शहरी जलापूर्ति योजना : लोग परेशान, विभागों के अलग-अलग राग

Published at :10 Feb 2018 12:33 AM (IST)
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शहरी जलापूर्ति योजना : लोग परेशान, विभागों के अलग-अलग राग

दुर्जय/जगरनाथ पासवान गुमला : गुमला शहर में तीन दिन से सप्लाई पानी बंद है. 51 हजार की आबादी पानी के लिए परेशान है. किसी प्रकार पानी की जुगाड़ कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर पानी सप्लाई के लिए जिम्मेवार विभागों के अलग अलग राग है. पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता अनिरुद्ध प्रसाद हैं. उन्होंने पानी बंद […]

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दुर्जय/जगरनाथ पासवान
गुमला : गुमला शहर में तीन दिन से सप्लाई पानी बंद है. 51 हजार की आबादी पानी के लिए परेशान है. किसी प्रकार पानी की जुगाड़ कर रहे हैं. वहीं दूसरी ओर पानी सप्लाई के लिए जिम्मेवार विभागों के अलग अलग राग है. पीएचइडी के कार्यपालक अभियंता अनिरुद्ध प्रसाद हैं.
उन्होंने पानी बंद होने पर कहा कि बिजली मिल नहीं रही है. कहां से पानी सप्लाई करें. बिजली मिलेगी, तो पानी देंगे. नगर परिषद को शहरी जलापूर्ति देखनी है, लेकिन नप हैंडओवर ले नहीं रहा है.
पीएचइडी कब तक जलापूर्ति योजना को ढोयेगा. नप पैसा कमा रही है और पीएचइडी लोगों का गुस्सा झेल रहा है. वहीं नगर परिषद के सीटी मैनेजर अनूप कुमार हैं. उनसे फोन पर बात हुई.
उन्होंने कहा कि नगर परिषद को ऐसा कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है, जिसमें यह लिखा हो कि नगर परिषद को शहरी जलापूर्ति योजना देखनी है. ऐसे भी पीएचइडी जब भी पैसा मांगा है, पानी सप्लाई के लिए नगर परिषद पैसा देती आयी है. मोटर मशीन की खराबी हो या अन्य कोई तकनीकी कमी को दूर करने में नगर परिषद पूरा सहयोग करती है.
बिजली नहीं मिलने के आरोप पर विद्युत विभाग गुमला के कार्यपालक अभियंता सत्यनारायण पातर ने कहा कि पानी सप्लाई के लिए पूरी बिजली दी जाती है. थोपाथोपी का मामला नहीं होना चाहिए. हमें पता है कि कहां क्या जरूरत है. पानी सप्लाई का पूरा ख्याल रखते हैं,
क्योंकि यह जनता से जुड़ा मामला है. हालांकि शहर में अभी बिजली कम मिलने के सवाल पर श्री पातर ने कहा कि कुछ दिक्कत है. ऐसे शहरी क्षेत्र में पूरी बिजली दे रहे हैं. कभी शट-डाउन लेने के दौरान कुछ देर के लिए बिजली काटी जाती है. ऐसे देखा जाये, तो बिजली आपूर्ति में कहीं दिक्कत नहीं है.
इनकी सुनिये
पीएचइडी के इइ : बिजली नहीं है, कहां से दें पानी
विद्युत के इइ : पानी सप्लाई के लिए पूरी बिजली देते हैं
सीटी मैनेजर : पीएचइडी को नगर परिषद पैसा देती है
पीएचइडी के तकनीकी पदाधिकारी रामसागर सिंह ने कहा कि 15 मार्च तक नगर परिषद को अपने जिम्मे शहरी जलापूर्ति योजना लेनी है. इसके लिए जल्द पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से पत्र जारी हो जायेगा. पूर्व में भी पत्र जारी हुआ था, लेकिन नगर परिषद शहरी जलापूर्ति अपने जिम्मे लेने को तैयार नहीं है.
ऐसी स्थिति में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की सचिव आराधना पटनायक गंभीर है. गुरुवार को गुमला दौरे के क्रम में सचिव ने स्पष्ट किया है कि नगर परिषद को अपनी जिम्मेवारी समझनी होगी. वहीं पेयजल विभाग के अधिकारियों के अनुसार वर्ष 2012 में ही निर्देश जारी हुआ था कि शहरी क्षेत्र में पानी सप्लाई नगर निगम के माध्यम से होगा. पर, गुमला में नगर परिषद पानी सप्लाई की जिम्मेवारी लेने को तैयार नहीं है.
विभाग को अपनी जिम्मेवारी समझनी चाहिए
गुमला शहर में जलापूर्ति बाधित होने पर लोगों ने विभाग को आड़े हाथों लिया है. वार्ड नौ की पार्षद शीला टोप्पो ने कहा कि जबतक नगर परिषद शहरी जलापूर्ति अपने जिम्मे नहीं लेती है, तबतक पीएचइडी को अपनी जिम्मेवारी समझनी चाहिए.
शहर में सुचारू ढंग से पानी की सप्लाई हो, इसके लिए विभाग जो भी कमी है, उसे दूर करें. जिला बीस सूत्री सदस्य शंकुतला उरांव ने कहा कि पीएचइडी जान बूझ कर लगातार गुमला की जनता को परेशान कर रहा है. जब नागफेनी जलापूर्ति में खराबी है. पूर्व में ही इसकी जानकारी दी गयी थी.
इसके बाद भी विभाग ने उसे ठीक नहीं किया. जिसका खमियाजा है कि पानी बंद हो गया और लोग परेशान हैं. झामुमो के जिला युवा अध्यक्ष जेम्स तिर्की ने कहा कि नगर परिषद, बिजली विभाग व पीएचइडी एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाना बंद करें और जनता को पानी देना सुनिश्चित करें. वार्ड पार्षद केके मिश्र ने कहा कि आपसी लड़ाई को छोड़ कर पानी सप्लाई पर विभाग ध्यान दें. अगर कहीं कोई दिक्कत है, तो उसे दूर करें.
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