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गुमला : दुकानदार को पुलिस का मुखबिर बता माओवादियों ने दिन-दहाड़े मारी गोली, मौत

Updated at : 05 Oct 2019 10:25 PM (IST)
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गुमला : दुकानदार को पुलिस का मुखबिर बता माओवादियों ने दिन-दहाड़े मारी गोली, मौत

दुर्जय पासवान, गुमला गुमला जिला के चैनपुर थाना अंतर्गत छिछवानी पंचायत स्थित लोरंबा गांव के किराना दुकानदार बृजमोहन की भाकपा माओवादियों ने दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी. छाती में दो गोली मारी गयी है. गोली लगते ही बृजमोहन की मौत हो गयी. घटना शनिवार दिन के 12 बजे की है. पुलिस मुखबिर के शक […]

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दुर्जय पासवान, गुमला

गुमला जिला के चैनपुर थाना अंतर्गत छिछवानी पंचायत स्थित लोरंबा गांव के किराना दुकानदार बृजमोहन की भाकपा माओवादियों ने दिन-दहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी. छाती में दो गोली मारी गयी है. गोली लगते ही बृजमोहन की मौत हो गयी. घटना शनिवार दिन के 12 बजे की है. पुलिस मुखबिर के शक में हत्या की गयी है.

पुलिस के अनुसार घटना को भाकपा माओवादी के सबजोनल कमांडर बुद्धेश्वर उरांव व उसके एक अन्य साथी ने अंजाम दिया है. मृतक की पत्नी ने बताया कि एक बाइक में दो उग्रवादी आये थे. इसमें एक बुद्धेश्वर उरांव था. जबकि दूसरे को पहचान नहीं सकी. उग्रवादी पहुंचे और परिवार के सदस्यों को दुकान से भागने के लिए कहा. इसके बाद बृजमोहन को गोली मार दी. गोली मारने के बाद माओवादी भाग गये.

परिजनों का आरोप है कि घटना की सूचना के बाद पुलिस गांव नहीं पहुंची थी. उसके रिश्तेदार एंबुलेंस लेकर गये तो शव को गांव से चैनपुर अस्पताल लाया गया. थाना प्रभारी मोहन कुमार ने कहा कि घटना को भाकपा माओवादी ने अंजाम दिया है.

बृजमोहन को किया गया था अलर्ट

भाकपा माओवादी के सबजोनल कमांडर बुद्धेश्वर उरांव तीन दिनों से चैनपुर के इलाके में भ्रमणशील है. पीपी बामदा, डहूडड़गांव में एक दिन पहले ही बुद्धेश्वर बाइक से देखा गया था. इसकी सूचना पुलिस को थी. लेकिन पुलिस ने माओवादियों की धर-पकड़ के लिए अभियान नहीं चलाया. जिसका नतीजा है कि माओवादियों ने दिनदहाड़े लोरंबा गांव में घुसकर किराना दुकानदार बृजमोहन की गोली मारकर हत्या कर दी.

जिस समय बृजमोहन को गोली मारी गयी. उस समय समीप में ही उसकी पत्नी व परिवार के अन्य सदस्य भी थे. वे लोग गिड़गिड़ाते रहे. लेकिन माओवादी नहीं माने. परिवार के सदस्यों को वहां से भागने कहकर गोली चला दी. अचानक गोली चलने से बृजमोहन भी संभल नहीं सका और न उसे भागने का अवसर मिला. गोली मारने के बाद दोनों नक्सली बाइक में बैठकर छिछवानी जंगल की ओर निकल गये.

सूत्रों से मिली जानकारी के कुछ दिन पहले ही बृजमोहन को अलर्ट किया गया था कि उसे माओवादी खोज रहे हैं. इसलिए लोरंबा गांव में न रहकर कहीं दूसरे सुरक्षित जगह पर रहे. इसकी जानकारी पुलिस को भी थी. लेकिन बृजमोहन अपने गांव से बाहर नहीं निकला. जिसके कारण उसे अपनी जान गंवानी पड़ी. इधर, घटना की सूचना के बाद भी पुलिस लोरंबा गांव नहीं गयी. पुलिस को खुद डर था कि कहीं नक्सली बृजमोहन की हत्या करने के बाद पुलिस को फंसाने की योजना तो नहीं बना रहा है. इस कारण पुलिस घटना की सूचना के बाद एंबुलेंस से शव मंगाकर अस्पताल से ही पूरी जानकारी इकट्ठा की.

हालांकि थाना प्रभारी मोहन कुमार का कहना है कि घटना डेढ़ बजे की है. पुलिस ढाई बजे गांव गयी थी और पुलिस के प्रयास से ही शव को गांव से चैनपुर अस्पताल लाया गया. उन्‍होंने यह भी बताया गया कि इस घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई गुप्त तरीके से चल रही है. यहां बता दें कि चैनपुर से लोरंबा गांव की दूरी करीब आठ किमी दूर है. अगर कोई बाइक या चार पहिया गाड़ी से गांव जाना चाहे तो 10 से 15 मिनट में पहुंच सकता हैं. अगर पुलिस का बयान देखें तो गांव पहुंचने में पुलिस को एक घंटे लग गये.

इस कारण गोली मारने की आशंका

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एक साल पहले पुलिस ने भाकपा माओवादी के सबजोनल कमांडर सुशील गंझू को गिरफतार कर जेल भेजा था. माओवादियों को शक था कि बृजमोहन ने ही पुलिस को सुशील की जानकारी देकर उसे पकड़वाया है. साथ ही क्षेत्र में नक्सली गतिविधि की सूचना पुलिस तक पहुंचाने में बृजमोहन का हाथ होने की आशंका माओवादी को थी. इधर, कुछ दिन पहले सबजोनल कमांडर भूषण यादव के सरेंडर में भी बृजमोहन का हाथ होने की सूचना माओवादियों तक पहुंची थी. इसलिए माओवादियों ने मुखबिरी का आरोप लगाकर उसे मार दिया.

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