महागामा के विभिन्न आदिवासी गांवों में सोहराय पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. हरिनचारा, दुर्गापुर, करणु लुक्का टोला, दियाजोरी, बागजोरी, नीलांबर, मनियामोर और गोविंदपुर सहित अन्य गांवों में आदिवासी महिलाओं और युवतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर मांदर की थाप पर नृत्य किया. आदिवासी गांवों के मोहल्लों में आकर्षक तोरण द्वार बनाकर सजावट की गयी. ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार सामूहिक रूप से उत्सव मनाया. हरिनचारा के प्रधान होपना मरांडी, राजेश मरांडी और बेटाजी हांसदा ने बताया कि सोहराय पर्व आदिवासी संस्कृति, प्रकृति और जीवन शैली के प्रति गहरी आस्था का प्रतीक है. यह पर्व केवल धार्मिक उत्सव नहीं बल्कि आदिवासियों की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को मनाने का माध्यम भी है. सोहराय पर्व के माध्यम से आदिवासी समुदाय भाईचारा, एकता और सामूहिक खान-पान का संदेश देता है. यह पर्व परिवार और प्रकृति से जुड़ा हुआ है, और पालतू पशु तथा मानव के बीच गहरे रिश्ते को भी दर्शाता है. पर्व धान की अच्छी फसल होने की खुशी में मनाया जाता है. इस अवसर पर महिलाएं और छोटी बच्चियां पारंपरिक वेशभूषा में सज-धज कर मांदर की थाप पर नृत्य कर रही हैं. नृत्य करते समय उन्होंने सामूहिक रूप से पारंपरिक आदिवासी गीत गाकर उत्सव का आनंद बढ़ाया.
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