ट्रेड लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली का आरोप

Updated at : 30 Jul 2018 2:52 AM (IST)
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ट्रेड लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली का आरोप

गुमला : गुमला चेंबर ऑफ कामर्स का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश उरांव से मुलाकात कर ट्रेड लाइसेंस को लेकर उत्पन्न समस्या से अवगत कराया. साथ ही इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गुमला के व्यापारियों को राहत देने की मांग की. चेंबर के अध्यक्ष सरजू प्रसाद साहू, सचिव हिमांशु केसरी, […]

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गुमला : गुमला चेंबर ऑफ कामर्स का एक प्रतिनिधिमंडल रविवार को विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर दिनेश उरांव से मुलाकात कर ट्रेड लाइसेंस को लेकर उत्पन्न समस्या से अवगत कराया. साथ ही इस मामले को गंभीरता से लेते हुए गुमला के व्यापारियों को राहत देने की मांग की. चेंबर के अध्यक्ष सरजू प्रसाद साहू, सचिव हिमांशु केसरी, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष अमित महेश्वरी, पूर्व अध्यक्ष महेश कुमार लाल ने स्पीकर से कहा कि गुमला में ट्रेड लाइसेंस के नाम पर अवैध वसूली हो रही है.
गुमला में नगर परिषद द्वारा कई व्यापारियों से वर्ष 2015-16 से ही जुर्माना लगा कर ट्रेड लाइसेंस निर्गत किया गया है. साथ ही कई व्यापारियों से अवैध तरीके से ट्रेड लाइसेंस के नाम पर मोटी रकम की वसूली की गयी है. समस्या सुनने के बाद स्पीकर ने कहा कि मैं इस मामले को देखता हूं. साथ ही वसूली मामले में जांच कराने की बात कही.
चेंबर के सचिव हिमांशु केसरी ने कहा कि सोमवार को चेंबर के लोग गुमला नगर परिषद कार्यालय जाकर पदाधिकारियों से मिल कर रांची के तर्ज पर 2017 से लाइसेंस निर्गत करने की बात रखेगा. रांची की बैठक में फेडरेशन ऑफ चेंबर द्वारा जानकारी दी गयी है कि रांची में 2017 से टैक्स लिया जा रहा है. इस संबंध में रांची से नोटिफिकेशन मंगाया गया है.
श्री केसरी ने कहा कि वर्तमान परिवेश में प्रत्येक वर्ष ट्रेड लाइसेंस नवीकरण करना अनुचित प्रतीत होता है. देखा जाये तो काफी संख्या में व्यापारियों ने जीएसटी में निबंधन कराया है. निगम को भी चाहिए कि कई प्रकार के लाइसेंस को समाहित करते हुए अनगिनत लाइसेंस को एक साथ लाये. साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाये. ताकि व्यापारियों को अनावश्यक लाइसेंस के लिए परेशान नहीं होना पड़े. चेंबर का पिछले दिनों मुख्यमंत्री के साथ हुए बैठक में ट्रेड लाइसेंस पांच वर्ष के लिए देने का निर्णय लिया गया है.
सभी चेंबर ऑफ कॉमर्स एवं अन्य व्यवसायिक संगठन से अनुरोध है कि नगर निगम के ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता को निरस्त करने के लिए एक पत्र यथाशीघ्र माननीय मुख्यमंत्री लिखा जाये. इसमें यह उल्लेख किया जाये कि जीएसटी लागू होने के बाद व्यवसाय पर नगर निगम का वार्षिक कर के बने रहने का कोई औचित्य नहीं है.
श्री केसरी ने बताया कि केंद्र सरकार का पूरा प्रयास व्यवसायी पर से लाइसेंस के बोझ को हटाना है और इस क्रम में बिहार, ओड़िशा, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात सहित कई राज्यों ने ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता को जीएसटी लागू होने के बाद से समाप्त कर दिया है. झारखंड के व्यवसायियों को राहत देने एवं राज्य के विकास के लिए इस राज्य में भी नगर निगम के ट्रेड लाइसेंस की बाध्यता को समाप्त किया जाना आवश्यक है.
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