शिक्षा, योग व अध्यात्म के क्षेत्र में जला रहे हैं अलख

Updated at : 28 May 2025 11:38 PM (IST)
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शिक्षा, योग व अध्यात्म के क्षेत्र में जला रहे हैं अलख

गोड्डा जिले के ऊर्जावान बुजुर्गों की कहानी

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किसी कार्य को करने के लिए जुनून के सामने उम्र की कोई सीमा नहीं होती. इंसान के अंदर का जज्बा लोगों को प्रोत्साहित करता है. यहां बात की जा रही है पथरगामा प्रखंड क्षेत्र के ऐसे बुजुर्गों की, जो सरकारी नौकरी से सेवानिवृत होने के बाद भी समाज के उत्थान के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में कार्य करते हुए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं. सेवानिवृति के बाद से विभिन्न क्षेत्रों में समाजसेवा के लिए कार्य कर रहे बुजुर्गों से प्रभात खबर ने बातचीत की, जिसपर बुजुर्गों ने अपने विचारों को साझा किया.

अध्यात्म के क्षेत्र में प्रचार-प्रसार कर रहे अजीत मिश्रा

सेवानिवृत प्रधानाध्यापक अजीत मिश्रा सेवानिवृति के बाद से अपना पूरा समय सनातनी धर्म के प्रचार प्रसार में दे रहे हैं. समाज में आध्यात्मिक विचार को साझा करते हुए लोगों को अध्यात्म के प्रति प्रेरित करने का काम कर रहे हैं. सरकारी सेवा में पहली नियुक्ति 20 जनवरी 1988 में उच्च विद्यालय मिहिजाम में हुई थी. शुरू से ही पूजा पाठ के क्षेत्र से जुड़ाव था. दुर्गा पूजन, काली पूजन, साप्ताहिक भागवत कथा, हवन, यज्ञ जैसे कई अनुष्ठानों को संपादित करा चुके हैं, लेकिन नौकरी के दौरान समय की कमी महसूस होती थी. अब सेवानिवृत होने के बाद खुलकर अपना समय पूजा पाठ में दे रहे हैं. साथ ही सनातन धर्म व अध्यात्म के महत्व को बताने का काम कर रहे हैं.

योग के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं सच्चिदानंद मिश्रा

योग है तो जीवन है. इसलिए समाज के अधिक से अधिक लोग योग प्राणायाम से जुड़कर स्वस्थ जीवन व्यतीत करें. इसी उद्देश्य से योग प्राणायाम की जानकारी देने का संकल्प लिया. जनवरी 2025 में एस बी एस एस पी एस जनजातीय डिग्री कॉलेज पथरगामा से सेवानिवृति के बाद डॉ सच्चिदानंद मिश्रा अपनी दूसरी पाली में योग प्राणायाम के क्षेत्र में जुट गये. युवाओं को योग, प्राणायाम के फायदे बताते हुए अभ्यास कराते हैं. प्राणायाम करने से तनाव, चिंता और डिप्रेशन से राहत मिलती है. अगर नियम के अनुसार योग प्राणायाम करते हैं, तो बीमारियां कोसों दूर रहेगी. सेवानिवृति के बाद से लगातार लोगों को योग प्राणायाम के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं, ताकि समाज स्वस्थ रहे.

समाज में शिक्षा का अलख जगा रहे हैं देवनंदन साह

जहां शिक्षा है, वहां सरस्वती विराजमान रहती है. बिना शिक्षा के सबकुछ व्यर्थ है. समाज शिक्षित बने, इसके लिए आज भी प्रयास जारी है. जनवरी 2025 में उत्क्रमित मध्य विद्यालय बोहरना से देवनंदन साह सेवानिवृत हुए. सेवानिवृत होने के बाद समाज के छात्र-छात्राओं को शिक्षित बनाने के उद्देश्य से युवाओं को जागरूक करने का काम कर रहे हैं. इसके साथ ही लोगों को कानून का पालन करने के लिए प्रेरित रते हैं. लोगों को बताते हैं कि किसी भी कार्य को कानून के दायरे में करना चाहिए. युवा पीढ़ी को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं, ताकि समाज के छात्र-छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ाया जा सके. बच्चों को गाइड करने का भी काम कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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