गुमला : कहां गया झारखंड का दूसरा आयुर्वेदिक फार्मेसी कॉलेज?

Updated at : 06 Sep 2018 2:31 PM (IST)
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गुमला : कहां गया झारखंड का दूसरा आयुर्वेदिक फार्मेसी कॉलेज?

दुर्जय पासवान गुमला : झारखंड राज्य में दो राजकीय आयुर्वेदिक फॉर्मेसी कॉलेज है. एक कॉलेज साहेबगंज जिला और दूसरा गुमला जिला में है. गुमला में वर्ष 2007 से कॉलेज संचालित है. सरकारी कागजों में भी गुमला का नाम है. लेकिन वर्तमान में गुमला में कॉलेज कहां है. इसकी जानकारी किसी को नहीं है. यहां तक […]

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दुर्जय पासवान

गुमला : झारखंड राज्य में दो राजकीय आयुर्वेदिक फॉर्मेसी कॉलेज है. एक कॉलेज साहेबगंज जिला और दूसरा गुमला जिला में है. गुमला में वर्ष 2007 से कॉलेज संचालित है. सरकारी कागजों में भी गुमला का नाम है. लेकिन वर्तमान में गुमला में कॉलेज कहां है. इसकी जानकारी किसी को नहीं है. यहां तक कि गुमला के उपायुक्त श्रवण साय को भी फार्मेसी कॉलेज के बारे में जानकारी नहीं है.

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हकीकत यह है कि सरकार ने गुमला में फार्मेसी कॉलेज खोला है. परंतु अभी तक यह चालू नहीं हुआ है. वर्ष 2007 में जब गुमला में कॉलेज खोला गया था तो शहर से चार किमी दूर चंदाली स्थित पुराने आईबी भवन में यह संचालित था. उस समय कॉलेज के प्राचार्य भी गुमला में रहते थे. कॉलेज के नाम पर लाखों रुपये के सामग्री की भी खरीद हुई थी. लेकिन उस समय राजकीय आयुर्वेदिक फॉर्मेसी कॉलेज में पढ़ने वाले छात्रों की परीक्षा लेने वाला कौंसिल फंक्शन में नहीं रहने के कारण कॉलेज नहीं शुरू हुआ. वर्ष 2012 से कॉलेज शुरू होने वाला था. परंतु अभी तक कॉलेज शुरू नहीं हुई.

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एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2007 से गुमला के चंदाली में कृषि विभाग के डाक बंगला में कॉलेज खोला गया है. पर, तकनीकी खामियों के कारण पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी. कॉलेज संचालन के लिए सभी समान उपलब्ध हो गया है.

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पर, भवन की कमी व सरकार स्तर पर व्याख्याताओं की बहाली नहीं होने के कारण कॉलेज शुरू नहीं किया जा सका है. कॉलेज खोलने में आ रही समस्याओं से गुमला के कई उपायुक्त को अवगत कराया गया था. तत्कालीन डीसी शुभेंद्र झा को अवगत कराने पर उन्होंने सिलम घाटी में खाली पड़े भवन में कॉलेज चलाने के लिए कहा था.

प्राचार्य रांची में रहकर वेतन उठाते हैं

गुमला में वर्ष 2007 में ही कॉलेज खुल गया था. लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण इसे चालू नहीं किया गया. नतीजा लाखों रुपये का समान चंदाली स्थित भवन में बेकार पड़ा हुआ है. एक सरकारी कर्मी के जिम्मे लाखों रुपये का समान है. 2008 में भी कॉलेज के नाम पर समान मिला. जिसे गोदाम में रख दिया गया था. वर्ष 2008 से अबतक यहां तीन प्राचार्य डॉक्टर सुनाराम मांझी, मनोज कुमार व डॉक्टर शक्तिनाथ झा का पदस्थापना हो चुका है. लेकिन ये लोग रांची में रहकर सिर्फ वेतन उठाते रहे हैं. अभी कॉलेज के प्राचार्य कौन है. किसी को जानकारी नहीं है.

क्या बोले डीसी श्रवण साय

गुमला के उपायुक्त श्रवण साय ने कहा, ‘मुझे जानकारी नहीं है कि गुमला में फार्मेसी कॉलेज की स्थापना हुई है. या फिर कहीं यह कॉलेज चल रहा है. इसका पता करना पड़ेगा कि आखिर कॉलेज गया कहां?

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