गुमला : गुमला शहर में चार जलमीनार है. इनमें पानी स्टोरेज की क्षमता चार लाख गैलन है, लेकिन अभी टंकियों में एक बूंद पानी नहीं है. सभी जलमीनार सूखा हुई हैं. यही वजह है कि गुमला शहर की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है. गुरुवार को पांचवें दिन भी गुमला शहर में नल से पानी की आपूर्ति नहीं हुई. स्थिति भयावह होती जा रही है, लेकिन अधिकारी अभी तक पानी सप्लाई पर दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं. जिसका खमियाजा गुमला शहर में निवास करने वाला 9468 परिवार भुगत रहा है.
आबादी 51368 है. पानी के साथ बिजली की भी समस्या बनी हुई है. बिजली चार से पांच घंटा गुमला को मिल रही है, परंतु पानी बूंद भर नहीं मिल रहा है.
1.48 करोड़ का पानी पीते हैं 9468 परिवार
गुमला शहर में 9468 परिवार है. एक साल में एक करोड़ 48 लाख रुपये का पानी इतना परिवार पीता है. यह आंकड़ा पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसार है. हालांकि नये वित्तीय वर्ष में बजट बढ़ सकता है. पेयजल विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि 1.48 करोड़ में 98 लाख रुपये सिर्फ बिजली विभाग को दिया जाता है, ताकि पानी सप्लाई के लिए सुचारू ढंग से बिजली मिल सके. लेकिन हर समय बिजली विभाग की लापरवाही से पानी सप्लाई को बंद करना पड़ता है. वहीं 50 लाख रुपये से अधिक पैसा पानी सप्लाई करने वाले ठेकेदार व अन्य कार्य में खर्च होता है.
गुमला शहर की चारों टंकी में बूंद भर पानी नहीं
इस प्रकार पानी का हो रहा जुगाड़
लोग सुबह उठते ही पानी की जुगाड़ में लग जा रहे हैं. जहां चापानल ठीक है, वहां लोगों की भीड़ देखी जा रही है. कुछ स्थानों पर पानी बेचा जा रहा है, जहां सुबह से शाम तक लोग पानी खरीदते दिख रहे हैं. वहीं कुआं से माली द्वारा पानी भर कर बेचा जा रहा है. 10 से 15 रुपये प्रति भार पानी बिक रहा है. परेशान उन लोगों को ज्यादा हो रही है, जिनके बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं. अभी मॉर्निग स्कूल है. अभिभावकों के समक्ष विकट समस्या यह है कि बच्चों को स्कूल भेंजे या फिर पानी भरें. कई बच्चे भी पानी भरने के फेर में स्कूल नहीं जा पा रहे हैं.
नगर परिषद को जिम्मेवारी लेनी होगी
गुमला शहर में अभी पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा पानी की सप्लाई की जा रही है, लेकिन सरकार का आदेश आया है. शहरी जलापूर्ति अब नगर परिषद के जिम्मे होगी. वाटर टैक्स नगर परिषद लेती है, इसलिए पानी सप्लाई भी नगर परिषद ही करेगी. इस संबंध में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधीक्षण अभियंता पीएन सिंह ने कहा है कि सरकार के आदेशानुसार शहरी जलापूर्ति नगर परिषद को हैंडओवर कर देना है, लेकिन नगर परिषद हैंडओवर लेने को तैयार नहीं है. इस कारण जबतक हमारे पास पैसा है, तबतक हम शहर को पानी दे रहे हैं. जैसे ही हमारे विभाग के पास पैसा खत्म होगा, शहर में पानी सप्लाई ठप कर देंगे.
चार टंकी में पानी स्टोरेज की क्षमता
शास्त्री नगर जलमीनार : सवा लाख गैलन
पीएचइडी की जलमीनार : एक लाख गैलन
बाजार टांड़ जलमीनार : एक लाख गैलन
दुंदुरिया की जलमीनार : 75 हजार गैलन
पानी-बिजली नहीं से परेशानी
घरेलू कामकाज प्रभावित
व्यवसाय पर प्रतिकूल असर
बच्चों की पढ़ाई प्रभावित है
बिजली मिलेगी, तो पानी सुचारू ढंग से मिलेगा. लेकिन बिजली नहीं मिलने के कारण जलमीनार में पानी स्टोरेज नहीं हो पा रहा है. इस कारण गुमला में सप्लाई पानी ठप है. पानी सप्लाई का प्रयास जारी है.
पीएन सिंह, एसी, पीएचईडी
नागफेनी जलापूर्ति केंद्र में तीन मशीन है, जिसमें दो खराब है. एक चालू है. एक मशीन को और चालू करने का निर्देश पीएचइडी को दिया है. वहीं सप्लाई पानी देने का पूरा प्रयास चल रहा है.
श्रवण साय, उपायुक्त, गुमला
दिन में 11.30 बजे से 1.30 बजे तक बिजली मिली थी. जैसे ही पानी स्टोरेज के लिए मशीन चालू किया, पुन: बिजली में कहीं फॉल्ट हो गया.
रामसागर सिंह, तकनीकी पदाधिकारी
3 शहरी निकाय क्षेत्र में पानी सप्लाई का जिम्मा नगर परिषद, नगर पंचायत व नगर निगम ने ले लिया है. गुमला में भी नगर परिषद को शहरी जलापूर्ति योजना हैंडओवर लेना है, जिससे पानी सप्लाई सुचारू ढंग से किया जा सके.
राजेश शर्मा, निदेशक, स्वच्छ भारत