी के बीच में है. जिस समय जेल की स्थापना हुई थी, उस समय आबादी कम थी. गिने चुने घर थे, परंतु समय के साथ करमटोली, शास्त्री नगर व आसपास के मुहल्लों में आबादी बढ़ने के बाद घरों की संख्या बढ़ गयी है. जेल प्रशासन का कहना है कि पूर्व में जेल आइजी को पत्र लिख कर गुमला जेल को शहर से हटाने की मांग की गयी थी.
इसके लिए शहर से तीन-चार किमी दूर कहीं जमीन खोज कर जेल बनाने की बात हुई थी, परंतु गुमला प्रशासन द्वारा जमीन उपलब्ध नहीं करायी गयी. इस कारण जेल अभी भी शहरी क्षेत्र में ही है. अब यहां से जेल हटाना भी मुश्किल है, क्योंकि यहां करोड़ों रुपये की लागत से अतिरिक्त जेल भवन, अस्पताल, प्रशासनिक भवन का निर्माण हो रहा है.
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