झारखंड आंदोलन सत्ता का नहीं स्वाभिमान का आंदोलन रहा है : अर्जुन मुंडा

Updated at : 06 Aug 2018 8:47 AM (IST)
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झारखंड आंदोलन सत्ता का नहीं स्वाभिमान का आंदोलन रहा है : अर्जुन मुंडा

रांची : पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आंदोलनकारियों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने व 15 नवंबर 2000 से इसे लागू करने सहित 15 सूत्री सभी मांगें जायज है. झारखंड आंदोलन सत्ता का नहीं, स्वाभिमान का आंदोलन रहा है. अलग राज्य के अांदोलनकारियों के मान-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा होनी चाहिए. झारखंड […]

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रांची : पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने कहा कि आंदोलनकारियों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने व 15 नवंबर 2000 से इसे लागू करने सहित 15 सूत्री सभी मांगें जायज है. झारखंड आंदोलन सत्ता का नहीं, स्वाभिमान का आंदोलन रहा है. अलग राज्य के अांदोलनकारियों के मान-सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा होनी चाहिए. झारखंड संघर्ष व शोषण-अत्याचार के साथ जीने के अधिकार पर हो रहे आक्रमण के खिलाफ लड़ा गया आंदोलन से उपजा हुआ राज्य है.
इसके विकास के लिए रिसर्च के साथ दूरगामी रणनीति बनाने की जरूरत है.उक्त बातें श्री मुंडा ने रविवार को विधानसभा सभागार में झारखंड-वनांचल आंदोलनकारी मोर्चा के तत्वावधान में आयोजित आंदोलनकारियों के सम्मेलन में कही. श्री मुंडा ने कहा कि अभी भी झारखंड की माटी सूखी नहीं है. आकार-प्रकार देकर सांचे में ढाला जा सकता है. हमारे सांसदाें व विधायकों को आज की चीजों को गंभीरता से समझना व सोचना होगा.
आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें
आंदोलनकारियों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन देने व 15 नवंबर 2000 से इसे लागू करने, आंदोलनकारियों के परिवार के एक सदस्य को योग्यतानुसार सरकारी नौकरी देने व फोटोयुक्त पहचान पत्र निर्गत करने, सरकार द्वारा विशेष चिकित्सा सुविधा, स्मार्ट कार्ड उपलब्ध कराने व सरकारी बसों एवं रेलवे में एक सहयोगी के साथ एसी क्लास में पास देने, सभी आंदोलनकारियों को परिसदन एवं विधानसभा अतिथि निवास में नि:शुल्क ठहरने की सुविधा देने, आंदोलनकारियों को मरणोपरांत राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि करने, आंदोलनकारियों के परिजनों को भूखंड आवंटित करने व उनके बच्चों को शिक्षा में आरक्षण देने सहित अन्य मांगें शामिल हैं.
झारखंडियों को उजाड़ने का किया जा रहा षड्यंत्र
पूर्व सांसद शैलेंद्र महतो ने कहा कि झारखंडवासियों व अलग राज्य के अांदोलनकारी साथियों को सभी मूलभूत सुविधाएं व अधिकार मिलनी ही चाहिए. अध्यक्षता करते हुए राजेंद्र महतो ने 15 सूत्री मांगों को सरकार से जल्द से जल्द पूरा करने की बात कही. पूर्व एमएलसी प्रवीण सिंह ने कहा कि झारखंडियों को उजाड़ने के लिए व्यापक षड्यंत्र किया जा रहा है.
इसे रोकना हमारा दायित्व है. राजू महतो ने कहा कि झारखंड आंदोलनकारियों की भावना की रक्षा होनी चाहिए. सम्मेलन को देवेंद्र कुमार मेहता, दिलीप पटनायक, सुदामा खलखो, डॉ वीरेंद्र सिंह ने भी संबोधित किया. मौके पर अब्दुल खालिक, राजकुमार अग्रवाल, सुशीला सिंह, नारायण महतो, वीरेंद्र सिंह, ईश्वर चंद, गाब्रियल खाखा, दिवाकर साहू, मुनेश्वर आदि मौजूद थे.
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