करण ने 13 साल की उम्र में हथियार उठाया था

Published at :13 Mar 2018 9:26 AM (IST)
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करण ने 13 साल की उम्र में हथियार उठाया था

दुर्जय/जॉली गुमला : सिसई प्रखंड के कोडेकेरा गांव निवासी करण गोप उर्फ करण सम्राट 13 साल की उम्र में पीएलएफआइ में शामिल हुआ था. अभी करण की उम्र 20 साल है. वह अपराध की दुनिया में सात साल रहा, जिसमें चार साल जेल में रहा. करीब तीन साल तक वह जंगल व पहाड़ों में घूमता […]

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दुर्जय/जॉली
गुमला : सिसई प्रखंड के कोडेकेरा गांव निवासी करण गोप उर्फ करण सम्राट 13 साल की उम्र में पीएलएफआइ में शामिल हुआ था. अभी करण की उम्र 20 साल है. वह अपराध की दुनिया में सात साल रहा, जिसमें चार साल जेल में रहा. करीब तीन साल तक वह जंगल व पहाड़ों में घूमता रहा. इन तीन सालों में करण ने एक दर्जन से अधिक लोगों की हत्या की. यहां तक कि अपने संगठन के भगोड़े लोगों को भी चुन-चुन कर मारा. करण पर भी कई बार दूसरे संगठन के अपराधियों ने हमला किया, लेकिन हर समय वह बचता रहा. पुलिस के साथ भी मुठभेड़ में वह बच निकलता था, लेकिन अब वह मुख्यधारा से जुड़ गया है. उसने पुलिस के समक्ष सरेंडर कर दिया है. साथ ही संकल्प लिया है कि वह अब हथियार नहीं उठायेगा.
बेटे के मुख्यधारा से जुड़ने से मां खुश
करण की मां जामवंती देवी है. अपने बेटे के मुख्यधारा से जुड़ने से सबसे ज्यादा खुश है. जब पुलिस गांव पहुंची, तो उन्होंने स्वागत किया. यहां तक कि पुलिस की जिस गाड़ी में करण को गुमला लाया गया, उसी गाड़ी में अपने बेटे के साथ बैठ कर जामवंती भी गुमला आयी. थाना में जब वह गाड़ी से उतरी और थाने के अंदर घुसी, तो वह सभी को प्रणाम करने लगी. उसके चेहरे पर खुशी थी. जामवंती ने कहा कि मेरा बेटा आज से हथियार नहीं उठायेगा. वह अब मुख्यधारा से जुड़ कर रहेगा. उसने कहा कि मैंने अपने बेटे को समझा बुझा कर मुख्यधारा से जोड़ा है.
संगठन ने जो काम दिया, पूरा किया
करण ने पुलिस को बताया कि सात साल पहले उसके गांव में पीएलएफआइ का सबजोनल कमांडर संजय टाइगर आया था. संजय के कहने पर वह संगठन में शामिल हुआ था. संजय टाइगर के दस्ते के साथ वह घूमता था. इस दौरान उसे जितना भी काम संगठन द्वारा दिया गया, उसे उसने पूरा किया. इस दौरान संजय टाइगर को पुलिस ने पकड़ कर जेल भेज दिया. संजय के जेल जाने के बाद करण ने संगठन का कार्यभार संभाला और उसने कई बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया.
कोडेकेरा का विकास बाधित है
उग्रवाद प्रभावित होने के कारण ही सिसई प्रखंड के कोडेकेरा गांव व आसपास का दर्जनों गांव विकास से बाधित है. हालांकि कोडेकेरा गांव में स्कूल है, जहां बच्चों की संख्या अधिक है. शिक्षा के प्रति सभी जागरूक हैं, लेकिन उग्रवाद का भय हर समय बना रहता है. करण ने कहा कि मैं जरूर कोडेकेरा में रहता था, लेकिन कभी गांव वालों को परेशान नहीं किया. किसी ग्रामीण को नुकसान नहीं पहुंचाया है. लेकिन जो लोग बदमाशी करते थे, उन्हीं लोगों की पिटाई की. वहीं अवैध कमाने वालों से लेवी वसूला है. करण ने कहा कि सरेंडर करने के बाद मैं जेल जा रहा हूं. जेल से निकलने के बाद गांव के विकास पर ध्यान दूंगा.
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