राजमहल कोल परियोजना के पुनर्वास स्थल बड़ा सिमड़ा गांव में सोहराय पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया. इस अवसर पर परियोजना के एपीएम मनोज इमानुएल टुडू एवं आरके सिंह गांव पहुंचे और मांदर की थाप पर जमकर आनंद उठाया. उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लिए सोहराय पर्व अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे एक सप्ताह तक विभिन्न विधियों से मनाया जाता है. एपीएम मनोज इमानुएल टुडू ने कहा कि सोहराय पर्व भाईचारे, एकता और आपसी सौहार्द का प्रतीक है. इसे भाई-बहन का पर्व भी कहा जाता है, क्योंकि इस अवसर पर बहनें कितनी भी दूर क्यों न हों, अपने भाई के घर अवश्य आती हैं. पर्व के अवसर पर मांझी स्थान को रंग-बिरंगे पताके से सजाया गया था. पूरे गांव में उत्सव का माहौल बना हुआ था. आदिवासी महिलाएं पारंपरिक नृत्य करते हुए गांव भ्रमण कर लोगों को पर्व की शुभकामनाएं देती नजर आयीं. इस मौके पर प्रमोद हेंब्रम, महेंद्र हेंब्रम, विघ्नेश्वर महतो, जयराम यादव, प्रदीप पंडित, प्रवीण कुमार, सुनीलाल हेंब्रम सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित थे.
लौहंडिया पुनर्वास स्थल में भी उमंग के साथ मना सोहराय
इधर, राजमहल कोल परियोजना के लौंहाडिया पुनर्वास स्थल अंतर्गत बड़ा भोराय गांव में ग्राम प्रधान चुनू किस्कू एवं मुखिया प्रतिनिधि संझला हांसदा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ सोहराय पर्व मनाया. इस अवसर पर आदिवासी महिला एवं पुरुष मंडलियों ने मांदर की थाप पर आकर्षक आदिवासी नृत्य प्रस्तुत कर लोगों का मन मोह लिया. मुखिया प्रतिनिधि संझला हांसदा ने कहा कि नये फसल के आगमन पर आदिवासी समाज एक सप्ताह तक इस पर्व को मनाता है. मकर संक्रांति के बाद शिकार परंपरा के साथ पर्व का समापन किया जाता है. उन्होंने बताया कि पर्व के दौरान ग्रामीण आपसी गिले-शिकवे भूलकर एक-दूसरे के साथ मिलकर आनंद लेते हैं. यह पर्व भाईचारे, शांति और सौहार्द का संदेश देता है. सोहराय के दौरान विधि-विधान एवं अनुष्ठानों के साथ प्रकृति की पूजा-अर्चना की जाती है, जिससे आदिवासी संस्कृति की झलक स्पष्ट रूप से देखने को मिलती है. पर्व के दौरान ग्रामीण पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में नजर आये. मौके पर सुकुमार सोरेन, देवान मुर्मू, प्रेमलाल हांसदा, मैनेजर मरांडी, संतोष किस्कू सहित अन्य गणमान्य ग्रामीण उपस्थित थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

