ePaper

अंधविश्वास में जकड़े हैं सिसई के कई गांव, शक में कईयों की हो चुकी है हत्या

Updated at : 05 Dec 2019 12:59 AM (IST)
विज्ञापन
अंधविश्वास में जकड़े हैं सिसई के कई गांव, शक में कईयों की हो चुकी है हत्या

समस्याओं व अंधविश्वास से घिरे हैं सिसकारी गांव के लोग 21 जुलाई को झाड़फूंक करनेवाले चार वृद्धों की कर दी गयी थी हत्या गुमला : सिसई विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों को आज भी अंधविश्वास ने जकड़ रखा है. इन गांवों में डायन-बिसाही के शक में कई वृद्धों को प्रताड़ित किया जाता रहा है, लेकिन […]

विज्ञापन

समस्याओं व अंधविश्वास से घिरे हैं सिसकारी गांव के लोग

21 जुलाई को झाड़फूंक करनेवाले चार वृद्धों की कर दी गयी थी हत्या
गुमला : सिसई विधानसभा क्षेत्र के कई गांवों को आज भी अंधविश्वास ने जकड़ रखा है. इन गांवों में डायन-बिसाही के शक में कई वृद्धों को प्रताड़ित किया जाता रहा है, लेकिन दुर्भाग्य है कि कभी कोई विधायक ने अंधविश्वास के खिलाफ काम नहीं किया. यही वजह है कि आज भी कई ऐसे गांव हैं, जहां वृद्ध होना उस वृद्ध के लिए अभिशाप बन जाता है.
अंधविश्वास में जकड़े कुछ गांवों की प्रभात खबर गुमला के प्रतिनिधि दुर्जय पासवान ने ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. पूर्व में घटित घटना व वर्तमान में गांव की स्थिति के बारे में पता किया. पहली कहानी, मुरगू क्षेत्र में एक महिला की मौत हो गयी थी. महिला की मौत के बाद उसका दुधमुंहा बच्चा शव के पास रोता रहा, लेकिन किसी ने उस बच्चे को दूध पिलाने या फिर शव के पास से हटाने की पहल नहीं की थी.
लोग इस डर से बच्चे को छू नहीं रहे थे कि मां की मौत के बाद भूत का साया बच्चे पर पड़ गया होगा, जिससे गांव में संकट आ सकती है. बाद में जिला परिषद अध्यक्ष किरण माला बाड़ा की पहल पर बच्चे को शव के पास से हटाया गया था और दूध पिलाया गया था. समय बदल गया, परंतु अभी भी इस क्षेत्र की स्थिति नहीं बदली है.
दूसरी कहानी सिसकारी गांव की है, जहां 21 जुलाई 2019 की घटना को याद कर आज भी पीड़ित परिवार सिहर जाता है. यहां अंधविश्वासियों ने झाड़फूंक करने वाले चार वृद्धों की निर्मम हत्या कर दी थी. इनमें चापा भगत (65 वर्ष), उसकी पत्नी पीरी देवी (62 वर्ष), सुना उरांव (65 वर्ष) व फगनी देवी (60 वर्ष) हैं.
इस घटना को हुए करीब चार माह हो गये, परंतु गांव की जो स्थिति है, अभी भी बदलाव नहीं दिख रहा है. हां जरूर, कुछ लोग गांव में शांति व्यवस्था की बात करते हैं, परंतु पीड़ित परिवार अभी भी डरा हुआ नजर आता है. स्व सुना उरांव का परिवार डर से गांव में नहीं रहता है. बेटा सनिया उरांव अपनी मां सुनी देवी के साथ सिसई में किराये के मकान में रहता है. गांव की गीता देवी कहती है कि कभी कभार दिन के उजाले में सुना की पत्नी व बेटा गांव आ जाते हैं.
गांव में चुनावी हलचल पर गीता ने कहा कि पूर्व में जब भी चुनाव होता था, 10 दिन पहले से गांव में बैठकों का दौरा शुरू हो जाता था. हर पार्टी के लोग आकर वोट मांगते थे, परंतु इसबार अभी तक एक भी बैठक नहीं हुई है. गांव में कोई चुनावी हलचल नहीं है. एक बड़ी पार्टी के नेता आकर चले गये. गीता ने कहा कि गांव के बड़े-बुजुर्ग बैठक करेंगे. वही तय करेंगे कि किस पार्टी को वोट देना है. वहीं गांव के दौरे में पाया कि किसान धान मिसनी में लगे हुए हैं. बादाम को खेत से निकालने के बाद सुखाने के लिए जगह-जगह रखा गया है. यहां शौचालय बन रहा है.
मुखिया ने एक ठेकेदार को शौचालय बनाने का ठेका दे दिया है. साहेबगंज से मिस्त्री बुला कर हर घर में शौचालय बनाया जा रहा है. सिसकारी गांव की एक अच्छी पहचान यह है कि यहां बांस की खेती बड़े पैमाने पर होती है. लातेहार जिला के बांस व्यवसायी गांव में कैंप कर रहे हैं. किसानों से बांस खरीद कर उसे काट कर खेत में रखा गया है.
सिसकारी गांव के बांस की मांग उत्तर प्रदेश में अधिक है. एक मौसम में 20 गाड़ी से अधिक बांस उत्तर प्रदेश भेजा जाता है. गांव के विकास की बात करें, तो यहां आज भी लोग सरकारी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं. गांव की सड़कें कच्ची है. सरकार की कई योजनाओं का लाभ गांव तक नहीं पहुंचा है.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola